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एलिस्टियर कुक © AFP

साल 2014 में, इंग्लैंड के एक पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने डेली टेलीग्राफ में लिखे अपने एक लेख में उस समय जूझ रहे एलिस्टेयर कुक को टेस्ट में उनकी खराब कप्तानी को लेकर खूब खरी खोटी सुनाई थीं। इस दौरान कुक की कप्तानी में इंग्लैंड ने 9 टेस्ट हारे थे वहीं 26 पारियों में कुक कोई सैकड़ा नहीं जड़ पाए थे। यही समय था जब इंग्लैंड का दौरा करने आई टीम इंडिया पर कुक की टीम ने पहले टेस्ट में जीत दर्ज करते हुए पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में 1-0 से बढ़त बना ली थी। इसके बाद तो जैसे इंग्लैंड ही पूरी सीरीज में हावी दिखी और आखिरकार उन्होंने सीरीज 3-1 के विशाल अंतर से अपने नाम कर ली। इसके पहले साल 2012 में जब इंग्लैंड टीम भारत के दौरे पर आई थी तब भी कुक की कप्तानी पर सवालिया निशान लगाए जा रहे थे। इन दोनों मौकों पर कुक की कप्तानी में इंग्लैंड ने जीत दर्ज की और कप्तानी बरकरार रही। यही बात 31 साल पहले भी घटी थी जब इंग्लैंड की टीम भारतीय दौरे पर आई थी। गौर करने वाली बात है कि 5 टेस्ट मैचों की इस सीरीज का पहला मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ था।

वर्तमान परिदृश्य को देखें तो पिछली दो सीरीजें जो इंग्लैंड ने पाकिस्तान और बांग्लादेश के खिलाफ खेली हैं दोनों में ही उन्हें श्रृंखला में जीत प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में एक बार फिर से कुक की कप्तानी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में कुक एक बार फिर से इंडिया टीम के खिलाफ दो- दो हाथ करने को तैयार हैं। गौर करने वाली बात है कि पिछली दो बार की तरह इस बार भी उनके पास खोने को कुछ नहीं है। लेकिन जिस तरह से उन्होंने राजकोट टेस्ट में अपनी टीम की अगुआई की है उससे एक बात तो साफ हो गई है कि वह अपने आलोचकों को करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। कुक ने जब टॉस जीता तो उन्होंने पहले बल्लेबाजी का निर्णय लेने पर कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई। कुक जब बल्लेबाजी करने के लिए आए तो थोड़ा सहमे से नजर आ रहे थे और ऐसा लग रहा था कि जैसे उनका दिमाग बहुत सारे सवालों और जिम्मेदारियों से भरा हुआ हो। पहली पारी में कुक अपने ओपनिंग पार्टनर हसीब हमीद से भी ज्यादा अनिश्चित नजर आए जो इस मैच के साथ अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज कर रहे थे। इस दौरान उन्हें एक जीवनदान भी मिला। लेकिन वह 21 रन बनाकर चलते बने। [ये भी पढ़ें: अखबार की गलती ने केविन पीटरसन को बना दिया ‘मैच फिक्सर’]

बहरहाल, टीम के मुख्य बल्लेबाज जो रूट, मोईन अली और बेन स्टोक्स ने टीम की कमान को अपने हाथों में लेते हुए स्कोर को पहली पारी में 537 तक पहुंचा दिया और इस तरह दबाव टीम इंडिया पर बन गया। बिना जेम्स एंडरसन के लिए खेल रही इंग्लैंड टीम के कप्तान कुक के लिए भारतीय बल्लेबाजों के सामने गेंदबाजी को परिवर्तित करना किसी पहाड़ खोदने से कम नहीं था। इस बात का कुक ने खास ख्याल रखा और टीम में 6 गेंदबाजों को जगह दी ताकि एंडरसन की कमी न खलने पाए। भारतीय टीम ने जब तीसरे दिन की शुरुआत 63/0 के साथ की तो इंग्लैंड ने दिन की गेंदबाजी की शुरुआत मोईन और ब्रॉड के साथ की। पिच में कुछ दर्रे पड़ गए थे लेकिन इसका कोई फर्क नहीं पड़ा पिच पर।

कुक ने लगातार किए फील्डिंग और गेंदबाजी में बदलाव: मोईन अली को इस दौरान कुछ अजब सी उछाल और टर्न मिली जबकि अदिल राशिद की गुगली ने दूसरे दिन के अंतिम सेशन में गौतम गंभीर को भौंचक्का छोड़ दिया। कुक जानते थे कि वहां कुछ रिवर्स स्विंग मिल सकती है इसलिए उन्होंने ब्रॉड और मोईन के साथ शुरुआत की। यह निर्णय काफी हद तक सही भी साबित हुआ जब ब्रॉड ने अपनी पहली गेंद पर गंभीर को आउट कर दिया। उसके बाद मुरली विजय और चेतेश्वर पुजारा ने कुक की सेना को मेहनत पर लगाया और 209 रनों की भागेदारी निभाई। दोनों ने इस दौरान बड़े सधे हुए स्ट्रोक खेले और गजब का धैर्य दिखाया। गौर करने वाली बात रही कि इस दौरान दोनों ने कोई खराब शॉट नहीं खेला। जब पूरा भारत पुजारा और विजय की बल्लेबाजी को लेकर फूला नहीं समा रहा था तब कुक ने विकेट लेने के लिए सब कुछ किया।

उन्होंने राशिद के पहले जफर अंसारी को गेंदबाजी आक्रमण में लगाया ताकि वह भारतीयों को थोड़ा थमने का मौका दे दें। जब उन्होंने देखा कि पिच पर पर्याप्त मात्रा में पैरों के निशान बन चुके हैं तो वह अपने मुख्य हथियार राशिद को ले आए। वह चाहते थे कि भारतीय एकाएक राशिद पर आक्रमण करें और अपने विकेट गंवाएं। कुक ने पुजारा और विजय को असहज महसूस कराने के लिए लगातार फॉरवर्ड शॉर्ट लेग, लेग स्लिप और कुछ अन्य नजदीकी फील्डर लगाए रखे। कुक जानते थे कि भारतीय सामान्यतः स्पिन को बढ़िया खेलते हैं लेकिन वह उम्मीद कर रहे थे कि ऑड गेंद घुमाव व उछाल लेगी। साथ ही बल्ले का बाहरी किनारा लगेगा या स्ट्रोक मिसटाइम होंगे। अपने तेज गेंदबाजों के लिए कुक ने फील्डर्स शॉर्ट लेग, बैकवर्ड स्क्वेयर, और डीप मिड विकेट पर लगा रखे थे ताकि बल्लेबाज हमेशा दनकता रहे। वहीं जब तेज गेंदबाज गेंदबाजी कर रहे होते थे तो कुक स्लिप लगा देते थे।

कप्तान ने थर्डमेन भी लगा रखा था क्योंकि विजय अक्सर ऑफ स्टंप की बाहर की गेंद को चौका और सिंगल के लिए उस दिशा में मार रहे थे। कुक ने हर चीज के लिए एक सुनियोजित योजना बना रखी थी। कुक ने तब भी हार नहीं मानी जब पुजारा और विजय इंग्लैंड की गेंदबाजी की बखिया उधेड़ रहे थे। कुक ने क्रिस वोक्स और स्टोक्स को गेंद से रिवर्स स्विंग लेने को लेकर उन्हें गेंद थामाई वहीं वह ब्रॉड को बहुत सोच समझकर इस्तेमाल करते नजर आए। वह बाद में ब्रॉड को लेकर आए और विजय व पुजारा के सामने चुनौती पेश की। शायद ही ऐसा कोई मौका देखने को मिला जब कुक ने मैच में गलत निर्णय लिया हो। इस तरह से उन्होंने टीम इंडिया के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। जाहिर है कि कुक के इस चक्रव्यूह ने टीम इंडिया को जल्दी ही निकलना होगा। साथ ही जो कमियां टीम इंडिया की गेंदबाजी में नजर आई हैं उन्हें जल्दी से जल्दी पाटना होगा। वरना साल 2012 की तरह टीम इंडिया को अपनी सरजमीं पर फिर से निराशा झेलनी पड़ सकती है।