टीम इंडिया © Getty Images
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भारत ने पहले वनडे में इंग्लैंड को 3 विकेट से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। अब सीरीज का दूसरा मुकाबला 19 जनवरी को खेला जाना है। भले ही टीम इंडिया ने पहला मैच अपने नाम कर लिया हो, लेकिन पहले मैच में टीम इंडिया ने कई गलतियां कीं जो आने वाले मैचों में भारत के लिए भारी पड़ सकतीं हैं। 350 रन लुटाने के बाद विराट कोहली और केदार जाधव ने भारत को जीत तो दिला दी। लेकिन टीम ने कईं गलतियां कीं जो उन्हें सुधारनी होंगी। तो पहले मैच में भारत ने कौन-कौन सी गलतियां कीं आइए जानते हैं।

1. सलामी बल्लेबाजों का फ्लॉप होना: इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में बारतीय सलामी बल्लेबाज बुरी तरह फ्लॉप रहे। रोहित शर्मा चोटिल चल रहे हैं ऐसे में टीम में शिखर धवन और के एल राहुल को बतौर सलामी बल्लेबाज चुना गया। लेकिन दोनों ही बल्लेबाजों ने टीम को निराश करते हुए बड़े स्कोर के सामने घुटने टेक दिए। राहुल और धवन के दोनों के स्कोर को मिला दिया जाए तो दोनों ने 10 रन भी नहीं बनाए। पहले मैच में राहुल ने 8 और धवन ने 1 रन बनाया। जो कि पिछले 12 सालों में सबसे घटिया प्रदर्शन है। इससे पहले साल 2005 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सलामी बल्लेबाजों ने मिलकर मात्र 3 ही जोड़े थे।

वहीं सलामी बल्लेबाजों का लचर प्रदर्शन भारत को पहली बार नहीं झेलना पड़ा है। बल्कि भारत के लिए ये समस्या काफी लंबे समय से चली आ रही है। पिछले साल न्यूजीलैंज के खिलाफ खेली गई वनडे सीरीज में भी भारत को यह परेशानी उठानी पड़ी थी। उस सीरीज के पहले मैच में दोनों सलामी बल्लेबाजों ने 49, दूसरे मैच में 21, तीसरे मैच में 13, चौथे मैच में 19 और फाइनल मैच में 40 रन जोड़े थे। साफ है एक भी मैच में सलामी बल्लेबाजों ने टीम के लिए अर्धशतकीय साझेदारी नहीं की थी। साफ है भारत को काफी लंबे समय से अच्छी शुरुआत से महरूम रहना पड़ा रहा है और अगर आने वाले मैचों में सलामी जोड़ी की चिंता दूर नहीं हुई तो भारत के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकतीं हैं। ये भी पढ़ें: पुणे वनडे में केदार जाधव की पारी विराट कोहली से भी बेहतर: सौरव गांगुली

मध्यक्रम का लड़खड़ाना: ये समस्या भी भारतीय टीम के लिए कोई नई नहीं है और टीम इंडिया इस समस्या से कई सालों से जूझ रही है। लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में भी यह सिलसिला बदस्तूर जारी रहा और सलामी जोड़ी के विफल होने के बाद भारत का मध्यक्रम भी लड़खड़ा गया और टीम संकट में आ गई। मध्यक्रम की बात करें तो यहां महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह फ्लॉप रहे और जल्दी आउट होकर पवेलिय लौट गए। युवराज ने हाल ही में 3 साल बाद टीम इंडिया में वापसी की है और उनसे टीम को काफी उम्मीदें थीं। लेकिन सभी की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए युवराज ने इंग्लैंड के गेंदबाजों के सामने घिटने टेक दिए और भारत को बीच मझधार छोड़ पवेलियन लौट गए। युवराज सिंह ने राष्ट्रीय टीम में वापसी करने से पहले घरेलू सीरीज में शानदार खेल दिखाया था लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में फिर से फ्लॉप साबित हुए।

वहीं कप्तानी से इस्तीफा देकर बतौर खिलाड़ी खेल रहे महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर से विफल रहे और जब टीम को उनसे जरूरत थी वो उस समय आउट होकर पवेलिय लौट गए। ऐसा नहीं कि धोनी पहली बार टीम को ऐसे हालातों में छोड़ कर पवेलियन लौटे हों। धोनी का बल्ला पिछले साल से खामोश है। धोनी ने साल 2016 में सिर्फ एक ही अर्धशतक लगाया था और इस दैरान उन्होंने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 18, 11, 23, 0, 34 रन बनाए तो जिम्बाब्वे दौरे पर उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। इसके बाद कीवी टीम के खिलाफ धोनी ने 21, 39, 80, 11 और 41 रन बनाए। इस दौरान धोनी अपने बल्लेबाजी क्रम को लेकर भी बहुत भ्रमित रहे। कभी फिनिशर की भूमिका निभाने वाले धोनी चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए इच्छुक नजर आने लगे और कहा कि अब वह इसी नंबर पर खेलते नजर आएंगे। लेकिन धोनी ने मध्यक्रम में भारत के लिए हाल-फिलहाल कुछ खास नहीं किया है। साफ है मध्यक्रम भी भारत के लिए एक कमजोर कड़ी साबित हो रही है।

विराट कोहली पर अति आत्मनिर्भरता: पिछले कुछ सालों से देखा गया है कि टीम इंडिया विराट कोहली पर कुछ ज्यादा ही निर्भर रहने लगी है। कोहली पर टीम इस कदर निर्भर रहने लगी है कि जब-जब उनका बल्ला चलता है तभी टीम को जीत मिलती है। कोहली भारत के लिए जीत की गारंटी तो बन गए लेकिन भारतीय टीम उनपर कुछ ज्यादा ही निर्भर हो गई। न्यूजीलैंड दौरे पर जब-जब कोहली का बल्ला चल तब-तब टीम इंडिया को जीत मिली। कीवी टीम के खिलाफ कोहली ने जीते हुए मैचों में नाबाद 85, नाबाद 154 और 65 रनों की पारी खेली थी।

वहीं हारे हुए मैचों में कोहली ने 9 और 45 रनों का स्कोर किया था। साफ है है जिन मैचों में कोहली का बल्ला चल निकलता है उनमें भारत को जीत मिल जाती है लेकिन जिनमें कोहली खामोश रहते हैं उनमें भारत को हार झेलनी पड़ती है। भारतीय टीम ने साल 2016 में कुल 13 वनडे मैच खेले जिनमें कोहली ने 10 मैचों में भाग लिया। इस दौरान भारत ने जिन 4 मैचों में भारत ने जीत दर्ज की उन सभी मुकाबलों में कोहली ने जमकर हल्ला बोला। वहीं इंग्लैंड के खिलाफ भी अगर कोहली का बल्ला नहीं चलता तो हो सकता था कि भारत को हार का सामना करना पड़ जाता।

गेंदबाजों का रन लुटाना: वैसे तो भारतीय टीम की गेंदबाजी हमेशा ही चिंता का विषय रही है लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ तो गेंदबाजों ने जमकर रन लुटाए। कोई भी गेंदबाज अंग्रेजों पर दबाव नहीं बना सका और लगा कि गेंदबाज सिर्फ औपचारिकता ही निभा रहे हैं। ना उमेश यादव की तेजी काम आई तो ना ही जसप्रीत बुमराह की यॉर्कर। तो हार्दिक पांड्या भी अपना प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे। वहीं टेस्ट में हिट जोड़ी रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा ने भी जमकर रन लुटाए। अश्विन को तो कप्तान ने उनके कोटे के पूरे ओवर भी नहीं करने दिए। इंग्लैंड के हर बल्लेबाज ने भारतीय टीम के गेंदबाजों के खिलाफ जमकर रन बनाए और उन्हें विकेटों के लिए तरसाए रखा।  ये भी पढ़ें: लक्ष्य का सफल पीछा करते हुए सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बने विराट कोहली

गेंदबाजों के आंकड़ों की बात करें तो उमेश यादव ने 7 ओवरों में 63 रन खर्च कर डाले और सिर्फ एक ही विकेट लिया। वहीं दूसरे तेज गेंदबाज जसप्रीज बुमराह ने 10 ओवरों में 79 रन खर्च करते हुए 2 विकेट लिए तो पांड्या कुछ किफायती रहे और उन्होंने 9 ओवर की गेंदबाजी में 46 रन देकर 2 विकेट झटके। वहीं कप्तान कोहली ने इस दौरान 4 स्पिनर्स का भी उपयोग किया। अश्विन ने 8 ओवरों की गेंदबाजी में 63 रन देते हुए कोई भी विकेट नहीं लिए, तो रवींद्र जडेजा ने 10 ओवर की गेंदबाजी में 50 रन देकर 1 विकेट लिया। वहीं युवराज ने भी 2 ओवर की गेंदबाजी की और 14 रन देते हुए कोई विकेट नहीं लिया तो केदार जाधव ने 4 ओवर में 23 रन दिए और कोई विकेट नहीं लिया।

साफ है इन कमजोरियों को भारतीय टीम को जल्द से जल्द दूर करना होगा तभी जाकर भारत आने वाले मैचों में अच्छा खेल सकेगा। आने वाले समय में भारतीय टीम को चैंपियंस ट्रॉफी जैसा बड़ा टूर्नामेंट केलना है और भारत की यह कमजोरी बदस्तूर बनी रही तो टीम इंडिया को परेशानी उठानी पड़ सकती है।