टीम इंडिया © AFP
टीम इंडिया © AFP

टी20 विश्व कप 2016 अपने मुख्य राऊंड की ओर अग्रसर हो चला है  और भारतीय टीम भी देर सवेर अपना रास्ता ढूंढने में लगी हुई है। लेकिन इस बीच एक सवाल मुखर हो रहा है वो है भारतीय बल्लेबाजी का आवश्यकता से अधिक विराट कोहली पर निर्भर होना जो विश्व कप टी20 जीतने की प्रबल दावेदार मानी जा रही टीम के लिए बिल्कुल सही नहीं है। गौर करने वाली बात यह है कि एशिया कप में विजेता बनी टीम इंडिया की जीत के पीछे विराट कोहली का एक बड़ा योगदान रहा था और उन्होंने 5 मैचों में सर्वाधिक 153 रन बनाए थे। वहीं रोहित शर्मा के अलावा और कोई भी बल्लेबाज 100 रन बनाने में कामयाब नहीं हो सका था। यह बताता है कि भारतीय मध्यक्रम किन मुश्किलों से गुजर रहा है। भारत बनाम बांग्लादेश, टी20 विश्व कप 2016 लाइव स्कोरकार्ड देखने के लिए क्लिक करें…

न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 मैच में यही देखने को मिला था जब विराट कोहली के आउट होने के बाद पूरी टीम एक दम से 79 रनों के स्कोर पर भरभरा गई। इस दौरान विराट कोहली(23), महेंद्र सिंह धोनी (30) और आर. अश्विन(10) के अलावा बाकी 8 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा छूने तक में कामयाब नहीं हो पाए थे। साथ ही तीन बल्लेबाज ऐसे रहे थे जिनका व्यक्तिगत स्कोर एक रन रहा था। ये सवाल पहले मैच के बाद ही खत्म नहीं हो जाता बल्कि यही कहानी पाकिस्तान के खिलाफ 19 मार्च को खेले गए मैच में भी दोहराई गई। टीम इंडिया ने एक समय 23 रनों पर अपने शीर्ष 3 बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए थे। ऐसे में लग रहा था कि अब पाकिस्तान मैच में पकड़ बना लेगा। लेकिन विराट कोहली ने एक बार फिर से आकर पारी संभाल ली और आखिरकार भारतीय टीम ने 6 विकेट से जीत दर्ज करते हुए टूर्नामेंट में वापसी की। ये भी पढ़ें: टी20 विश्व कप 2016, भारत बनाम बांग्लादेश(प्रिव्यू): भारत के सामने बांग्लादेशी चुनौती

इस बीच सवाल उठता है कि अगर विराट कोहली ना चले तो क्या होगा? जाहिर है  टीम इंडिया को अगर सेमीफाइनल में आसानी से पहुंचना है तो उसे शीर्ष स्तर का खेल दिखाना होगा और अच्छे रन रेट के साथ दावेदारी प्रस्तुत करनी होगी। भारतीय टीम को अभी सुपर10 स्टेज में बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया से भिड़ना है। ऐसे में टीम इंडिया को अपने मध्यक्रम के प्रदर्शन को ठीक करने के लिए कुछ प्रयोगों की जरूरत है। वर्ना ऑस्ट्रेलिया जैसी सशक्त टीम के सामने टीम इंडिया को एक बड़ा झटका लग सकता है। इन प्रयोगों को टीम इंडिया बांग्लादेश के खिलाफ  बुधवार को खेले जाने वाले  मैच में आजमा सकती है।  लेकिन क्या होंगे ये प्रयोग? आइए गौर करते हैं।

चौथे नंबर पर आए धोनी: कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को अब ऊपरी क्रम में बल्लेबाजी करने की जरूरत हैं। पिछले कुछ समय से सुरेश रैना बुरी तरह से चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए फेल हुए हैं। यही नहीं इस क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए उनका स्ट्राइक रेट भी प्रभावित हुआ है और अब वह 122 के स्ट्राइक के आसपास ही रन बना पाते हैं। जाहिर है कि अगर रैना को चौथे नंबर की जगह 6ठे नंबर पर खिलाया जाए तो वे कुछ ज्यादा असरदार साबित हो सकते हैं। आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो ऐसा ही पता चलता है। रैना तीसरे व छठे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए अब तक सबसे सफल रहे हैं। रैना ने छठे नंबर पर अब तक 10 पारियों में बल्लेबाजी की है और इस दौरान उनका रन बनाने का औसत 36 का रहा है। साथ ही स्ट्राइक रेट भी 146.93 का है। जाहिर है, अगर रैना की बल्लेबाजी पॉजीशन में बदलाव किया  जाता है तो वे भारतीय टीम को अतिरिक्त लाभ दे सकते हैं। तब शायद फिर से फिर से भारतीय क्रिकेट प्रेमी कह पाएं। रैना ‘हैं ना’।

वहीं कप्तान धोनी की बात करें तो वे तीसरे क्रम से सातवें क्रम तक बल्लेबाजी कर चुके हैं। लेकिन आंकड़ों के मुताबिक धोनी ने सर्वाधिक औसत से रन चौथे क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए बनाए हैं। धोनी ने चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए कुल 8 पारियों में 44.66 की औसत से 134 रन बनाए हैं और इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट भी 142.55 का रहा है।  भारतीय कप्तान को सुपर10 के इस अहम पड़ाव पर इस फैसले पर जरूर गौर करना चाहिए। तभी इस डांवाडोल हो रही भारतीय बल्लेबाजी को कुछ मदद मिल सकती है

हार्दिक पांड्या की जगह हरभजन सिंह: भारतीय उपमहाद्वीप की पिचें लगातार घुमाव ले रही हैं और स्पिनरों के लिए ज्यादा मददगार साबित हो रही हैं। ऐसे में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अन्य टीमों की ही तरह तीन विशेषज्ञों की रणनीति को अपना सकते हैं। ऐसे में हरभजन सिंह सबसे बढ़िया विकल्प हो सकते हैं। हरभजन सिंह एक ऐसे गेंदबाज हैं जो किफायती गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं। साथ ही निचले क्रम पर आकर बल्लेबाजी में अच्छे हाथ भी दिखा सकते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि हार्दिक पांड्या के मुकाबले रन बनाने के मामले में हरभजन सिंह उनसे भारी पड़ते नजर आते हैं। हरभजन ने जहां 13.50 की औसत से टी20 क्रिकेट में रन बनाए हैं। वहीं पांड्या का औसत महज 10.50 का है। ऐसे में गौर करने वाली बात होगी कि बड़े मैचों के पहले कप्तान धोनी पांड्या की जगह हरभजन को जगह देना माकूल समझें।

ये भी पढ़ें: टी20 विश्व कप 2016, भारत बनाम बांग्लादेश(प्रिव्यू): भारत के सामने बांग्लादेशी चुनौती