माही की मनमानी, धीमी बल्लेबाजी करके भी जीत लिया ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले जिस महेंद्र सिंह धोनी के चयन पर सवाल खड़े किए जा रहे थे उनको सीरीज का सबसे बेहतरीन खिलाड़ी चुना गया।
Published On Jan 18, 2019, 07:45 PM IST
Last UpdatedJan 18, 2019, 07:45 PM IST
MS Dhoni
महेंद्र सिंह धोनी एक ऐसा नाम है जो क्रिकेट की दुनिया का वो सितारा है जिसकी चमक कभी फीकी नहीं हो सकती। धोनी की आलोचना हो या बड़ाई वो तवज्जो नहीं देते। मही को जो टीम के हित में सही लगता है, जैसा उनके मन में आता है वही करते हैं। लगातार आलोचना के बावजूद धोनी ने आक्रामक पारी नहीं खेली लेकिन पूरा ऑस्ट्रेलिया धोनी…धोनी के नाम की माला जपने पर मजबूर हो गया।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले जिस महेंद्र सिंह धोनी के चयन पर सवाल खड़े किए जा रहे थे उनको सीरीज का सबसे बेहतरीन खिलाड़ी चुना गया। जी हां, धोनी को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया। उन्होंने कोई विस्फोटक पारी नहीं खेली बल्कि मैदान पर वक्त बिताया और टीम को जीत दिलाकर वापस लौटे।
सिडनी में हुई धोनी की आलोचना
सीरीज के पहले मुकाबले में महेंद्र सिंह धोनी ने 96 गेंद पर 51 रन की पारी खेली। भारतीय टीम मैच हार गई और धोनी के धीमी पारी की हर तरफ आलोचना की गई। अर्धशतक पूरा करने के लिए धोनी ने 93 गेंद खेले और सिर्फ एक छक्का लगाया। हार का ठीकरा उनकी धीमी पारी पर फूटा सही भी था लेकिन ध्यान रखना जरूरी है, आउट दिए जाने पर भी सवाल उठा था।
एडिलेड में भी खेली वैसी पारी
धीमी पारी की आलोचना के बाद भी धोनी ने खेलने के अंदाज में कोई बदलाव नहीं किया। एडिलेड में भी आराम से बल्लेबाजी की मौके मिले तो चौके लगाए। 53 गेंद पर अर्धशतक बनाया लेकिन आक्रामकता नहीं झलकी। आखिरी ओवर में जोरदार छक्का लगाया और सबको पुराने धोनी के बानगी का एहसास कराया। भारत मैच जीता और धोनी…धोनी के नारे लगने लगे। सबने उनके नाम के कसीदे गढ़े लेकिन मही तो वही थे।
मेलबर्न में भी पुराने ढंग से जमाया रंग
भारतीय टीम मुश्किल घिर चुकी थी क्योंकि टीम का भरोसा कप्तान कोहली का विकेट गिर गया था। धोनी ने यहां भी किसी तरह की बात पर ध्यान दिए बगैर ठुक-ठुक गाड़ी चलाते रहे। 74 गेंद पर अर्धशतक इस बात का प्रमाण है की मही ने आलोचकों की कितनी सुनी। मैच को आखिरी ओवर्स तक पहुंचाया और दो चार अच्छे शॉट लगा टीम की झोली में जीत डाल दी।
तीन लगातार अर्धशतक लगा बने सीरीज के हीरो
धोनी ने तीन मैचो की सीरीज में धीमी लेकिन उपयोगी पारी खेली। तीन अर्धशतक बनाया जिसमें दो बार नॉट आउट मैदान से लौटे। यही वजह थी कि सीरीज के अंत में धोनी के रन बनाने का औसत 193 रहा। मही ना तो पहले ही आलोचकों की सुनते थे और ना ही आत सुनते हैं। वो अपने मन की करते हैं और आलोचकों को खुद आलोचना से बड़ाई तक मोड़ देते हैं।