कपिल देव अपने समय के बेहतरीन ऑलराउंडर और सफल कप्तान थे। © Getty Images
कपिल देव अपने समय के बेहतरीन ऑलराउंडर और सफल कप्तान थे। © Getty Images

आज का दिन क्रिकेट जगत में हमेशा ही याद किया जाएगा क्योंकि आज के दिन ही जन्म हुआ था उस खिलाड़ी जो आगे चलकर भारतीय क्रिकेट का सबसे बेहतरीन कप्तान बनने वाला था। 6 जनवरी 1959 को भारत के महान ऑलराउंडर और कप्तान कपिल देव का जन्म हुआ था। कपिल देव यकीनन ही भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक हैं। उन्होंने भारतीय टीम को पहला विश्वकप जिताया था और इससे बड़ी जीत शायद ही टीम इंडिया को मिल सकती थी। 

90 के दशक में पैदा होने वाले हर बच्चे ने बचपन से ही कपिल देव के विश्वकप जीतने की कहानी सुनी होगी। मैं भी उन्हीं में से एक हूं। मेरे पापा हमेशा ही मुझे बताते रहते थे कि कैसे कपिल देव ने वेस्टइंडीज जैसी दिग्गज टीम के मुंह से जीत छीन ली थी। भारत ने फाइनल मैच में केवल 183 रन बनाए थे जो वेस्टइंडीज के मजबूत बल्लेबाजी क्रम के आगे कुछ नहीं था। भारत की ओर से कोई भी बल्लेबाज 40 का आंकड़ा पार नहीं कर सका था और वेस्टइंडीज टीम को लगा उनकी जीत सुनिश्चित है। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना किसी ने भी नहीं की थी।

कपिल देव ने अपने साथी खिलाड़ियों को प्रेरित किया, उन्होंने कहा हो सकता है कि यह एक जीतने लायक स्कोर नहीं है लेकिन ये लड़ने के लायक है और हम लड़ेंगे। बस फिर क्या था भारतीय टीम एक नए जोश के साथ मैदान पर उतरी और विवियन रिचर्डस और क्लाइव लॉयड जैसे दिग्गज बल्लेबाज भी भारत को पहला विश्वकप जीतने से रोक नहीं सके। भारत ने लाला अमरनाथ और मदन लाल की शानदार गेंदबाजी से 140 पर ही विपक्षी टीम को समेट दिया और भारत विश्व विजेता बना। आज हम उस विश्व विजेता भारतीय कप्तान के जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें जानेंगे।

1-बेहतरीन ऑलराउंडर: कपिल देव को क्रिकेट से संन्यास लिए दो दशक बीत चुके हैं लेकिन आज भी बतौर ऑलराउंडर उनके आंकड़े लाजवाब हैं। कपिल देव ने अपने करियर में 5248 रन बनाने के साथ 434 विकेट लिए हैं जो आज भी रिकॉर्ड है। वह अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने 5000 रन और 400 विकेट के आंकड़े को पार किया है।

2-कपिल देव बनने की दृढ़ता: कपिल देव को देश प्रेम आजाद ने पहली बार में कोचिंग करने से मना कर दिया था लेकिन उनके पिता ने आजाद को किसी तरह मना लिया। कपिल देव की ट्रेनिग के दिन काफी कठिनाईओं से भरे थे। उनका स्कूल 1:30 बजे खत्म होता था और फिर वह साइकिल से 1:50 तक घर पहुंचते थे। वहां से लंच करने के बाद वह 2:15 पर ग्राउंड के लिए निकलते थे जहां पहुंचने में उन्हें 2:40 बज जाते थे। चंडीगढ़ के 40 डिग्री से भी अधिक के तापमान में वह दोपहर भर अभ्यास करते थे। यह सच है कि कपिल देव बनना इतना आसान नहीं था।ॉ

जसप्रीत बुमराह ने एबी डी विलियर्स को टेस्ट क्रिकेट का पहला शिकार बनाया
जसप्रीत बुमराह ने एबी डी विलियर्स को टेस्ट क्रिकेट का पहला शिकार बनाया

3-विनम्र स्वभाव: कपिल बचपन से ही सभ्य और शांत स्वभाव के थे। फैसलाबाद में खेले गए अपने डेब्यू मैच में जब भारत ने 425 पर छह विकेट गंवा दिए तो कपिल दिलीप वेंगसरकर का साथ देने के लिए मैदान पर आए। कपिल देव ने बड़े ही विनम्र तरीके से अंपायर से पूछा, “क्या मुझे लेग स्टंप गार्ड मिल सकता है”। उनकी इस बात पर पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने उनका बहुत मजाक उड़ाया लेकिन बाद में उन्होंने कपिल से कहा कि मैदान पर इतना विनम्र स्वभाव नहीं दिखाना चाहिए। जिसका खामियाजा बाद में उन्हें ही मिला।

4-एल्युमिनियम का बल्ला: कपिल देव जब 1980-81 में पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए जा रहे थे तब एयरपोर्ट पर उनके साथ एक अजीब घटना हुई। सिडनी के किंग्सफोर्ड एयरपोर्ट पर कस्टम ऑफिसर ने उनसे पूछा कि क्या आपके किटबैग में कोई ‘करी’ है?, इस पर कपिल ने जवाब दिया, ” नहीं। फिर ऑफिसर में पूछा कि क्या कोई लकड़ी का सामान है? जिसपर कपिल ने कहा कि नहीं मै एल्युमिनियम का बल्ला ही इस्तेमाल करता हूं।

चेन्नई सुपर किंग्स मे लौटे महेंद्र सिंह धोनी, सुरेश रैना, रवींद्र जडेजा; ट्विटर पर फैंस ने जाहिर की खुशी
चेन्नई सुपर किंग्स मे लौटे महेंद्र सिंह धोनी, सुरेश रैना, रवींद्र जडेजा; ट्विटर पर फैंस ने जाहिर की खुशी

5- अनोखा प्रस्ताव: कपिल देव ने जिस तरह अपनी पत्नी रोमी के सामने शादी का प्रस्ताव रखा था वह सबसे अलग था। कपिल उनके साफ कहने में हिचकिचा रहे थे इसलिए उन्होंने अलग ही रास्ता चुना। कपिल ने ट्रेन में यात्रा के दौरान रोमी के सामने अपना प्रस्ताव अपने ही स्टाईल में रखा। जब ट्रेन एक खूबसूरत जगह से गुजरी तब कपिल ने उनसे कहा, “क्या तुम इस जगह की तस्वीर लेना चाहोगी जो हम अपने बच्चों को दिखा सकें?। रोमी को यह बात समझने में थोड़ी देर लगी कि कपिल उनके सामने शादी का प्रस्ताव रख रहे हैं लेकिन उन्होंने हां कर दी।

6-सनी की चाल: कपिल देव गेंदबाजी करते हुए कई बार 140-145 की गति को पार कर जाते थे लेकिन उन्होंने सही लाइन और लेंथ के लिए गति को धीरे धीरे कम किया। मैदान पर जब कभी भी सुनील गावस्कर को ऐसा लगता था कि कपिल थक गए हैं तो वह स्लिप से दौड़कर उनके पास आते थे और कहते थे, “मैं यहां तुम्हें आराम देने के लिए आया हूं, मैं जब तक वापस अपनी जगह पर जाऊं, तुम तब तक आराम से सांस ले लो।” यही सपोर्ट था जिसकी जरूरत कपिल को होती थी और इसके बाद वह फिर से अपनी गति पर लौट आते थे।

7-कभी रन ऑउट न होना: कपिल विकेटों के बीच दौड़ने में कमाल थे। वह अपने टेस्ट करियर की 184 पारियों में कभी रन ऑउट नहीं हुए। मुदस्सर नज़र उनके बाद 116 पारियों में रन ऑउट न होने के रिकॉर्ड के साथ हैं। वहीं पॉल कॉलिंगवुड 115 पारियों और ग्रेंम हिक 114 पारियों के साथ अगले स्थान पर हैं।

8-बेखौफ: यह बात 1983-84 में कोलकाता के ईडन गार्डन में भारतीय टीम 90 रन पर ऑल आउट हो गई थी और वेस्टइंडीज से सीरीज हार गई थी। उस समय फैंस का गुस्सा चरम पर था। भारतीय टीम की बस पर लोगों ने पत्थर फेंके। पूरी टीम ने इससे बचने के लिए या तो हेलमेट पहन लिया या नीचे झुक गए लेकिन कपिल देव अकेले ऐसे शख्स थे जो वैसे ही बैठे रहे।

9-दिलीप वेंगसरकर के साथ दोस्ती: कपिल देव और दिलीप वेंगसरकर की अच्छी दोस्ती थी। साल 1986-87 में जब कपिल देव ने अपने 300 टेस्ट विकेट पूरे लिए और वेंगसरकर ने 166 रनों की पारी खेली तब इस मामले में एक नया मोड़ आया। दोनों ही खिलाड़ी इस प्रदर्शन से काफी खुश थे। कपिल को मैन ऑफ द मैच और दिलीप को मैन ऑफ द सीरीज का अवार्ड दिया गया लेकिन वेंगसरकर ने इसे लेने से इनकार कर दिया क्योंकि उन्होंने सूखी पिच पर रन बनाए थे लेकिन कपिल ने ऐसी पिच पर चार विकेट लिए थे जो कि बड़ी बात थी। वहीं जब कपिल देव ने उन्हें मैन ऑफ द मैच का खिताब देना चाहा तो उन्होंने उससे भी मना कर दिया। साथ ही वेंगसरकर और कपिल ने भारत के लिए कई साझेदारियां बनाई हैं। वहीं कपिल और दिलीप एक साथ 100 टेस्ट खेलने वाले पहले जोड़ीदार हैं। दिलीप अकेले खिलाड़ी थे जो कपिल के 100, 200, 300 और 400 विकेट पूरे होने वाले मैच में मौजूद थे।

10-दोहरा रिकॉर्ड: सभी जानते हैं कि 1993-94 में ग्रीन पार्क स्टेडियम में कपिल देव रिचर्ड हेडली के 431 टेस्ट विकेटों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए थे। लेकिन यह बात कम लोगों को पता है कि इस मैच में कपिल टेस्ट के साथ वनडे में भी सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज भी बन गए थे। वह मुथैया मुरलीधरन और डेनियस लिली के बीच में ऐसा करने वाले अकेले खिलाड़ी हैं।