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IND vs NZ: पुणे की पिच पर- शिकार खुद यहां शिकार हो गया?
पुणे की पिच, स्पिनर और भारत. एक बार फिर टीम इंडिया अपने ही बुने जाल में फंस गई. विपक्षी टीम के लिए बनाए जाने वाली स्पिनर्स के लिए मददगार पिच पर भारतीय टीम के बल्लेबाज खुद ही संघर्ष करते हुए दिखे. ऐसा पहले भी हुआ था. 8 साल पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ. 2016 में पुणे...
Published On Oct 25, 2024, 01:48 PM IST
Last UpdatedOct 25, 2024, 01:48 PM IST
Mitchell Santner took 7 wickets in first innings of pune test
पुणे की पिच, स्पिनर और भारत. एक बार फिर टीम इंडिया अपने ही बुने जाल में फंस गई. विपक्षी टीम के लिए बनाए जाने वाली स्पिनर्स के लिए मददगार पिच पर भारतीय टीम के बल्लेबाज खुद ही संघर्ष करते हुए दिखे. ऐसा पहले भी हुआ था. 8 साल पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ. 2016 में पुणे की इसी मैदान पर भारत ने ऐसी ही पिच बनाई थी. और कुछ इसी तरह वह फंस गई थी. कई बार ऐसा हो चुका है. लेकिन न्यूजीलैंड के बाएं हाथ के स्पिनर मिशेल सैंटनर ने जिस तरह से भारतीय बल्लेबाजी को छकाया, फंसाया और पस्त किया वह अपने आप में एक कहानी है. एक सेशन से थोड़ा ज्यादा वक्त लगा भारतीय टीम को 9 विकेट गंवाने में.
न्यूजीलैंड श्रीलंका में टेस्ट सीरीज हारकर आई थी. दो मैचों की सीरीज में उसने एक भी मैच नहीं जीता. स्पिनर्स के खिलाफ उसकी टीम साफ तौर पर घुटने टेकती दिखी थी. लेकिन लंकाई बल्लेबाजों ने बेहतर खेल दिखाया. और न्यूजीलैंड को सीरीज में हार मिली. लेकिन भारत में तस्वीर पलट गई. बेंगलुरु में पहले टेस्ट में कीवी टीम ने तेज गेंदबाजी से भारतीय टीम को शिकस्त दी. इसका जवाब देने के लिए पुणे में स्पिनर्स के लिए मुफीद पिच तैयार की गई. उम्मीद थी कि भारतीय टीम को यहां फायदा होगा. गेंदबाजों- वॉशिंगटन सुंदर और रविचंद्रन अश्विन- ने न्यूजीलैंड के 10 के 10 विकेट आपस में बांटकर भारतीय खेमे में एक उम्मीद जगाई. न्यूजीलैंड सिर्फ 259 रन पर सिमट गया.
अब दारोमदार बल्लेबाजों पर था. और इसकी शुरुआत ही अच्छी नहीं रही. पहले ही दिन रोहित शर्मा खाता खोले बिना आउट हो गए. भारतीय कप्तान को टिम साउदी ने अपना शिकार बनाया. और दूसरे दिन जब यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल क्रीज पर उतरे तो इस युवा, आकर्षक और आक्रामक जोड़ी से बहुत उम्मीदें थीं. पहले ही ओवर में सैंटनर की गेंद पर गिल के खिलाफ जोरदार अपील हुई. पॉल राइफल, जो मैदानी अंपायर थे, ने फैसला बल्लेबाज के पक्ष में दिया. लेकिन न्यूजीलैंड को ज्यादा वक्त नहीं लगा और भारत शिकंजे में फंसता चला गया. गिल आखिर सैंटनर की गेंद पर ही LBW हो गए. और फिर क्रीज पर उतरे विराट कोहली.
विराट से हर बार की तरह उम्मीदें बेशुमार थीं. लेकिन हाल में कई बार विराट उन उम्मीदों की कसौट पर खरे नहीं उतर पाए हैं. और 25 अक्टूबर की तारीख और पुणे के मैदान पर भी कुछ ऐसा ही हुआ. कोहली सिर्फ एक रन बनाकर चलते बने. वह बोल्ड हुए. और वह भी एक लगभग फुलटॉस गेंद पर. कोहली जैसे ब्ललेबाज ऐसी गेंदों पर आउट नहीं होते हैं. लेकिन जब आप खराब फॉर्म में होते हैं, तो कुछ भी हो सकता है.
साल 2020 से यह 9वां मौका था जब कोहली बाएं हाथ के स्पिनर के शिकार बने. सैंटनर ने ही कोहली को चलता किया और भारत की मैच पर पकड़ बनाने की कोशिश भी इसके साथ ही विदा हो गई. सैंटनर ने कुल सात विकेट लिए. यह उनके करियर का पहला पारी में पांच विकेट लेने का कारनामा है. 53 रन देकर उन्होंने ये शिकार किए. कुल मिलाकर न्यूजीलैंड के किसी भी स्पिनर का भारत में दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन. इससे पहले सिर्फ एजाज पटेल का नाम आता है. उन्होंने तो पारी में 10 विकेट लिए थे.
एशिया में स्पिनर्स के खिलाफ कोहली साल 2021 से 21 बार आउट हुए हैं. औसत 28 से थोड़ा सा ज्यादा. यह वह कोहली नहीं जिन्हें किंग कहा जाता था. अब ऐसा लगता है कि किंग का सिंहासन कहीं-न-कहीं डगमगा रहा है. और वह भी स्पिनर्स के खिलाफ. परंपरागत रूप से स्पिनर्स के खिलाफ बेहतर माने जाने वाले भारतीय बल्लेबाज अब कई बार स्पिनर्स के शिकार हो रहे हैं. अपने ही घर पर अपने ही बुने जाल में शिकारी खुद फंस रहा है.
अनिल कुंबले जैसे महान स्पिनर भी भारतीय बल्लेबाजी की इस खामी पर खफा दिखे. कुंबले ने लंच ब्रेक के दौरान माना कि भारतीय बल्लेबाज लेंथ पर चकमा खा रहे हैं. वे गेंदों को समझ नहीं पाए कि आखिर उन्हें खेलना कैसे है. इस तरह की पिचों पर ऐसी गेंदबाज को बैकफुट पर जाकर खेलना आत्मघाती है और यही बात कुंबले कहते रहे. साइमन डूल न्यूजीलैंड के पूर्व पेसर रहे हैं. आजकल अंग्रेजी में कॉमेंट्री करते हैं. उन्होंने टीम इंडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब यह वह टीम नहीं जो स्पिनर्स को दूसरी टीमों से बेहतर खेलती थी. अब घूमती पिचों पर भारतीय बल्लेबाज भी किसी अन्य टीम के बल्लेबाजों की तरह हैं. बात सच भी नजर आती है. स्पिनर्स के खिलाफ जिस तरह मैच के दूसरे दिन ही भारतीय टीम 156 पर सिमट गई उससे पता चलता है कि कहीं-न-कहीं, कुछ-न-कुछ तो गड़बड़ है.
साल 2017 के फरवरी में पुणे में भारत के सामने ऑस्ट्रेलिया था. और कंगारू टीम को रोकने के लिए स्पिनर्स के लिए मददगार पिच बनाई गई थी. लेकिन यह दांव उलटा पड़ गया था. ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 260 रन बनाकर भारत को 105 पर समेट दिया था. इस 105 में से 64 केएल राहुल के थे. दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया ने 285 रन बनाए और भारत 107 पर सिमट गया. नतीजा ऑस्ट्रेलिया ने मैच 333 रन से जीता.
अब इस मैच की पहली पारी में भी भारत सस्ते में आउट हुआ है. और जो इस पिच का मिजाज लग रहा है उसके हिसाब से यहां चौथी पारी में 200 रन भी हासिल करना बहुत कठिन होगा. यानी न्यूजीलैंड अब सीरीज जीतने के काफी करीब है. भारत घरेलू मैदानों पर लगातार 18 टेस्ट सीरीज जीत चुका है. और अगर इस रिकॉर्ड को कायम रखना है तो भारत के बल्लेबाजों को दूसरी पारी में अपना खून-पसीना लगाकर बैटिंग करनी होगी. विकेट पर वक्त बिताना होगा. और ड्रेसिंग रूम में बैठकर वाकई सोचना होगा कि गलती कहां हुई और उसे कैसे जल्दी-से-जल्दी सुधारा जा सकता है. और गेंदबाजों को… गेंदबाजों को वही करना होगा जो न्यूजीलैंड ने किया. जल्दी से जल्दी विकेट लेना. और फिर रोहित, विराट, जायसवाल, गिल और सरफराज जैसे बल्लेबाजों पर होगा कि वे शिकार न हों, शिकारी ही बने रहें.