एमएस धोनी और विराट कोहली © Getty Images
एमएस धोनी और विराट कोहली © Getty Images

भारतीय टीम अपने नए साल की पहली सीरीज का आगाज इंग्लैंड के खिलाफ तीन वनडे मैचों की सीरीज से कर रही है। इस वनडे सीरीज के ठीक बाद भारत इंग्लैंड से ही तीन टी20I मैचों की सीरीज खेलेगा। चूंकि, एमएस धोनी का रवैया टी20I में समकालीन कप्तानों से अलग- थलग रहा है। ऐसे में इस सीरीज में कुछ ऐसी चीजें देखने को मिल सकती हैं जो धोनी की कप्तानी में देखने को कतई नहीं मिली। साथ ही टी20 क्रिकेट में धोनी के स्थान को भी चुनौती मिलने वाली है क्योंकि इस साल रणजी ट्रॉफी में धमाल मचाने वाले बल्लेबाज रिषभ पंत को टी20I टीम में जगह जो दी गई है। और कौन सी अलग- थलग बातें इस सीरीज में देखने को मिल सकती हैं? आइए जानते हैं।

1. एमएस धोनी पर रहेगा रन बनाने का दबाव: हाल ही में जब एमएस धोनी ने टीम इंडिया की कप्तानी से इस्तीफा दिया और बतौर खिलाड़ी अपने भाग्य का फैसला उन्होंने चयनकर्ताओं पर छोड़ दिया। उन्हें टीम में बतौर विकेटकीपर बल्लेबाज जगह दी गई। चूंकि, टी20 सीरीज के लिए उनके अतिरिक्त एक और विकेटकीपर बल्लेबाज रिषभ पंत को शामिल किया गया है। इस तरह से अगर धोनी का प्रदर्शन पिछले साल की ही तरह डांवाडोल रहता है तो उनकी पोजीशन को लेकर सवाल भी उठ सकते हैं। यही सवाल वनडे सीरीज के लिए भी मुखर रहेंगे क्योंकि यहां केएल राहुल उनकी पोजीशन को चुनौती दे सकते हैं जो बल्लेबाजी के साथ विकेट कीपिंग में भी माहिर हैं। [ये भी पढ़ें: भारत बनाम इंग्लैंड वनडे सीरीज के खास होने की 5 बड़ी बातें]

रिषभ पंत की बात करें तो उन्होंने चयनकर्ताओं को चुनौती देकर टी20 टीम में अपनी जगह पक्की की है। उनका हाल फिलहाल में रणजी ट्रॉफी में रन बनाने का औसत 81 का रहा है जिसे नकारना किसी के लिए भी आसान नहीं है। जाहिर है कि आप कैसे उस खिलाड़ी को लंबे समय तक टीम में नहीं चुनोगे जिसने रणजी ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट में सबसे तेज शतक 48 गेंदों में जड़ा हो और स्ट्राइक रेट उसका 107.28 का रहा हो? इस लिहाज से उनका टी20 टीम में चयन बेहद महत्वपूर्ण दिखाई देता है। खबरें सुनने को मिल रही हैं कि वर्ल्ड टी20, 2018 में आयोजित किया जा सकता है। अभी कुछ समय के लिए विश्व कप 2019 को भूल जाइए। जाहिर है कि टीम इंडिया पहले वर्ल्ड टी20 के लिए तैयारियां कर रही होगी। गौर करने वाली बात है कि धोनी के नाम टी20I में एक भी अर्धशतक नहीं है। इसलिए वह इस फॉर्मेट में वनडे से ज्यादा दबाव में होंगे। क्योंकि टी20 में अनुभव और लंबी पारियों की गणना कुछ ज्यादा ही की जाती है।

2. स्पिन विभाग में होगी जडेजा- अश्विन की चांदी: हाल फिलहाल में चोटों से उबरने के बाद रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन की टीम में वापसी हो गई है और इस तरह टीम इंडिया में अब एक दिलचस्प परिदृश्य देखने को मिलेगा। धोनी की कप्तानी में अश्विन अपने अंतिम 10 अंतरराष्ट्रीय टी20 में से 6 में अपनी गेंदबाजी का कोटा पूरा नहीं कर सके थे। वनडे में धोनी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो वनडे मैचों के बाद अश्विन को बाहर बिठा दिया था। वही चीज आईपीएल में जारी रही जब धोनी ने आरपीएस टीम की कप्तानी की। हो सकता है कि धोनी का अश्विन से भरोसा उठ गया हो। लेकिन अब ये देखना दिलचस्प होगा कि अपने टेस्ट के जादूगर अश्विन को कोहली कैसे सीमित ओवर क्रिकेट में इस्तेमाल करते हैं। साथ ही ये भी देखने वाली बात होगी कि क्या कोहली तीन स्पिनरों के साथ खेलते हैं या जडेजा, अश्विन और अमित मिश्रा में से किसी एक को बाहर बिठाते हैं।

3. कोहली की टीम में युवाओं की भरमार: इस बार टी20 टीम में युवाओं की भरमार है जिसमें मंदीप सिंह, यजुवेंद्र चहल, पंत जैसे उदीयमान खिलाड़ी शामिल हैं। ऐसे में आशीष नेहरा जिन्होंने हाल फिलहाल में वापसी की है वह युवाओं को मेंटर करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इस साल टी20 क्रिकेट में सिलेक्टर्स ने युवाओं की फौज इसलिए भेजी है क्योंकि 2016 के इतर इस साल कोई बड़ा टी20 टूर्नामेंट नहीं खेला जाना है। चूंकि, 2020 में टी20 वर्ल्ड कप को प्रस्तावित किया गया है और 2018 में इसके होने की खबरों से बाजार गर्म है। ऐसे में चयनकर्ताओं का कहना है,”यही कारण है कि हमने अपनी टीम में कुछ युवाओं को मौका दिया है। और रिषभ और मंदीप सिंह टीम में आए हैं। क्योंकि हाल फिलहाल में ज्यादा टी20 क्रिकेट नहीं होने वाली है।”

4. टी20I में अमित मिश्रा के मौके न के बराबर: अमित मिश्रा टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए अपना दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। इसमें कोई संशय नहीं है कि सीमित ओवर क्रिकेट ने उनके करियर को जीवंत किया है। 20 ओवर क्रिकेट में मिश्रा बल्लेबाज के खिलाफ अपना पूरा अनुभव इस्तेमाल कर सकते हैं। खासकर उनके खिलाफ जो आक्रामक स्ट्रोक खेलने के लिए जाएं, बगैर उनकी विविधताओं को देखे जिनपर अमूमन प्रथम श्रेणी क्रिकेट में ज्यादा गौर किया जाता है। आईपीएल के अलावा मिश्रा ने लंबे फॉर्मेट में भी अपने करियर को कुछ हद तक जीवंत किया है लेकिन कुछ कारणों के चलते उन्हें टी20 टीम में जगह नहीं मिलेगी। बावजूद इसके कि उनका टी20 में गेंदबाजी औसत 13.71 का है और इकॉनमी रेट 6.4 का है। साथ ही वह हर दो ओवरों में विकेट लेते हैं।

लेकिन उनके इन नंबरों पर चर्चा की जा सकती है। क्योंकि उन्होंने महज 8 अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच खेले हैं। लेकिन ये आधी स्टोरी है। उन्हें टी20 में बिना किसी गलती के लगातार बाहर किया जाता रहा है। और फिटनेस को देखते हुए उन्हें टेस्ट में जगह कई बार दी गई है। मिश्रा साल 2014 वर्ल्ड टी20 में भारत के दूसरे सफल गेंदबाज थे। लेकिन इसके पहले की वह खराब प्रदर्शन करते उन्हें वर्ल्ड टी20 2016 में मौका ही नहीं दिया गया। उन्होंने इसके बाद अगर एकमात्र टी20 खेला तो कुछ गैर जरूरी कारणों के चलते। दरअसल वेस्टइंडीज से सीरीज खेलकर टीम इंडिया जब लौट रही थी तो उसे अमेरिका में दो टी20 भी खेलने थे। इसलिए नए स्पिनर को भारत से भेजने के इतर, भारत ने मिश्रा के साथ खेलने का मन बनाया। वह दूसरे मैच के लिए अंतिम एकादश में शामिल हुए और 4 ओवरों में 24 रन देकर चार विकेट झटक डाले। लेकिन इसके बाद उन्हें फिर से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

5. अजिंक्य रहाणे का ये अंतिम मौका? इसमें कोई दो राय नहीं है कि अजिंक्य रहाणे ने टेस्ट बल्लेबाज के रूप में अपनी अच्छी पैठ बना ली है। लेकिन सीमित ओवरो में उनके प्रदर्शनको लेकर एमएस धोनी ने कहा था कि जब पिचें स्लो और गेंद शॉफ्ट होती हैं तो वह जूझने लगते हैं। इसलिए आप कह सकते हैं कि उनके लिए बल्लेबाजी की अच्छी पोजीशन टॉप ऑर्डर साबितहो सकती है। एक ऐसी पोजीशन जिसे शिखर धवन और रोहित शर्मा पहले से अपना बना चुके हैं। राहुल को इसमें जोड़ लें तो आप कह सकते हैं कि अब टॉप ऑर्डर में किसी और के लए कोई गुंजाइश है। पिछली सीरीज में जब धवन चोट के कारण टीम से बाहर हो गए थे तो रहाणे को ओपनिंग करने का मौका मिला था। लेकिन रहाणे इस मौके को भुना नहीं पाए और लगातार सस्ते में आउट हुए। ऐसे समय में टी20 स्क्वाड से बाहर निकलना रहाणे के लिए कतई अच्छी खबर नहीं है। अपने इस भरोसे को बढ़ाने के लिए उन्हें वनडे सीरीज में जाहिर तौर पर कमाल दिखाना होगा।