भारतीय टीम © Getty Images
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इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में टीम इंडिया ने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए सीरीज अपने नाम कर ली। महेंद्र सिंह धोनी ने सीरीज से ठीक पहले कप्तानी से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद विराट कोहली को टीम की कमान सौंपी गई। भारत ने कोहली की कप्तानी में बेहतरीन खेल दिखाया और सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया। भले ही भारत ने इंग्लैंड को हराकर तीन मैचों की वनडे सीरीज जीत ली हो, लेकिन सीरीज में भारत की कई कमजोरियां उजागर हुईं जो टीम के लिए खतरनाक साबित हो सकतीं हैं। भारत को अब अगला टूर्नामेंट चैंपियंस ट्रॉफी खेलना है ऐसे में ये कमजोरी भारत के लिए खतरा साबित हो सकतीं हैं। आखिर कौन सी ये कमजोरी आइए जानते हैं।

1. सलामी बल्लेबाजी बनी मुसीबत: रोहित शर्मा के चोटिल होने के बाद चयनकर्ताओं ने अनुभवी शिखर धवन, अजिंक्य रहाणे और युवा बल्लेबाज के एल राहुल को इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में मौका दिया। दोनों ही खिलाड़ियों से टीम को अच्छी शुरुआत और बड़ी पारियों की उम्मीद थी। लेकिन इन सब के विपरीत टीम को तीनों ही बल्लेबाजों ने निराश किया। पहले मैच में टीम शिखर धवन और के एल राहुल की जोड़ी के साथ उतरी। इस मैच में दोनों ने टीम को बेहद घटिया शुरुआत दिलाते हुए पहले विकेट के लिए सिर्फ 13 रन ही जोड़े। साथ ही इस मैच में दोनों ही सलामी बल्लेबाजों का कुल योग भी 10 नहीं पहुंच सका। पहले मैच में राहुल ने (8) तो धवन ने मात्र (1) रन ही बनाया। वहीं दूसरे मुकाबले में सलामी बल्लेबाज पहले विकेट के लिए 14 रन ही जोड़ सके। इस मैच में राहुल ने (5) और धवन ने (11) रन ही बनाए। ये भी पढ़ें: भारतीय क्रिकेट की नई खोज हैं केदार जाधव : विराट कोहली

वहीं तीसरे मैच में सलामी बल्लेबाजी में बदलाव किया गया और टीम अजिंक्य रहाणे को धवन की जगह मौका दिया गया। लेकिन बदलाव के बाद भी टीम को ज्यादा फायदा नहीं हुआ और टीम को फिर अच्छी शुरुआत से महरूम रहना पड़ा। तीसरे मैच में दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 13 रन ही जोड़े। इस मैच में रहाणे ने (1) और राहुल (11) रन ही बना सके। साफ है तीनों ही मुकाबलों में भारत को एक अच्छी शुरुआत के लिए तरसना पड़ा। ऐसे में अगर टीम मैनेजमेंट ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया तो भारत को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

2. रविचंद्रन अश्विन का वनडे में फीका प्रदर्शन: एक ऐसा गेंदबाज जो टेस्ट में तो बेस्ट है लेकिन वनडे में वो विकेटों के लिए तरसते नजर आए। टेस्ट में बल्लेबाजों के लिए रविचंद्रन अश्विन एक अबूझ पहेली रहते हैं लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में अश्विन अपना प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे। अश्विन इस दौरान विकेट तो दूर की बात बल्कि जमकर रन भी लुटाए। पहले मैच में अश्विन ने 8 ओवर की गेंदबाजी की और 63 रन खर्च कर डाले इस दौरान उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला।

वहीं दूसरे मैच में अश्विन ने वापसी की और 10 ओवरों में 65 रन खर्च करते हुए 3 खिलाड़ियों को आउट किया। दूसरे मैच के प्रदर्शन के बाद लगा कि अश्विन अपने रंग में आ गए हैं और वह तीसरे मैच में शानदार खेल दिखाएंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं और वह एक बार फिर से फ्लॉप रहे। तीसरे मैच में अश्विन ने 9 ओवरों में 60 दे दिए और एक भी विकेट नहीं लिया। साफ है वनडे सीरीज में अश्विन ने बेहद मामूली खेल दिखाया और विकेटों के लिए तरसते नजर आए।

3. धोनी-युवराज का निरंतर रन ना बनाना: 3 साल बाद वनडे में वापसी करने वाले युवराज सिंह और कप्तानी से इस्तीफी देने वाले महेंद्र सिंह धोनी के अगर एक मैच को छोड़ दिया जाए तो इन दोनों ही खिलाड़ियों का प्रदर्शन उतना खास नहीं रहा जितना की उनसे उम्मीद की जा रही थी। युवराज सिंह ने दूसरे मैच में शतक तो जड़ा लेकिन बाकी दो मैचों में वह ज्यादा सहज महसूस नहीं कर रहे थे और शॉर्ट गेंद पर संघर्ष करते नजर आ रहे थे। प्रदर्शन की बात करें तो युवराज ने पहले मैच में मात्र 15, दूसरे मैच में 150 और तीसरे मैच में 45 रन बनाए। भले ही युवराज के आंकड़े ठीक नजर आ रहे हों, लेकिन तीसरे मैच और पहले मैच में लगातार संघर्ष कर रहे थे। ईडेन की विकेट में गेंदबाजों के लिए हल्की सी मदद थी और वह वहां संघर्ष करते दिख रहे थे। ऐसे में इंग्लैंड में खेले जाने वाले चैंपिंयस ट्रॉफी में विकेट काफी तेज और उछाल भरी होंगी। ऐसे में युवराज को अपने खेल में और सुधार की जरूरत है।

वहीं धोनी की बात करें तो दूसरे मैच को छोड़ दिया जाए तो उनका प्रदर्शन भी उतना खास नहीं रहा। इंग्लैंड के खिलाफ भी सीरीज में धोनी ने न्यूजीलैंड सीरीज की ही तरह सिर्फ 1 ही मैच में चले। धोनी ने पहले मैच में 6, दूसरे मैच में 134 और तीसरे मैच में उन्होंने 25 रन बनाए। आंकड़ों से साफ है कि अगर दूसरे मैच को छोड़ दिया जाए तो धोनी ने पहले और तीसरे मैच में घटिया ही खेला है। पहले और तीसरे मैच में जब टीम को धोनी से जरूरत थी तो वह अपना विकेट फेंक कर चले। ऐसे में धोनी से ऐसी बिल्कुल भी उम्मीद नहीम की जा सकती थी। लेकिन अगर चैंपियंस ट्रॉफी में भी धोनी इसी तरह का खले दिखाएंगे तो टीम के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है।

4. गेंदबाजों का जमकर रन लुटाना: इस सीरीज में जो एक चीज हर मैच में देखने को मिली वो था भारतीय गेंदबाजों का जमकर रन लुटाना। तीनों ही मुकाबलों में भारतीय गेंदबाज अपना प्रभाव छोड़ने में विफल रहे और विपक्षी बल्लेबाजों पर नकेल कसने में नाकाम साबित हुए। तीनों ही मैचों में इंग्लैंड की टीम ने भारत में बेहतरीन बल्लेबाजी की और दो मैचों में 350 से ज्यादा और एक मैच में 320 से ज्यादा रन बनाए।

मुख्य गेंदबाजों की बात करें तो जसप्रीत बुमराह ने पहले मैच में 10 ओवरों में 79 खर्च कर डाले, वहीं दूसरे मुकाबले में उन्होंने 9 ओवरों में ही 81 रन दे डाले तो तीसरे मैच में उन्होंने 10 ओवरों में 68 खर्च किए। कुल मिलाकर बुमराह ने तीनों मैचों में 29 ओवरों में 228 रन खर्च किए। वहीं अश्विन की बात करें तो उन्होंने पहले मैच में 8 ओवरों में 63 रन दिए, तो दूसरे मैच में अश्विन ने 10 ओवरों में 65 रन खर्च कर डाले, वहीं तीसरे मैच में अश्विन ने 9 ओवरों में 60 रन दिए। साफ है टेस्ट में बेस्ट गेंदबाज अश्विन ने वनडे में भारत को निराश किया।  ये भी पढ़ें: इतिहास के पन्नों से: जब 414 रन बनाकर भी केवल तीन रन से जीती थी टीम इंडिया

वहीं भुवनेश्वर कुमार ने को पहले मैच में खेलने का मौका नहीं मिला था। लेकिन रन लुटाने में वो भी पीछे नहीं रहे और दूसरे मैच में उन्होंने 10 ओवरों में 63 रन दे डाले। तो वहीं तीसरे मैच में उन्होंने 8 ओवरों में ही 56 रन खर्च कर डाले। हालात इतने खराब थे कि कप्तान ने उनसे उनका कोटा भी पूरा नहीं करवाया। साफ है अगर भारत को चैंपियंस ट्रॉफी में कुछ कमाल करना है तो इन क्षेत्रों में ध्यान देने की जरूरत है वरना टीम को निराशा हाथ लग सकती है।