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भारत ने मोहाली टेस्ट आठ विकेट से जीता। © AFP

भारत बनाम इंग्लैंड मोहाली टेस्ट का चौथा दिन अब खत्म हो चुका है भारत ने यह मैच जीत लिया है। भारत की ओर से पार्थिव पटेल और चेतेश्वर पुजारा ने शानदार बल्लेबाजी कर भारत को जीत दिलाई। सलामी बल्लेबाज मुरली विजय एक बार फिर सस्ते में आउट हो गए, मैच के दूसरे ही ओवर में क्रिस वोक्स की गेंद पर जो रूट ने विजय को शून्य पर कैच आउट किया। वहीं पार्थिव ने बेहतरीन बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया और जीत के नायक रहे। उन्होंने 54 गेंदो पर शानदार 67 रन बनाए। पार्थिव ने यह साबित कर दिया कि आठ सालों के बाद उन्हें टीम में वापस जगह देकर सिलेक्टर्स ने कोई गलती नहीं की। वहीं भारत की मोहाली में जीत के कई और कारण रहे हैं आइए जानते हैं उनके बारें में। ये भी पढ़ें: भारत बनाम इंग्लैंड मोहाली टेस्ट का फुल स्कोरकार्ड

1- पुछल्ले बल्लेबाजों ने दिखाया दम: अगर हम पुछल्ले बल्लेबाजों को भूल जाएंगे तो मोहाली टेस्ट का सारा रोमांच फीका पड़ जाएगा। पहला नाम है इस सूची में रवींद्र जडेजा का। उन्होंने इस मैच में पहली बार अपने टेस्ट करियर में 100 से ज्यादा गेंदे खेली और क्या खूब खेली। जडेजा जो हमेशा ही फटाफट क्रिकेट खेलने के लिए जाने जाते हैं पहली बार टेस्ट मोड में नज़र आए। जब भारत मुश्किल स्थिति में था सर जडेजा ने पहले अश्विन और फिर जयंत यादव के साथ साझेदारी बनाई। जडेजा ने 170 गेंदो में शानदार 90 रन जमाए हालांकि वह शतक से चुक गए। जिसका अफसोस उनसे ज्यादा दर्शकों को हुआ क्योंकि वह सर जडेजा की तलवारबाजी दोबारा नहीं देख पाए। जडेजा ने गेंद से भी अपना योगदान दिया, दूसरी पारी में जो रूट के अहम विकेट को मिलाकर उन्होंने इस मैच में कुल चार विकेट लिए। वहीं दूसरी पारी में बनाए जडेजा के 90 रन इस मैच का अधिकतम स्कोर हैं। वहीं जयंत यादव और अश्विन ने भी बेहतरीन बल्लेबाजी की। अश्विन ने पहली पारी में 72 रन बनाए।अश्विन के आउट होने के बाद जयंत यादव ने जडेजा के साथ मिलकर साझेदारी बनाई और भारतीय पारी को 400 के पार ले गए। यादव ने 141 गेंदों में 55 ताबड़तोड़ रन बनाए। उनका खेल किसी भी मंझे हुए बल्लेबाज जैसा है, वह कहीं से भी कमतर नहीं लगते हैं। खासकर की दबाव की स्थिति में उन्होंने आगे आकर खेला और उमेश यादव और शमी के साथ कई बार छोटी छोटी साझेदारियां बनाई।

2-पार्थिव पटेल की शानदार बल्लेबाजी: आठ साल के अंतर के बाद टीम में आकर रन खेलना कोई आसान काम नहीं है लेकिन पार्थिव पटेल ने यह कर दिखाया है। मोहाली टेस्ट की पहली पारी में भी उन्होंने बेहतरीन शुरूआत की थी और शानदार 42 रन बनाए थे। हालांकि पार्थिव अपना अर्धशतक पूरा नहीं कर सके थे लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने अपनी यह कसर भी पूरी कर ली। पार्थिव मुरली विजय के साथ भारत के लिए ओपनिंग करने उतरे, मुरली विजय के जल्दी आउट होने के बाद पटेल ने पारी को संभाला। पटेल की बल्लेबाजी देखकर लग रहा था कि वह वनडे या टी20 खेल रहे हो। पहली पारी में उनका स्ट्राइक रेट 49 का था जो दूसरी पारी में बढ़कर 124 का हो गया था। पटेल ने भारत की सबसे बड़ी समस्या को हल कर दिया है। एक एक कर शिखर धवन और केएल राहुल के चोटिल होने के बाद सलामी जोड़ी की समस्या भारत के समाने सीरीज की शुरूआत से ही बनी हुई है लेकिन अब भारत को इसके लिए कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। पटेल ने विकेट के पीछे और आगे दोनों जगह अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है। ये भी पढ़ें: तीसरे टेस्ट में भारत ने इंग्लैंड को 8 विकेट से हराया

3-स्पिनर्स का कमाल:  भारत की हर जीत के नायक के रूप में स्पिनर्स भी है। भारतीय टीम के सबसे बड़े मैच विनर का नाम अगर लिया जाएगा तो वह अश्विन ही होंगे। अश्विन न्यूजीलैंड सीरीज से भारत को जीत दिलाते आ रहे है। बल्ले से हो या गेंद से अश्विन हमेशा ही अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं। इस मैच में भी अश्विन ने चार विकेट लिए। अश्विन हर मैच में बड़े खिलाड़ी के रूप में उभर कर सामने आ रहे हैं। वाइजैग टेस्ट में भी उन्होंने आठ विकेट भी चटकाए थे। अश्विन ने इस सीरीज के दौरान कई रिकॉर्ड भी तोड़े हैं वह रंगना हैराथ को पीछे छोड़ इस साल के सबसे ज्याद विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं। वहीं इस सीरीज में मैन ऑफ द सीरीज की रेस में भी वह सबसे आगे हैं। अगर हम ये कहें कि इस मैच को जीतने के सबसे बड़े कारण भारतीय ऑल राउंडर्स हैं तो यह गलत नहीं होगा, इस सूची में अगला नाम है अपना दूसरा टेस्ट खेल रहे जयंत यादव का। यादव ने अपने पहले ही टेस्ट मैच से साबित कर दिया था कि वह एक बेहतरीन ऑल राउंडर है।जयंत ने इस मैच में चार विकेट भी चटकाए जिसमें जो रूट का अहम विकेट भी शामिल है।

4-विराट कोहली का नेतृत्व: विराट कोहली तो पहले से ही भारतीय टीम की हर जीत के हीरो हैं। बतौर बल्लेबाज हो या बतौर कप्तान कोहली का प्रदर्शन उम्दा रहा है। कोहली ने पहली पारी में शानदार 62 रन बनाए थे। हालांकि वह शतक से चूक गए लेकिन कप्तान की जिम्मेदारी से वह कहीं पर भी नहीं चूके। कोहली ने गेंदबाजी से लेकर फील्डिंग तक हर मोर्चे पर इंग्लैंड को मात दी। कोहली ने पार्थिव पटेल पर भरोसा दिखाया और पटेल ने भी उन्हें गलत साबित नहीं होने दिया। वहीं अपना दूसरा ही टेस्ट खेल रहे जयंत यादव के इतने बेहतरीन प्रदर्शन के पीछे कप्तान का पूरा सपोर्ट दिखता है। कोहली ने हर एक खिलाड़ी को अपना सौ प्रतिशत देने के लिए प्रोत्साहित किया और खुद आगे बढ़कर उनका नेतृत्व किया।