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तीसरे वनडे में भारतीय टीम की हार के पांच कारण

ग्लेन मैक्सवेल ने भारतीय टीम के हाथों से जीत छीन ली

user-circle cricketcountry.com Written by Devbrat Bajpai
Last Updated on - January 17, 2016 6:58 PM IST

भारतीय टीम © Getty Images.
भारतीय टीम © Getty Images.

ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर से भारत के द्वारा खड़े किए गए बड़े स्कोर को बौना साबित हुए तीसरे एकदिवसीय मैच को बड़ी आसानी से तीन विकेट से जीत लिया। ऑस्ट्रेलिया ने इस तरह पांच मैचों की वनडे सीरीज में 3-0 से बढ़त ले ली है। सीरीज में यह तीसरी दफा देखने को मिला जब ऑस्ट्रेलिया ने भारत के गेंदबाजों को करारा जवाब दिया। भारतीय टीम ने इस मैच में दो परिवर्तन भी किए थे। लेकिन ये दोनों परिवर्तन भी कोई असर नहीं दिखा पाए। मैच में भारत की हार के कई अन्य कारण हैं। तो आइए जानते हैं क्या हैं मैच में भारत की हार के पांच कारण।

1. तेज गेंदबाजों का फ्लॉप शो: भारत के तेज गेंदबाज एक बार फिर से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के आगे आंख चुराते नजर आए। भारत के स्ट्राइकर गेंदबाज बरिंदर स्रान बेहद खर्चीले साबित हुए और 8 ओवरों में 63 रन लुटा दिए। यही हाल अपना पहला मैच खेल रहे रिषी धवन का भी रहा। रिषी ने 6 ओवरों में 33 रन दिए और वह शुरू से अंत तक बिल्कुल भी प्रभाव नहीं छोड़ पाए। वहीं आर. अश्विन की जगह टीम में शामिल किए गुरकीरत सिंह भी अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहे। भारत की ओर से रविंद्र जडेजा ही कुछ देर के लिए ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को तंग कर पाए। लेकिन कहते हैं ना कि क्या अकेला चना कभी भाड़ फोड़ता है? ऐसा ही कुछ जडेजा के साथ भी हुआ और वह भारतीय टीम को जीत की ओर नहीं मोड़ पाए। इस पिच में स्पिन था, अगर जडेजा के साथ अश्विन इस मैच में गेंदबाजी करते तो बात बन सकती थी। वहीं उमेश यादव एक बार फिर से रनों का बहाव रोकने में असफल रहे और डेथ ओवरों में बेहद खरीचे साबित हुए। उन्होंने दो विकेट निकाले जरूर, लेकिन वह कुछ खास नहीं कर सके।

2. धवन की धीमी पारी: रोहित शर्मा के आउट होने के बाद शिखर धवन ने मोर्चा संभाला और कोहली के साथ शतकीय साझेदारी निभाई। लेकिन वह इस मैच में अपने चिरपरिचित अंदाज में बल्लेबाजी करते नहीं दिखे। बल्कि उन्होंने काफी धीमी बल्लेबाजी की। धवन ने 91 गेंदों में 68 रन बनाए। अगर वह 10 से 15 गेंदें कम खेलते तो बात बन सकती थी और भारतीय टीम 300 के ऊपर रन बना सकती थी। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया को कड़ी चुनौती दी जा सकती थी।

3. बिखरा निचला मध्यक्रम: निचले मध्यक्रम में धोनी के अलावा कोई अन्य भारतीय बल्लेबाज कमाल नहीं दिखा पाया। अपना पहला मैच खेल रहे गुरकीरत भी कुछ खास नहीं कर और 8 गेंदों में सात रन बनाकर चलते बने। साथ ही रिषी धवन जो अपना पहला मैच खेल रहे थे वह भी अंतिम ओवर में हिट लगाने में नाकाम रहे और 5 गेंदों में मात्र 3 रन बना सके। फॉकनर ने जिस चतुराई से अंतिम ओवर फेंका उनकी तारीफ की जानी चाहिए। अंतिम ओवर में मात्र 6 रन बने। अगर जडेजा और रिषी अंतिम ओवर में 10 रन और बना देते तो कहानी कुछ और हो सकती थी।

4. मैक्सवेल को ना आउट कर पाना पड़ा भारी: भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया के एक समय में 167 रनों पर चार विकेट गिरा दिए थे और ऐसा मालूम पड़ रहा था कि अब ऑस्ट्रेलिया अब गई तब गई। ऐसे समय में मैक्सवेल एक छोर पर खूंटा गाड़कर डट गए। भारतीय गेंदबाज मैक्सवेल का तोड़ नहीं निकाल पाए और देर सवेर उन्होंने अपनी टीम को जीत के दरवाजे पर लाकर खड़ा कर दिया। अगर भारतीय गेंदबाज मैक्सवेल को शुरुआती ओवरों में निपटा देते तो कहानी कुछ और हो सकती थी।

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5. खराब फील्डिंग: भारतीय टीम की खराब फील्डिंग का शो यहां भी जारी रहा और भारतीयों की खराब फील्डिंग की वजह से ऑस्ट्रेलिया टीम को अतिरिक्त लाभ मिला। मैच के बाद हुई प्रेस वार्ता में खराब फील्डिंग का जिक्र करते हुए खुद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा कि तीन चौके बचाए जा सकते थे, लेकिन खराब फील्डिंग की वजह से ऑस्ट्रेलिया को उनका लाभ मिला और हमारे हिस्से में हार आई।