टीम इंडिया  © Getty Images
टीम इंडिया © Getty Images

भले ही टीम इंडिया ने इंग्लैंड के खिलाफ मौजूदा टी20I सीरीज में 1-1 से बराबरी कर ली हो। लेकिन दोनों मैचों में ही टीम इंडिया इंग्लैंड से दो कदम पीछे नजर आई है। जाहिर है कि अगर नागपुर टी20I बुमराह ने अंतिम ओवर में असंभव को संभव नहीं किया होता तो टीम इंडिया सीरीज गंवा चुकी होती। ऐसे में बैंगलुरू में खेले जाने वाले अगले मैच से पहले टीम इंडिया को अपनी रणनीति में कुछ बदलाव करने होंगे। टीम इंडिया ने पिछले कुछ समय में वनडे और टेस्ट में तो अच्छा प्रदर्शन किया है लेकन टी20I में टीम इंडिया का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है। लेकिन कौन सी ऐसी बातें हैं जो टीम इंडिया को इस फॉर्मेट में पिछले कदमो पर धकेल रही हैं। आइए नजर डालते हैं।

1. सलामी बल्लेबाजों का अच्छी शुरुआत न दे पाना: टी20I क्रिकेट में ओपनिंग जोड़ी पर इस बात का दारोमदार रहता है कि वह पावरप्ले में अच्छे- खासे रन ठोकते हुए अपनी टीम को तेज- तर्रार शुरुआत दे। ताकि आने वाले ओवरों में मध्यक्रम के बल्लेबाज रन गति को बरकरार रख सकें। वहीं उन्हें आते ही बड़े स्ट्रोक खेलने की जरूरत न पड़े। लेकिन ये सब कर पाने में भारतीय ओपनर पिछले कुछ मैचों से लगातार विफल हो रहे हैं। पिछले कुछ समय से केएल राहुल लगातार आउट ऑफ फॉर्म चल रहे थे। नागपुर टी20I में में 71 रनों की पारी खेलने के बाद जरूर राहुल ने अपने फॉर्म में लौटने का संकेत दिया है। लेकिन इसी बीच सवाल उठता है कि उनके जोड़ीदार के रूप में कोहली किसी स्पेशल ओपनर को क्यों नहीं आजमाते? पहले दो टी20I में कोहली खुद ओपनिंग जोड़ीदार की भूमिका निभाते नजर आए थे। लेकिन दोनों मौकों पर वह विफल रहे थे। जाहिर है कि उन्हें मनदीप सिंह य ऋषभ पंत में से किसी एक को बतौर स्पेशलिस्ट ओपनर अंतिम एकादश में जगह देनी चाहिए। ये भी पढ़ें: आईसीसी की जारी ताजा वनडे रैंकिंग में भारत चौथे स्थान पर खिसका

2. भारतीय टीम का चरमराता हुआ मध्यक्रम: विराट कोहली के ओपनिंग करने के कारण भारतीय टीम का मध्यक्रम असंतुलित हो गया है। मध्य के ओवरों में जरूरत होती है कि बल्लेबाज तेज रन बनाते हुए अपने विकटों का बचाए रखें। लेकिन युवराज सिंह, एमएस धोनी और मनीष पांडे इस चीज को भुनाने में पूरी तरह से असफल रहे हैं। जाहिर है कि टीम इंडिया के बल्लेबाजों को बीच के ओवरों में तेज तर्रार बल्लेबाजी की जिम्मेदारी लेनी होगी तभी जाकर टीम इंडिया बड़े स्कोर की अग्रसर हो पाएगी। क्योंकि अब समय बदल चुका है और कोई भी स्कोर टी20I क्रिकेट में चेज किया जा सकता है। इक्का- दुक्की रन से काम नहीं चलेगा। ये बात टीम इंडिया को इंग्लैंड के बल्लेबाजों से सीखनी होगी जो आते ही चौके- छक्के जड़ने में लग जाते हैं।

3. टीम में कोई ढंग का फिनिशर नहीं: तेज तर्रार बल्लेबाजी करने वाला बल्लेबाज न होने से टीम इंडिया के समक्ष ऐसे फिनिशर की समस्या खड़ी हो गई है जो अंतिम ओवरों में अकेले दमपर मैच जिताने का माद्दा रखता हो। एमएस धोनी ने इस पोजीशन पर लंबे समय तक अपनी भूमिका निभाई और अब वह जाकर कुंद पड़ गए हैं। रैना ने भी इस पोजीशन पर अपने हाथ आजमाए लेकिन कुछ खास सफलता अर्जित नहीं कर सके। अब वनडे क्रिकेट में केदार जाधव इस चुनौती को संभलाने की कोशिश कर रहे हैं।

टी20 क्रिकेट में एक अलग तरह का फिनिशर चाहिए होता है। क्योंकि यहां पर बल्लेबाज के पास आंखें जमाने का समय नहीं होता बल्कि गेंदों पर सीधे प्रहार करने वाला बल्लेबाज होना चाहिए जो गेंदों को आसानी से बाउंड्री लाइन के बाहर भेज सके। मनीष पांडे इसे मुकम्मल करने में असफल रहे हैं। वहीं हार्दिक पांड्या भी फीके ही साबित हुए हैं। दूसरे टी20 मैच में जब पांडे को धोनी के पहले बल्लेबाजी के लिए भेजा गया तो ये बात निकलकर के आ गई कि टीम इंडिया अंतिम ओवरों में रन बनाने के लिए धोनी पर ज्यादा निर्भरता दिखा रही है। इसका खामियाजा भी देखने को मिला कि 14वें ओवर में 100 का आंकड़ा छूने के बावजूद टीम इंडिया 160 का स्कोर नहीं छू पाई। इसके अतिरिक्त अंतिम पांच ओवरों में सिर्फ 36 रन बने। जाहिर है कि टीम इंडिया को इस बात पर गौर करना होगा।

4. पुराने ढर्रों से आगे बढ़नो होगा: साल 2007 में जब टीम इंडिया ने टी20 विश्व कप जीता था तब पूरी टीम युवा थी। तब के वरिष्ठ खिलाड़ी सचिन, गांगुली और द्रविड़ ने अपने आपको इस फॉर्मेट से किनारे कर लिया था। आज धोनी, युवराज, रैना समेत टीम में वरिष्ठ खिलाड़ी हैं। जिनके कारण तेज तर्रार बल्लेबाजी करने वाले नए नवेले खिलाड़ियों को मौका नहीं मिल पा रहा है और जो जोश टीम में होना चाहिए वह नहीं दिखाई दे रहा है। धोनी लगातार बड़े स्ट्रोक नहीं जड़ पा रहे हैं। वही हाल युवी का है और जल्दी से आउट हो रहे हैं। जाहिर है कि उन्हें अंतिम एकादश के लिए रिषभ पंत को आगे लाना चाहिए। पंत एक विकेटकीपर बल्लेबाज हैं। वह धोनी की जगह विकेटकीपिंग भी कर पाएंगे। साथ ही ओपनिंग जोड़ी में अपना योगदान दे पाएंगे। वहीं मध्यक्रम में युवराज सिंह की जगह मनदीप सिंह को शामिल किया जा सकता है। युवी टी20I क्रिकेट में लगातार असफल हो रहे हैं। मनदीप सिंह, जो पंजाब के एक अच्छे बल्लेबाज हैं वह अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।