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पार्थिव पटेल © Getty Images

इंग्लैंड के खिलाफ अंतिम तीन टेस्ट मैचों के लिए वैसे तो 22 नवंबर को ही टीम की घोषणा कर दी गई थी। लेकिन अगले कुछ घंटों में बीसीसीआई ने सूचना दी कि टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज रिद्धिमान साहा तीसरे टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं होंगे, क्योंकि उनकी जांघ में तनाव है। बहरहाल, टीम इंडिया ने आनन- फानन में साहा का विकल्प भी तलाश लिया। विकल्प के तौर पर पार्थिव पटेल को टीम में शामिल किया गया जो आज से 8 साल पहले टीम इंडिया के लिए अनिल कुंबले की कप्तानी में टेस्ट खेलते नजर आए थे। लेकिन इस बीच सवाल उठता है कि आखिर पटेल को टीम में शामिल क्यों किया गया जबकि उनसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज रणजी और अन्य घरेलू टूर्नामेंट में जौहर दिखा रहे हैं। उसके कुछ कारण हम आपको बताते हैं।

1. नमन ओझा फिट नहीं: साहा को टीम में प्रतिस्थापित करने के लिए अनुभव और प्रदर्शन के आधार पर नमन ओझा का नाम भी उछल रहा है। लेकिन आपको बता दें कि ओझा अपनी फिटनेस से लगातार जूझ रहे हैं। उन्होंने गुजरात के खिलाफ एकमात्र रणजी ट्रॉफी मैच में हिस्सा लिया। ऐसे में चयनकर्ता उन पर दाव खेलते दो ठीक नहीं होता। आपको बता दें कि 33 साल के नमन ओझा ने पिछले साल भारत के लिए एकमात्र मैच खेला था। जिसमें उन्होंने 56 रन बनाए थे और 35 रन उनका सर्वोच्च स्कोर रहा था। इस मैच में उन्होंने 4 कैच और 1 स्टंपिंग की थी।  [ये भी पढ़ें: मोहाली टेस्ट के लिए रिद्दिमान साहा की जगह पार्थिव पटेल टीम में शामिल]

2. रिषभ पंत को क्यों नहीं किया गया शामिल: 19 साल के विकेटकीपर बल्लेबाज रिषभ पंत ने हाल ही में रणजी ट्रॉफी में जबरदस्त बल्लेबाजी का मुजाहिरा पेश किया है। अभी तक उन्होंने 7 रणजी मैचों में 90.70 की भारी भरकम औसत के साथ 907 रन बनाए हैं। ऐसे में कई लोगों का मानना है कि साहा कि जगह पंत को मौका दिया जाना चाहिए था। लेकिन चयनकर्ताओं ने रिषभ को नकार दिया। कारण साफ है कि रिषभ के पास अनुभव बहुत थोड़ा है। ऐसे में बीच सीरीज में उन्हें टीम में चुना जाना ठीक नहीं होता। जाहिर है कि पार्थिव को उनके अनुभव के कारण ही तरजीह दी गई है। इसमें कई शक नहीं है कि पंत एक अच्छे विकेटकीपर बल्लेबाज हैं। अगर वह ऐसा ही प्रदर्शन भविष्य में भी जारी रखते हैं तो जाहिर तौर पर उन्हें टीम इंडिया में मौका मिलेगा।

3. पार्थिव को क्यों मिला मौका: रणजी ट्रॉफी में गुजरात के कप्तान पार्थिव पटेल वर्तमान घरेलू सत्र में जबरदस्त प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अच्छा खासा अनुभव भी है। पार्थिव ने पिछले दिनों नागाठोने में मध्यप्रदेश के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मैच में नाबाद शतक(139*) भी जमाया था। उन्होंने इस मैच की पहली पारी में भी 49 रनों की शानदार पारी खेली थी। वे इसके अलावा रोहतक में रेलवे के खिलाफ दोनों पारियों में अर्द्धशतक और दिल्ली में उत्तरप्रदेश के खिलाफ पहली पारी में अर्द्धशतक जमा चुके हैं। गौर करने वाली बात है कि वर्तमान में विराट कोहली पांच गेंदबाजों की रणनीति के साथ मैदान पर उतर रहे हैं। ऐसे में टीम इंडिया को एक ऐसे विकेटकीपर बल्लेबाज की तलाश है जो विकेटों के पीछे तो अच्छा जौहर दिखाए ही साथ ही बल्ले से भी रनों का पहाड़ लगा सके।

वैसे आपको बता दें कि पार्थिव भारतीय टीम के लिए कोई नया नाम नहीं है। उन्होंने साल 2002 में 17 साल की उम्र में भारतीय टीम की ओर से इंग्लैंड के खिलाफ नॉटिंघम टेस्ट में पदार्पण किया था। पटेल ने टीम इंडिया के लिए अब तक कुल 20 टेस्ट मैच खेले हैं जिनमें उन्होंने 683 रन बनाए हैं। पार्थिव ने अपना अंतिम टेस्ट साल 2008 में श्रीलंका के खिलाफ खेला था। इस टेस्ट में अनिल कुंबले टीम इंडिया के कप्तान थे जो वर्तमान कोच हैं। जाहिर है कि पटेल इस मौके का हर हाल में फायदा उठाना चाहेंगे ताकि उन्हें फिर से मुड़कर न देखना पड़े।