भारतीय टीम का इरादा मोहाली वनडे को जीतकर सीरीज में बढ़त बनाने का होगा ©Getty Images
भारतीय टीम का इरादा मोहाली वनडे को जीतकर सीरीज में बढ़त बनाने का होगा ©Getty Images

भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की वनडे सीरीज का तीसरा मैच रविवार को पंजाब में खेला जाएगा। दोनों टीमें सीरीज में 1-1 की बराबरी पर हैं ऐसे में दोनों का ही इरादा तीसरे मैच को जीतकर सीरीज में बढ़त बनाने का होगा। दूसरे वनडे में न्यूजीलैंड ने भारत को रोमांचक मुकाबले में छह रन से हरा दिया था, दिल्ली में खेले गए उस मुकाबले में भारत की कई कमजोरियां उभर के सामने आईं थीं।

अगर भारत को सीरीज जीतनी है और रैंकिंग में तीसरे नंबर पर आना है तो इस खामियों को दूर करना होगा। भारत की कौन सी हैं वो चार खामियां, तो आइए जानने की कोशिश करते हैं उन खामियों के बारे में। ये भी पढ़ें: तीसरे वनडे में ये खिलाड़ी पार लगाएगा महेंद्र सिंह धोनी की नैय्या!

4. मध्यक्रम का लड़खड़ाना:

भारत के लिए नंबर 4, 5 और 6 पर खेल रहे बल्लेबाजों का बल्ला खामोस रहना एक चिंता का विषय है। मध्यक्रम टीम की रीढ़ की हड्डी के समान होती है और टीम का मध्यक्रम जितना मजबूत होता है टीम के लिए उतना ही अच्छा होता है। लेकिन भारतीय टीम के लिए नंबर चार पर बल्लेबाजी कर रहे मनीष पांडे ने दोनों मैचों में बेहद निराशाजनक प्रदर्शन किया है और भारत को हर बार निराश किया। पांडे दोनों मैचों में खराब खेले। पहले मैच में पांडे ने केवल 17 रन बनाए तो दूसरे मैच में वह सिर्फ 19 रन ही बना सके।

वहीं नंबर पांच पर बल्लेबाजी करने वाले कप्तान धोनी की बात करें तो धोनी बल्लेबाजी में खुद को ऊपर लेकर आए हैं और नंबर पांच पर बल्लेबाजी की। लेकिन दोनों ही मैचों में धोनी बुरी तरह फ्लॉप रहे और दोनों ही मैचों में भारत को अपने प्रदर्शन से निराश किया। पहले मैच में धोनी ने जहां 21 रन बनाए तो दूसरे मैच में धोनी ने बेहद धीमी बल्लेबाजी करते हुए 65 गेंदों में 39 रन बनाकर उस समय आउट हो गए जब टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी।

केदार जाधव की बात करें तो पहले मैच में जाधव नाबाद रहे थे और दूसरे मैच में भी वह अच्छी लय में दिख रहे थे लेकिन दूसरे मैच में जाधव जिस तरीके से आउट हुए उससे हर कोई उनसे खफा ही दिखा। हालांकि जाधव ने पहले मैच में नाबाद 10 और दूसरे मैच में 37 गेंदों में 41 रन बनाए थे और अच्छा लय में दिख रहे थे लेकिन वह ऑफ स्टेंप के बाहर जाती गेंद से छेड़खानी करने के चक्कर में आउट हो गए थे। ऐसे में जाधव को और परिपक्वता दिखाने की जरूरत है और अपने विकेट की अहमियत को उन्हें पहचानना होगा।

3. फिनिशर की कमी:

भारत को इस समय एक फिनिशर की सख्त जरूरत है। सुरेश रैना के वायरल बुखार से पीड़ित होने की वजह से फिनिशर के लिए जूझ रही टीम इंडिया को इसकी कमी दूसरे वनडे में देखने को मिली। जब टीम को अंतिम ओलर में एक फिनिशर की जरूरत महसूस हो रही थी। पंड्या पर टीम को काफी भरोसा था लेकिन अपना दूसरा वनडे खेल रहे पंड्या फिनिशर के रोल में सफल नहीं हो पाए और दबाव में अपना विकेट फेंककर चले गए थे।

फिनिशर का रोल अंतिम ओवर में विकेट बचाना और तेज गति से रन बनाने का होता है, इस क्रम में अक्सर धोनी आते थे, लेकिन धोनी ने दोनों मैचों में बल्लेबाजी में ऊपर आए और ऐसे में फिनिशर की भूमिका पंड्या पर आ गई, लेकिन पंड्या उस भूमिका में उतने परिपकिव नजर नहीं आए और भारत को एक फिनिशर की कमी खूब खली, जिसका नतीजा भारत को हार के रूप में मिला।

2. विराट कोहली पर टीम की अतिआत्मनिर्भरता:

वैसे तो विराट कोहली टीम के सबसे ज्यादा भरोसेमंद और काबिल खिलाड़ी हैं। कोहली टीम के स्तंभ हैं, कोहली अक्सर हर मैच में अच्छा खेल दिखाते हैं और भारत को जीत दिलाते हैं। विराट कोहली ने भारत को कई मुकाबलों में अपने दम पर जीत दिलाई है। ऐसे में टीम का उनपर भरोसा करना ठीक है, लेकिन अगर ये भरोसा अलग किछ ज्यादा हो जाए तो ऐसे में ये दोनों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

हाल में देखा गया है कि टीम इंडिया विराट कोहली पर कुछ ज्यादा ही निर्भर रहने लगी है, कोहली जिस मैच में चलते हैं वह टीम आसानी से जीत जाती है और जिसमें वह नहीं चलते हैं तो टीम वह मुकाबला हार जाती है। भारत को इससे बाहर निकलना होगा और टीम के हर खिलाड़ी को अपनी भूमिका निभानी होगी।

न्यूजीलैंड के खिलाफ कोहली ने 85 रनों की नाबाद पारी खेली थी और टीम आसानी से वह मैच जीत गई थी, लेकिन दूसरे मैच में कोहली का बल्ला खामोश रहा और टीम हार गई। यह कोई पहला मौका नहीं है जब कोहली के सस्ते में आउट होने से टीम को कोई मैच गंवाना पड़ा हो, खेल प्रेमियों को कई मौकों पर ऐसा देखने को मिला है।

समय आ गया कि टीम को कोहली पर इतना आत्मनिर्भर नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे कोहली पर भी दबाव बढ़ेगा और उनका अपना प्रदर्शन भी खराब हो सकता है। टीम के हर खिलाड़ी को अच्छा खेल दिखाने की आवश्यकता है जिससे टीम एक इकाई के रूप में अच्छा कर सके।

1. सलामी जोड़ी का लगातार खराब करना:

सीरीज से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि भारत की तरफ से सलामी जोड़ी का दारोमदार कौन संभालेगा, एक तरफ रोहित शर्मा की जगह तो पक्की थी, लेकिन दूसरी तरफ रोहित के साथी के लिए रहाणे, मनीष पांडे में मुकाबला था। काफी जद्दोजहद के बाद रहाणे को रोहित के साथ ओपन करवाया गया, लेकिन टीम को इससे ज्यादा फायदा नहीं हुआ और दोनों ही मैचों में रोहित शर्मा जल्दी आउट होकर पवेलियन लौट गए और भारत को अच्छी शुरुआत से एक बार फिर महरूम रहना पड़ा।

पहले वनडे में जहां भारत का पहला विकेट 49 रन पर गिरा तो दूसरे वनडे में ये आंकड़ा और नीचे गिर गया और भारत का पहला विकेट मात्र 21 के कुल योग पर गिर गया। हालांकि दोनों बार आउट होने वाले पहले सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा ही रहे। लेकिन अजिंक्य रहाणे ने भी अपने बल्ले से अब तक कमाल नहीं दिखाया है। अगर तीसरे वनडे में भारत को जीत दर्ज करनी है तो भारत की सलामी जोड़ी को अच्छी शुरुआत दिलानी होगी।