भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरा टेस्ट रांची में खेला जाएगा © Getty Images
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरा टेस्ट रांची में खेला जाएगा © Getty Images

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जा रही चार मैचों की टेस्ट सीरीज 1-1 की बराबरी पर है। ऐसे में सीरीज का तीसरे मुकाबले के काफी रोमांचक होने की पूरी उम्मीद है। पहला मैच जहां ऑस्ट्रेलिया ने 333 रनों से अपने नाम किया था, तो वहीं दूसरे मैच में भारत ने जबरदस्त वापसी करते हुए ऑस्ट्रेलिया को 75 रनों से मात देकर सीरीज को बराबरी पर ला दिया। दूसरे टेस्ट जीतने के बाद कप्तान विराट कोहली और अन्य भारतीय खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया देखने के बाद लगा कि मानो टीम ने सीरीज ही अपने नाम कर ली हो। इसमें कोई दोराए नहीं है कि पहले मैच को हारने के बाद दूसरे मुकाबले में जबरदस्त वापसी करते हुए जीत दर्ज करने के बाद जश्न मनाना तो बनता है। लेकिन भारतीय टीम को देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि वह जश्न मना रही है, बल्कि उन्हें देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वे इस जीत से अतिउत्साहित हैं। जो कि आने वाले मैचों में टीम इंडिया के लिए नकारात्मक भी सिद्ध हो सकता है।

सबसे पहले हम दूसरे टेस्ट मैच की ही बात कर लेते हैं जिसमें भारत ने जीत दर्ज कर सीरीज में वापसी की। इस टेस्ट में भले ही टीम इंडिया को जीत मिली हो, लेकिन मैच के चौथे दिन तक भारत पिछले कदमों पर ही था। पहली पारी में के एल राहुल (90) को छोड़ कोई भी बल्लेबाज 30 के आंकड़े को भी नहीं छू सका। राहुल की पारी के बाद दूसरा सर्वोच्च स्कोर करुण नायर ने (26) बनाए। पांच खिलाड़ी दहाई के आंकड़े को भी नहीं छू सके। इस दौरान दुनिया का सबसे बेहतरीन बल्लेबाजी क्रम ढहता चला गया। पुजारा (17), कोहली (12), रहाणे (17) रन ही बना सके। स्पिन को खेलने में माहिर भारतीय बल्लेबाज स्पिन गेंदबाज नाथन लॉयन के सामने आत्मसमर्पण करते नजर आए और लगातार आउट होते चले गए। जिस पिच पर भारतीय बल्लेबाज रनों के लिए तरसते नजर आए, उसी पिच पर ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 276 रन बना डाले। टीम के दो बल्लेबाजों ने अर्धशतक भी जड़े। ये भी पढ़ें: रविचंद्रन अश्विन के खिलाफ शॉट खेलना जारी रखूंगा: डेविड वार्नर

लॉयन जैसे गेंदबाज ने ऑस्ट्रेलिया की तरफ से (8) विकेट झटके। तो वहीं भारत के अव्वल स्पिन गेंदबाज अश्विन को सिर्फ (2) ही विकेट हासिल हुए। वहीं अगर भारतीय टीम की दूसरी पारी की बात करें तो अगर पुजारा और रहाणे के बीच हुई (118) रनों की साझेदारी को छोड़ दिया जाए। तो अन्य किसी के भी बीच अच्छी साझेदारी नहीं हो सकी। हालांकि इस पारी में भारत के 3 खिलाड़ियों ने अर्धशतक जड़े। लेकिन रहाणे को अपनी पारी के दौरान एक बार भी सहजता के साथ बल्लेबाजी करते नहीं देखा गया। अंत में भारत ने भले ही मुकाबले को जीत लिया हो, लेकिन ये जीत प्रदर्शन से मिली हुई कम, बल्कि किस्मती ज्यादा लगती है।

अब बात करते हैं पहले मुकाबले की, पहले मुकाबले में तो ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 333 रनों के विशाल अंतर से हरा ही दिया था। उस मैच में भारत दोनों पारियों में (105, 107) रन ही बना सका था। साफ है दूसरे मैच में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 333 रनों के मुकाबले सिर्फ 75 रनों से ही हराया। इसके बाद भी भारतीय टीम के जश्न को देखकर हैरानी होना स्वाभाविक है। अब हम अब तक के टेस्ट में दोनों टीमों के खिलाड़ियों के आंकड़ों पर नजर डाल लेते हैं। भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज के एल राहुल ने दोनों टेस्टों को मिलाकर (215) रन बनाए हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज और भारत दौरे पर पहली बार आए मेट रेन्शॉ की बात करें तो उन्होंने (164) रन बनाए हैं। भले ही रन्शॉ राहुल से रनों के मामले में पीछे हों। लेकिन पहले टेस्ट की पहली पारी में वह बीच मैच में बीमार हो गए थे और जिसके कारण उन्हें रिटायर इल भी होना पड़ा था। दोनों टीमों के कप्तानों की बात करें तो विराट कोहली ने अब तक दोनों मैचों में मिलाकर सिर्फ (40) रन ही बनाए हैं। वहीं स्टीवन स्मिथ ने इस दौरान (172) रन बनाए हैं। जिसमें एक शतक भी शामिल है। साफ है स्मिथ के आस पास भी कोहली फटक नहीं रहे हैं। भारतीय सरजमीं पर भारतीय बल्लेबाज ही शतक नहीं लगा पा रहे हैं और ऑस्ट्रेलिया के कप्तान स्मिथ ने ऐसा पहले टेस्ट की दूसरी पारी में ही कर दिखाया। [ये भी पढ़ें: पुणे में लिया गया कैच बेंगलुरू से अधिक कठिन था: साहा]

दोनों टीमों के स्पिन गेंदबाजों की बात करें तो, कीफे ने (15) और नाथन लॉयन ने (13) विकेट झटके हैं। वहीं अश्विन ने (15) और जडेजा ने (12) विकेट प्राप्त किए हैं। साफ है यहां भी ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों से भारतीय स्पिनर्स आगे नहीं हैं। बल्कि जेडजा तो लायन से भी पीछे हैं। वहीं सीरीज की चार पारियों में ऑस्ट्रेलिया ने 3 बार 250 से ज्यादा स्कोर बनाया है। भारत ने अब तक इस सीरीज में केवल एक मौके पर ही 250 से ज्यादा का स्कोर किया है। इस सारे ही आंकड़ों से साफ जाहिर है कि भले ही दूसरे मैच में भारत को जीत मिली हो, लेकिन अब तक प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया का ही अच्छा रहा है। ऐसे में भारत के अतिउत्साहित होने की कोई वजह नहीं दिखती। भारतीय खिलाड़ियों को ये समझना होगा कि अभी उन्होंने सिर्फ एक मैच ही जीता है ना कि उन्होंने सीरीज जीत ली है। जरूरी है कि भारतीय खिलाड़ी अपनी भावनाओं पर काबू रखें और मैदान पर अपना प्रदर्शन सुधारने पर ध्यान दें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हो सकता है कि भारतीय टीम जश्न ही मनाती रह जाए और ऑस्ट्रेलिया सीरीज जीत जाए।