Jay Jaiswal
जय जायसवाल क्रिकेटकंट्री हिंदी में बतौर सीनियर राइटर कार्यरत हैं
Written by Jay Jaiswal
Last Published on - February 19, 2016 1:15 PM IST


क्रिकेट के खेल में जो बदलाव आए हैं उनका परिणाम अब दिखने लगा है। टीमें 400 रन बनाकर सुरक्षित नहीं हैं, बल्लेबाज 31 गेंद में सैकड़ा लगा देते हैं तो वनडे क्रिकेट में बल्लेबाज दोहरा शतक भी लगाने लगे हैं। ऐसा नही कि बदलाव का ये दौर सिर्फ वनडे क्रिकेट में दिख रहा है टेस्ट क्रिकेट में डेविड वार्नर, स्टीवन स्मिथ, ब्रैंडन मैकुलम जैसे लिमिटेड ओवर स्पेशलिस्ट कहे जाने वाले बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट में लगातार रन बना रहे है जिससे ये साबित हो रहा है कि अच्छा बल्लेबाज हर प्रारूप में सफल हो सकता है। सफलता के लिए पहले खुद को एक अच्छा टेस्ट खिलाड़ी साबित करना जरूरी नही रह गया है।

क्रिकेट पिछले दो दशक तक छाए रहे चेहरों सचिन तेंदुलकर, ब्रायन लारा, रिकी पोंटिंग, वसीम अकरम, ग्लेन मैक्ग्रा, शेन वार्न, मुरलीधरन आदि से आगे बढ़ नए चेहरों ए बी डीविलियर्स, विराट कोहली, डेविड वार्नर, स्टीवन स्मिथ, मिचेल स्टार्क आदि को नई पहचान दे रहा है। हर टीम में जो खिलाड़ी कुछ समय पहले तक युवा थे, अब अनुभवी बल्लेबाज या गेंदबाज की भूमिका मे उतर चुके हैं। ये युवा अपने साथ नई तरह की क्रिकेट भी लेकर आए हैं। ये पहली गेंद पर रिवर्स स्वीप खेलने में नहीं कतराते और ना ही बल्लेबाज को आउट कराने के लिए नई गेंदों के ईजाद करने में पीछे हटते हैं। पिछले कुछ सालों में क्रिकेट में नए तरह के शाट्स देखे जैसे दिल्स्कूप, स्वीच हिट, हेलीकाप्टर शॉट और ना जाने क्या-क्या। गेंदबाज भी इस मामले में ज्यादा पीछे नहीं रहे उन्होने कैरम बॉल, स्लोअर बाउंसर, बैकरिस्ट स्लोअर बॉल आदि जैसे प्रयोग क्रिकेट में किए। इन प्रयोगों में ज्यादातर सफल ही रहे हैं। इनके इस्तेमाल से क्रिकेट को भी फायदा मिल रहा है। ALSO READ: सावधान टीम इंडिया! आगे है बांग्लादेश

टेस्ट क्रिकेट में भी तेजी आई है लोगों के लिए अब टेस्ट क्रिकेट को पांच दिन का एक मैच ना होकर पांच दिन में पांच वनडे हो गया है। टीमें टेस्ट क्रिकेट में एक दिन में तीन सौ से ज्यादा रन बनाने लगे हैं। सबसे ज्यादा फर्क फील्डिंग पर पड़ा है जहां पहले टीम में एक्का दूक्का अच्छे फील्डर होते थे आज वही हर टीम में कम से कम 5-6 स्पेशलिस्ट फील्डर हो गए हैं। इसका कारण ये है कि आज जितना ध्यान बल्लेबाजी और गेंदबाजी पर दिया जाता है उतना ही ध्यान फील्डिंग पर भी दिया जाने लगा है।
पिछले कुछ सालों में आईसीसी ने क्रिकेट के नियमों में भी बहुत से परिवर्तन किये। कई विशेषज्ञों ने इसे टेस्ट क्रिकेट के अस्तित्व के लिए खतरा बताया। लेकिन आलोचनाओं के उलट इससे टेस्ट क्रिकेट को फायदा ही हुआ। तेज खेल के कारण टेस्ट क्रिकेट में पहले की तुलना में अब ज्यादा मैचों के परिणाम आने लगा है। तो जाहिर सी बात है कि टेस्ट मैचों में लोगों का ध्यान आएगा क्योंकि मैच में तेज खेल की वजह से नतीजा निकलने लगा जिसके कारण लोगों ने टेस्ट क्रिकेट को और ज्यादा देखना शुरू कर दिया। ALSO READ: एशिया कप 2011-12(वीडियो): जब विराट कोहली के आगे नतमस्तक हुआ पाकिस्तान
एक और बड़ा बदलाव यह देखने को मिला कि मुकाबलों में बड़ी टीमों का प्रभुत्व नही रह गया खासकर लिमिटेड ओवर की क्रिकेट में, मैच में नंबर 1 की टीम होने का मतलब ये नहीं कि आप मैच आसानी से जीत जाओगे। हाल ही में इस बात को बांग्लादेश की वनडे टीम ने साबित भी किया। बांग्लादेश ने भारत, साउथ अफ्रीका जैसी मजबूत टीमों को हरा कर ये दिखाया कि बदलाव के इस दौर में आप किसी भी टीम को हल्के में नहीं ले सकते। ऐसा नहीं है कि क्रिकेट ने हर बदलाव को स्वीकार कर लिया हो क्रिकेट ने उन्ही बदलावों को अपनाया जिनसे उसको फायदा हुआ ‘बॉल आउट’ और ‘सुपरसब’ नियमों का बुरी तरह फेल होना इस बात का प्रमाण है।
इस लेख के मूल बिंदू की बात करे तो क्रिकेट में बदलाव की एक नई हवा चल रही है जो क्रिकेट को नई दिशा में ले जा रही है और ये कहां तक ले जाएगी ये तो आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन अगर अभी की बात करें तो क्रिकेट ने इस बदलाव को अपनाया है, साथ ही साथ दर्शक भी क्रिकेट में आए इस बदलाव को क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में समान रूप से स्वीकार रहे हैं और आने वाले समय में भी क्रिकेट अपने में उन्ही बदलावों को स्वीकार करेगा जो उसके लिए फायदेमंद होंगे।
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