भारतीय टीम ने बमुश्किल पहले टेस्ट को ड्रॉ कराने में कामयाबी पाई © AFP
भारतीय टीम ने बमुश्किल पहले टेस्ट को ड्रॉ कराने में कामयाबी पाई © AFP

भारत और इंग्लैंड के बीच खेला गया पहला टेस्ट मैच ड्रॉ हो गया है। पहले टेस्ट में मेहमान इंग्लैंड जहां भारतीय टीम पर हावी नजर आई तो भारतीय टीम अपनी ही सरजमीं पर बैकफुट पर रहे। इंग्लैंड ने जहां दोनों पारियों में भारत से कहीं ज्यादा अच्छे खेल का परिचय दिया तो भारत ने पहली पारी में बेहतरीन खेल दिखाया लेकिन दूसरी पारी में टीम पर एक समय हार का खतरा मंडराने लगा था। इंग्लैंड ने पहली पारी में 537 और दूसरी पारी में 260/3 रन बनाए। वहीं भारत ने अपनी पहली पारी में 488 और दूसरी पारी में 172/6 रन बनाए। भारत के प्रदर्शन से कहीं भी नहीं लगा कि वह इंग्लैंड टीम को टक्कर दे पाए। बल्कि एक समय तो इंग्लैंड ही भारत पर हावी नजर आया और भारत को मैच बचाने के लाले पड़ गए। अगर हम दूसरे नजरिए से देखें तो भारत के लिए ये ड्रॉ नहीं बल्ंकि हार है। आखिर क्यों कह रहे हैं हम ऐसे?, आइए जानते हैं।

अपनी मेजबानी में खेलना: भारत इंग्लैंड के खिलाफ अपनी मेजबानी में खेल रहा है। अपनी मेजबानी में खेलते हुए टीम बहुत मजबूती से खेलती है और विपक्षी टीमों पर हावी रहती है। लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ भारत हमेशा बैकफुट पर ही रहा। मैच के पहले ही दिन से इंग्लैंड मजबूत दिखने लगा और भारतीय गेंदबाज विफल साबित होते जा रहे थे। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता जा रहा था भारत के हाथ से मैच निकलता जा रहा था। भारत की गेंदबाजी की विफलता का आलम यह था कि इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने पहली पारी में 3 और दूसरी पारी में 1 शतक लगाया। भारतीय गेंदबाज सिर्फ औपचारिकता पूरी करते नजर आए।  भारत बनाम इंग्लैंड, पहले टेस्ट का स्कोरकार्ड जानने के लिए क्लिक करें…

वहीं बारी जब बल्लेबाजी की आई तो पहली पारी में सिर्फ मुरली विजय, चेतेश्वर पुजारा और आर अश्विन को छोड़ दिया जाए तो कोई और बल्लेबाज नहीं चल सका। पहली पारी में भारत ने 488 रन बनाए थे। जिसमें मुरली विजय ने 126, पुजारा ने 124 और अश्विन ने 70 रन बनाए थे। इसके अलावा अन्य बल्लेबाज सिर्फ क्रीज पर आए रुके और चलते बने। ना गौतम गंभीर कुछ कर सके और ना ही विराट कोहली, ना रहाणे कुछ कर सके और ना ही साहा। वहीं दूसरी पारी की बात करें तो तीसरे-चौथे दिन जब भारतीय स्पिनरों को पिच से मदद मिलने लगी थी और गेंद घूम रही थी, ऐस में भारतीय स्पिन गेंदबाज फिर फ्लॉप रहे। भारतीय स्पिनरों ने मैच में कुल 9 विकेट हासिल किए। साफ है तीन स्पिनरों के साथ मैदान पर उतरी भारतीय टीम ने बेहद ही घटिया प्रदर्शन किया। अश्विन को पूरे मैच में तीन, अमित मिश्रा को भी तीन और जडेजा ने भी पूरे मैच में तीन ही विकेट झटके। दूसरी पारी में बल्लेबाजी की बात करें तो यहां हालात पहली पारी से भी खराब रहे। 310 रनों की चुनौती का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत ही खराब रही और भारत ने शून्य पर ही अपना पहला विकेट खो दिया।

चेतेश्वर पुजारा, मुरली विजय भी दूसरी पारी में भारत को बीच मछधार में छोड़कर चले गए और भारत के सामने मैच बचाने का संकट आन पड़ा। भारत के विकेट गिरने का सिलसिला यहीं नहीं रुका और इसके बाद भारत ने 3 और विकेट धड़ीधड़ खो दिए। वो तो शुक्र है विराट कोहली और जडेजा का जिन्होंने भारत को हारने से बचा लिया और क्रीज पर टिककर बल्लेबाजी की। दूसरी पारी में भारत ने अपने छह विकेट खो दिए थे। साफ है घर के शेर पहले टेस्ट में घर में भी शेर नहीं रहे।

बांग्लादेश दौरे पर इंग्लैंड का निराशाजनक प्रदर्शन: भारत दौरे से पहले इंग्लैंड की टीम बांग्लादेश के दौरे पर थी। बांग्लादेश दौरे पर इंग्लैंड ने दो टेस्ट खेले थे। आपको ये जानकर हैरानी होगी की इंग्लैंड को दूसरे टेस्ट में तो हार मिली ही थी साथ में पहले टेस्ट में भी वो लगभग हारते-हारते ही जीती थी। सब जानते हैं कि अगर पहले मैच में चौथे दिन खेल रुकता नहीं तो वो मैच में बांग्लादेश ही जीतती। लेकिन अफसोस अंपायरों ने खेल को पांचवें दिन ले गए और बांग्लादेश मैच हार गया। लेकिन दूसरे मैच में बांग्लादेश ने इंग्लैंड को हरा ही दिया और श्रंखला 1-1 की बराबरी पर खत्म हुई।

बांग्लादेश दौरे पर इंग्लैंड का प्रदर्शन खराब थी और टीम दबाव में भी थी। ऐसे में अगर भारत ने इंग्लैंड पर थोड़ा सा दबाव बनाया होता तो पहले टेस्ट में नतीजा कुछ और हो सकता था। लेकिन भारत ऐसा करने में विफल रहा और जो टीम बांग्लादेश के खिलाफ संगर्ष करती नजर आई उसने भारत को हार की दहलीज पर पहुंचा दिया। बांग्लादेश से मैच हारने वाली टीम भारत के खिलाफ सशक्त नजर आई और भारत पर हावी होकर खेली।

तो कह सकते हैं कि भारत ने इंग्लैंड को कमतर आंकने की भूल की जिसके कारण भारत को पहला टेस्ट ड्रॉ कराने में सफल रहा या लगभग हार मिलते-मिलते रह गई।