Devbrat Bajpai
देवब्रत वाजपेयी क्रिकेटकंट्री हिंदी के साथ senior correspondent के पद पर कार्यरत हैं
Written by Devbrat Bajpai
Last Updated on - February 18, 2016 1:08 PM IST


भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपने प्रयोगों को लेकर हमेशा से जाने गए हैं और अब जब उनकी कप्तानी खराब गेंदबाजी के कारण डांवाडोल नजर आ रही थी उन्होंने एक और प्रयोग कर डाला जिसने उनकी टीम को टी20 विश्व कप 2016 का प्रबल दावेदार बना दिया है। हम बात कर रहे हैं धोनी का शुरुआती ओवरों में आशीष नेहरा और आर. अश्विन के साथ गेंदबाजी की शुरुआत करना। अंतिम दो टी20 मैचों में जिस चतुराई से धोनी ने अश्विन का शुरुआती ओवरों में इस्तेमाल किया और श्रीलंकाई बल्लेबाजों को नाकों चने चबवाए उससे उन्होंने एक बार फिर से साबित कर दिया कि वो भारत के सबसे बेहतरीन कप्तान वैसे ही नहीं हैं। ये भी पढ़ें: ये क्रिकेटर जिन्होंने बदल दिया अपना मजहब
जैसा कि अगले कुछ दिनों में बांग्लादेश में एशिया कप टी20 और उसके कुछ दिनों बाद भारत में ही विश्व कप टी20 शुरू होने जा रहा है। ऐसे में धोनी जाहिर तौर पर विपक्षी बल्लेबाजों पर नकेल कसने के लिए अपनी नए नवेले नुकीले हथियार अश्विन-नेहरा की जोड़ी को शुरुआती ओवरों में जमकर आजमाना चाहेंगे ताकि विपक्षी टीम के शुरू में ही विकेट निकालकर उन्हें पिछले कदमों पर धकेला जा सके। श्रीलंका के खिलाफ पुणे में खेले गए पहले टी20 मैच में धोनी ने छोटे लक्ष्य को बचाने के लिए तेज गेंदबाजों से गेंदबाजी की शुरुआत की थी। लेकिन अगले दो मैचों में जहां बैटिंग विकेट था वहां धोनी ने अपने मुहरे बदल दिए। उन्होंने अनुभवी नेहरा के साथ अश्विन को गेंदबाजी के लिए बुलाया।
फील्डरों के 6 ओवरों के भीतर 30 गज के घेरे के अंदर रहने के खतरे को धोनी ने अश्विन के सामने दरकिनार कर दिया और अश्विन को श्रीलंकाई बल्लेबाजों का सामना करने को लगा दिया। अश्विन ने धोनी को बिल्कुल निराश नहीं किया और धड़ाधड़ विकेट निकालते हुए विरोधी टीम को पिछले कदमों पर खड़ा करने के लिए मजबूर कर दिया। अश्विन ने पूरी सीरीज में 7 विकेट लिए और भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई। ऑस्ट्रेलिया में जहां विकेट बल्लेबाजों के ज्यादा अनुकूल था वहां भी अश्विन ने नेहरा के साथ गेंदबाजी की शुरुआत करते हुए पहले टी20 मैच में एक साथ 3 विकेट लिए थे। ये भी पढ़ें: जानिए भारतीय क्रिकेटरों के बिजनेस वेंचर
हालांकि नेहरा ने तीनों मैचों में गेंदबाजी की शुरुआत की और इस दौरान अश्विन को पहले या दूसरे परिवर्तन के रूप में इस्तेमाल किया गया। लेकिन धोनी ने जिस तरह से इन दोनों को एक साथ गेंदबाजी करा के भारतीय गेंदबाजी की एक नई धुरी को पहचाना है वह आने वाले दो बड़े टूर्नामेंट्स में खरी साबित हो सकती है। पिछले लंबे समय से भारतीय टीम एक ऐसे गेंदबाज के तलाश में थी जो अश्विन को आक्रमण करने का मौका दे सके। नेहरा आने के बाद वह तलाश पूरी होती नजर आ रही है। साल 2015 विश्व कप के बाद तेज गेंदबाज मोहित शर्मा और मोहम्मद शमी को चोट के कारण टीम से बाहर होना पड़ा। वहीं भुवनेश्वर कुमार खराब फॉर्म के कारण टीम से बाहर चल रहे हैं। वहीं ईशांत शर्मा और उमेश यादव भी गेंदबाजी में अपनी धार नहीं दिखा पा रहे हैं।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नेहरा के आने से कप्तान धोनी की एक अच्छे गेंदबाज की कमी पूरी हुई है? शायद हां! पहले पिछले साल भारत की सरजमीं पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए दो टी20 मैचों के परिणाम पर गौर फरमाते हैं। उस समय भारत के पास भुवनेश्वर कुमार, श्रीनाथ अरविंद और मोहित शर्मा जैसे गेंदबाज थे, लेकिन पहले मैच में वह 199 रनों से पहाड़ जैसे स्कोर को बचाने में भी नाकाफी साबित हुए थे। ऐसी परिस्थिति में धोनी ने दूसरे टी20 मैच में गेदबाजी की शुरुआत आर. अश्विन से करवाई और अश्विन ने बेहतरीन गेंदबाजी का मुजाहिरा पेश किया पावरप्ले में दक्षिण अफ्रीका का 38/2 स्कोर बनने दिया जो पहले टी20 मैच में बने 67 रनों के मुकाबले काफी कम था। बहरहाल, अच्छे जोड़ीदार की कमी के कारण दक्षिण अफ्रीका यह मैच 6 विकेट से जीत गया।
अगर अश्विन को दूसरे छोर से साथ देने वाला कोई गेंदबाज मिल जाए तो वह कहर ढाने का माद्दा रखते हैं। आगामी दोनों टूर्नामेंट भारत और बांग्लादेश में खेले जाने हैं यहां पिचें धीमी रहेंगी और बल्लेबाजों के लिए ज्यादा अनुकूल रहेंगे। इसका मतलब है कि गेंदबाजों को चतुराई से गेंदबाजी करनी होगी। ऐसे में भारतीय टीम को अपनी इस नई जोड़ी से काफी आशाएं रहेंगी।
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