ऑस्ट्रेलियाई टीम © Getty Images
ऑस्ट्रेलियाई टीम © Getty Images

1 जून से शुरू हो रही चैंपियंस ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलियाई टीम हमेशा की तरह खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही है। हालांकि खिलाड़ियों और बोर्ड के बीच आपसी विवाद ऑस्ट्रेलिया के अभियान को झटका पहुंचा सकता है, लेकिन कप्तान स्टीवन स्मिथ ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी टीम टूर्नामेंट जीतने के इरादे से इंग्लैंड पहुंची है और विवाद का खिलाड़ियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया को इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और बांग्लादेश के साथ ग्रु ए में रखा गया है। 2 बार चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीतने वाली ऑस्ट्रेलिया क्या इस बार भी चैंपियन बनेगी। आइए नजर डालते हैं ऑस्ट्रेलिया की ताकत और कमजोरी पर। ये भी पढ़ें: चैंपियंस ट्रॉफी: अपने घर पर चैंपियन बनेगी इंग्लैंड?

चैंपियंस ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया का कार्यक्रम: चैंपियंस ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया को अपने अभियान की शुरुआत 2 जून से न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले से करनी है, दोनों के बीच ये मुकाबला एजबेस्टन में खेला जाएगा। इसके बाद टीम 5 जून को केनिंग्टन ओवल में बांग्लादेश और फिर 10 जून को एडबेस्टन में चिर प्रतिद्वंदी इंग्लैंड से दो-दो हाथ करेगी।

कंगारुओं की ताकत: कंगारू टीम में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो अपने दम पर मैच का रुख पलटने का माद्दा रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया की टीम काफी संतुलित और मजबूत नजर आ रही है। टीम के पास क्रिस लिन, डेविड वॉर्नर के रूप में विस्फोटक बल्लेबाज हैं, तो वहीं तीसरे नंबर पर स्टीवन स्मिथ के रूप में दुनिया का सबसे शानदार बल्लेबाज है। इसके अलावा टीम के मध्यक्रम में मोइसिस हेनरीक्स, एरॉन फिंच, ग्लेन मैक्सवेल, मैथ्यू वेड जैसे धुरंधर हैं। वैसे अभी ये साफ नहीं है कि वॉर्नर के साथ सलामी बल्लेबाजी कौन करेगा।

गेंदबाजी में भी टीम के पास एक से बढ़कर एक धुरंधर हैं। जेम्स पैटिंसन के आने से टीम की गेंदबाजी और मजबूत हुई है। पैटिंसन के अलावा टीम के पास मिचेल स्टार्क, पेट कमिंस, जोश हेजलवुड और स्पिनर एडम जंपा हैं। इन सभी गेंदबाजों का हालिया प्रदर्शन शानदार रहा है। ऐसे में टीम की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही काफी मजबूत नजर आ रही है। ये भी पढ़ें: चैंपियंस ट्रॉफी(प्रिव्यू): बांग्लादेश में है ‘चैंपियंस’ को चित करने का दम

क्या है ऑस्ट्रेलिया की कमजोरी: भले ही ऑस्ट्रेलियाई टीम सबसे मजबूत नजर आ रही है। इसके बावजूद टीम की कुछ कमजोरियां हैं जो उनके लिए खतरा पैदा कर सकतीं हैं। मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड चोटिल होने के बाद सीधा चैंपियंस ट्रॉफी में वापसी करेंगे, ऐसे में इतने बड़े टूर्नामेंट में वापसी करना दोनों के लिए आसान नहीं रहेगा। इसके अलावा टीम के पास एडम जंपा के रूप में एक ही स्पिन गेंदबाज है और जंपा का राष्ट्रीय टीम के साथ इंग्लैंड का ये पहला दौरा है।

ऐसे में इंग्लैंड के हालातों में उन्हें ढलने में समय लग सकता है और जो टीम के लिए खतरा बन सकता है क्योंकि टूर्नामेंट में हर मैच बेहद अहम है। बल्लेबाजी में भी लिन का बल्ला अब तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने नाम के अनुरूप नहीं चल सका है, वहीं मैक्सवेल भी अपने विकेट की कीमत नहीं पहचान रहे हैं और कई मौकों पर उन्हें विकेट फेंकते देखा गया है।

किन खिलाड़ियों पर रहेंगी नजरें: बल्लेबाजी की बात करें तो टीम की बल्लेबाजी स्टीवन स्मिथ और डेविड वॉर्नर पर काफी हद तक निर्भर रहेगी। स्मिथ ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 95 मैचों में 43.67 के औसत के साथ 3,101 रन बनाए हैं, इस दौरान उनके बल्ले से 8 शतक और 16 अर्धशतक निकले हैं। पिछले 2 सालों में तो इस बल्लेबाज के बल्ले से रनों का अंबार लगा है और इस दौरान स्मिथ ने लगभग 53 के औसत से 31 मैचों में 1,375 रन बनाए हैं और उन्होंने 4 शतक, 8 अर्धशतक ठोके हैं।

टीम के दूसरे तुरुप के इक्के यानी वॉर्नर के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो उन्होंने 93 मैचों में 44.84 के औसत के साथ 3,946 रन बनाए हैं और उन्होंने 13 शतक, 16 अर्धशतक लगाए हैं। पिछले 2 साल के प्रदर्शन की बात करें तो वॉर्नर ने 28 मैचों में लगभग 68 के औसत के साथ 1,755 रन बनाए हैं, इस दौरान वॉर्नर ने 9 शतक और 4 अर्धशतक लगाए हैं।

वहीं टीम की गेंदबाजी की बात करें तो मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड के कंधों पर विपक्षी टीम को समेटने की जिम्मेदारी होगी। स्टार्क ने अब तक 65 मैचों में 129 विकेट झटके हैं। पिछले 2 सालों में इस गेंदबाज ने 19 मुकाबलों में 39 विकेट झटके हैं और इन 2 सालों में इस गेंदबाज का इकॉनमी रेट लगभग 5 का रहा है। हेजलवुड के प्रदर्शन की बात करें तो उन्होंने 35 मैचों में अब तक 55 विकेट झटके हैं। इस दौरान उनका इकॉनमी रेट सिर्फ 4.65 का रहा है। पिछले 2 सालों में ये गेंदबाज और उभरकर सामने आया है और उन्होंने 22 मैचों में 36 विकेट झटके हैं। इस दौरान उनका इकॉनमी रेट सिर्फ 4.50 का रहा है।

चैंपियंस ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया का प्रदर्शन: चैंपियंस ट्रॉफी के शुरुआती दो चरणों में टीम क्वॉर्टरफाइनल से ही बाहर हो गई थी। इसके बाद भी टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया का सफर अच्छा नहीं रहा और टीम को 2000-01, 2002-03 और साल 2004 में भी टूर्नामेंट से निराश होकर ही वापस लौटना पड़ा। हालांकि इसके बाद टीम ने वापसी की और 2006-07 और फिर 2009-10 में खेले गए टूर्नामेंट को जीतकर इतिहास रच दिया। 2013 में टीम को शुरुआती दौर से ही बाहर होना पड़ गया था।

चैंपियंस ट्रॉफी के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम: डेविड वॉर्नर, एरॉन फिंच, स्टीवन स्मिथ, क्रिस लिन, ट्रेविस हेड, ग्लेन मैक्सवेल, मोइसेस हेनरिक्स, मार्कस स्टोइनिस, मैथ्यू वेड, मिचेल स्टार्क, जॉन हेस्टिंग्स, जेम्स पेटिंसन, पेट कमिंस, जोश हेजलवुड, एडम जंपा