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भारतीय टीम © IANS

भारत ने मुंबई टेस्ट में इंग्लैंड को एक पारी और 36 रनों से हराकर सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली। साथ ही चार साल पहले इंग्लैंड के हाथों इसी मैदान पर मिली हार का बदला भी चुकता कर लिया। इंग्लैंड ने मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 400 रनों का स्कोर बनाया था। ऐसे में एक समय वे मैच में मजबूत नजर आ रहे थे। लेकिन विराट कोहली की अगुआई में भारतीय टीम ने जबरदस्त पलटवार किया। मुरली विजय ने पहले शतक जड़ा तो बाद में विराट कोहली ने दोहरा शतक और जयंत यादव ने नौंवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए शतक जड़कर टीम इंडिया को तीसरे दिन 631 रनों के विशाल स्कोर पर लाकर खड़ा कर दिया। इस तरह टीम इंडिया ने मैच में 231 रनों की विशाल बढ़त ले ली। यहीं से टीम इंडिया की जीत लगभग तय हो गई थी। बाद में इसका में ठप्पा लगाने का काम अश्विन ने किया और दूसरी पारी में 6 विकेट चटकाते हुए मैच में कुल 12 विकेट चटकाए और टीम इंडिया को एक पारी और 36 रनों से जीत दिलवा दी। इसके अलावा अन्य भी कई कारण रहे जिनके चलते टीम इंडिया ने मैच में जीत दर्ज की। आइए जानते हैं।

1. रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन का एकतरफा प्रदर्शन: पहली पारी में एक समय इंग्लैंड ने 200 से ज्यादा रन बना लिए थे और उनका सिर्फ एक विकेट ही गिरा था। ऐसे में कोई भी विपक्षी टीम दबाव में आ जाती है। लेकिन इसके बावजूद विराट कोहली ने अपने तीनों स्पिनरों से लगातार गेंदबाजी करवाई और अंततः पहले दिन के अंतिम सेशन में अश्विन का कमाल देखने को मिला और आनन- फानन में उन्होंने तीन विकेट झटक दिए। इस तरह पहले दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड का स्कोर 297/6 हो चला था जो भारतीय गेंदबाजों को ढांढस बंधाने के लिए बहुत था। दूसरे दिन अब बारी जडेजा की थी और उन्होंने अश्विन का अच्छा साथ निभाते हुए इंग्लैंड की रही सही कमर तोड़ दी। अंततः इंग्लैंड की पारी 400 रनों पर ऑलआउट हो गई। गौर करने वाली बात रही कि इस दौरान अश्विन ने 6 और जडेजा ने चार विकेट लिए और अन्य कोई गेंदबाज विकेट लेने में कामयाब नहीं हो पाया। वही हाल चौथी पारी में भी रहा और अश्विन ने यहां भी अकेले ही इंग्लैंड की आधे से ज्यादा पारी को समेट दिया और 6 विकेट ले डाले। दूसरे छोर से जडेजा ने 2 विकेट लिए। इस तरह इन दोनों ने मैच में आपस में 18 विकेट बांटे और जीत की पटकथा लिख डाली। [Also Read: भारत बनाम इंग्लैंड, चौथा टेस्ट, फुल स्कोरकार्ड हिंदी में]

2. विराट कोहली और मुरली विजय की साझेदारी: मैच के तीसरे दिन जब टीम इंडिया बल्लेबाजी के लिए उतरी तो दूसरी गेंद पर ही चेतेश्वर पुजारा को जैक बॉल ने क्लीन बोल्ड कर दिया। इस तरह टीम इंडिया भंवर में फंसती नजर आई। लेकिन चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए विराट कोहली ने सब ठीक कर दिया और आते ही मैदान के चारों तरफ स्ट्रोक जड़े। और कुछ देर के बाद ही टीम इंडिया बड़े स्कोर की ओर अग्रसर होती नजर आई। कोहली ने तीसरे विकेट के लिए विजय के साथ 116 रन जोड़े। इस दौरान विजय ने 136 रनों की पारी खेली और टीम इंडिया को अथाह मजबूती दी। कोहली ने भी दूसरे छोर से लगातार रन बटोरे। गौर करने वाली बात ये थी कि पिच पर स्पिनरों को अच्छा बाउंस मिल रहा था और उसे भारतीय बल्लेबाजों ने रन बनाने के लिए खूब भुनाया।

3. विराट कोहली और जयंत यादव की साझेदारी: मुरली विजय के आउट होने के बाद टीम इंडिया ने एक निश्चित अंतराल के बाद विकेट गंवाए। आलय ये था कि भारत के 307 रनों पर 6 विकेट गिर गए थे। ऐसी विपरीत परिस्थिति में विराट कोहली ने एक छोर पूरी मजबूती से संभाले रखा और अच्छे स्ट्रोक खेले। टीम इंडिया को 364 रनों के स्कोर पर फिर से एक झटका रविंद्र जडेजा के रूप में लगा। ऐसे में फिर से भारतीय पारी पर संकट के बादल मंडराने लगे। लेकिन अब जयंत यादव ने अच्छी बल्लेबाजी की और एक छोर से कप्तान का अच्छा साथ निभाया। तीसरे दिन की समाप्ति पर जहां कोहली 147 रनों पर खेल रहे थे वहीं जयंत अपने अर्धशतक से कुछ ही पीछे थे। अगले दिन सुबह- सुबह जयंत ने कुछ क्लासिकल शॉट अपने बल्ले से दिखाए और क्रिकेट प्रेमियों को अपनी बेहतरीन बल्लेबाजी से मंत्रमुग्ध कर दिया। इसी दौरान विराट कोहली ने साल 2016 का तीसरा दोहरा शतक जड़ा। वहीं जयंत ने अपने टेस्ट करियर का पहला शतक जड़ दिया। दोनों ने नौंवे विकेट के लिए 241 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी की और टीम इंडिया को 631 रनों के रिकॉर्ड स्कोर की ओर अग्रसर कर दिया।

4. इंग्लैंड ने की पिच पढ़ने में गलती: इस मैच में इंग्लैंड के खेल को देखकर ऐसा लगा कि उन्होंने पिच को पढ़ने में गलती की और यही कारण रहा कि वे मैच में तीन की बजाय सिर्फ दो स्पिन गेंदबाजों के साथ उतरे। उनके दोनों मुख्य स्पिन गेंदबाजों ने 50 से ज्यादा ओवरों तक गेंदबाजी की। तीसरे पार्ट टाइम स्पिनर की भूमिका जो रूट ने निभाई। लेकिन सबके इतर इंग्लैंड को तीसरे विशेषज्ञ स्पिनर की कमी खूब खली। इस पिच पर उछाल था और ऐसे में अगर आदिल राशिद को कुक इंटेलीजेंट तरीके से इस्तेमाल करते तो वे टीम इंडिया पर कुछ दबाव जरूर डाल सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इंग्लैंड के स्पिनर बुरी तरह से थक जाने के कारण प्रभाव नहीं डाल पाए। वहीं, कुक ने नई गेंद लेने के लिए भी खूब देर की। उनकी पास चार तेज गेंदबाज थे ऐसे में वह जल्दी नई गेंद लेकर भारतीय बल्लेबाजों को अनसैटल कर सकते थे लेकिन उन्होने मैच के चौथे दिन पूरे 130 ओवरों के बाद नई गेंद ली जो बात इंग्लैंड के पक्ष में बिल्कुल नहीं गई।

5. टीम इंडिया का एक ईकाई में प्रदर्शन: पांचवें दिन का खेल जब शुरू हुआ तो टीम इंडिया ने महज 32 मिनट में ही इंग्लैंड की पारी को समेट दिया और मैच जीतते हुए सीरीज में 3-0 से कब्जा कर लिया। टीम इंडिया की इस जीत में हर खिलाड़ी का योगदान रहा। विकेट के पीछे पार्थिव ने 5 शिकार किए तो मैच के चौथे दिन के अंतिम सेशन में अपनी दूसरी गेंद पर विकेट लेते हुए भुवी ने टीम इंडिया को जीत की खुशबू दिलवाई। वहीं चेतेश्वर पुजारा(47) ने ऐसे समय में विजय के साथ शतकीय साझेदारी निभाई जब भारत ने 39 रनों पर अपना पहला विकेट गंवा दिया था। इस तरह टीम इंडिया ने मैच में चौतरफा प्रदर्शन किया और जीत अर्जित की।