विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने न्यूजीलैंड का सूपड़ा साफ किया था © Getty Images
विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने न्यूजीलैंड का सूपड़ा साफ किया था © Getty Images

इंग्लैंड के खिलाफ विराट कोहली जब भारतीय टीम के कप्तान के तौर पर मैदान पर उतरेंगे तो उनके ऊपर ना सिर्फ टीम को सीरीज दिलवाने की जिम्मेदारी होगी बल्कि उनके ऊपर 40 साल के सूखे को खत्म करने का भी दबाव होगा। आखिर किस सूखे की बात कर रहे हैं हम। दरअसल, इससे पहले पिछली तीन सीरीज में जब भी इंग्लैंड की टीम भारत में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेलने आई है तब-तब उसने भारत को पटखनी दी है। चाहे वह साल 1976-77 रहा हो या फिर साल 1984-85 दोनों ही मौकों पर इंग्लैंड की टीम ने भारत को उसी की धरती पर हराने में कामयाबी पाई है।

ऐसे में विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया पिछले चालीस साल के रिकॉर्ड को बदलने के लिहाज से मैदान पर उतरेगी। अगर विराट कोहली अपनी कप्तानी में भारत को सीरीज में जीत दिला देते हैं तो वह चालीस सालों में पांच मैचों की सीरीज में भारत को जीत दिलाने वाले पहले कप्तान बन जाएंगे। विराट कोहली की कप्तानी में भारत का रिकॉर्ड शानदार है और टीम ने अभी तक कोई भी सीरीज में हार का मुंह नहीं देखा है। आइए आपको विस्तार से बताते हैं कि पिछले 40 सालों में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारत दौरे पर कब-कब आई इंग्लैंड की टीम और क्या रहा सीरीज का नतीजा।

साल 1976/77: 5 मैचों की सीरीज में इंग्लैंड 3-1 से विजयी:

साल 1976/77 में इंग्लैंड टीम भारत दौरे पर थी। भारत में इंग्लैंड को पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी थी। सीरीज के मैच, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरू और मुंबई में खेले गए। दिल्ली में खेले गए पहले मुकाबले में फारूख इंजीनियर की कप्तानी में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। लेकिन इंग्लैंड के गेंदबाजों ने भारत के फैसले को गलत साबित कर दिया और भारत को मात्र 173 रनों पर ढेर कर दिया। इंग्लैंड की तरफ से जीजी आर्नोल्ड ने 6 विकेट लिए। जवाब में भारत ने भी कसी हुई गेंदबाजी की और इंग्लैंड की पहली पारी 200 पर समेट दी। पहली पारी के आधार पर इंग्लैंड के पास 27 रनों की बढ़त थी। पहली पारी में भारत के बीएस चंद्रशेखर ने 8 खिलाड़ियों को पवेलियन भेजा था।  ये भी पढ़ें: चोटिल होने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी के लिए खेलने होंगे घरेलू मैच: अनिल कुंबले

दूसरी पारी में भारतीय बल्लेबाजी एक बार फिर फ्लॉप रही और पूरी टीम सिर्फ 233 रनों पर ऑल आउट हो गई। भारत की तरफ से ईडी सोलकर ने 75 और फारूख इंजीनियर ने 63 रन बनाए। इंग्लैंड को दूसरी पारी में जीत के लिए सिर्फ 207 रन बनाने थे। बी वुड के 40, एआर लुईस के नाबाद 70 और ग्रेग के नाबाद 40 की मदद से इंग्लैंड ने 6 विकेट से जीत हासिल कर ली।

सीरीज का दूसरा टेस्ट दिल्ली में खेला गया। भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। लेकिन इंग्लैंड के गेंदबाजों ने भारत की एक नहीं चलनी दी और पूरी टीम को मात्र 155 पर ही ढेर कर दिया। जवाब में इंग्लैंड ने ग्रेग के शतक और टोलचर्ड के अर्धशतक की मदद से 321 रन बना डाले। इंग्लैंड ने पहली पारी के आधार पर 166 रनों की विशाल बढ़त हासिल कर ली थी। दूसरी पारी में भारत की बल्लेबाजी विफल रही और पूरी टीम सिर्फ 181 रनों पर सिमट गई। इंग्लैंड को जीत के लिए 16 रन चाहिए जो उसने सभी विकेट शेष रहते बना लिए।

सीरीज का तीसरा टेस्ट चेन्नई में खेला गया। इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और पहली पारी में 262 रन बनाए। भारत अपनी पहली पारी में कुल 164 रन ही बना सका। दूसरी पारी में इंग्लैंड की बल्लेबाजी लड़खड़ा गई और टीम ने 185 रन बनाए। भारत के सामने जीत के लिए 284 रनों की चुनौती थी लेकिन पूरी टीम 83 रनों पर ही ढेर हो गई। भारत सीरीज हार चुका था।

सीरीज के चौथे मुकाबले में भारत ने वापसी की और मैच को 140 रनों के अंतर से जीतने में कामयाब रहा, वहीं सीरीज का पांचवां और आखिरी मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ।  ये भी पढ़ें: इंग्लैंड को हराने का ‘R-स्क्वॉयर’ प्लान

साल 1984/85: इंग्लैंड 2-1 से विजयी:

सुनील गावस्कर की कप्तानी में भारत ने मुंबई में खेले गए पहले मुकाबले में 8 विकेट से जीत दर्ज की। इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 195 रन ही बनाए जिसके जवाब में भारत ने रवि शास्त्री और किरमानी के शतकों की बदौलत 465 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। भारत ने पहली पारी के आधार पर अच्छी-खासी बढ़त ले ली थी। दूसरी पारी में इंग्लैंड ने 317 रन बनाए और भारत के सामने 48 रनों की चुनौती रखी। भारत ने 2 विकेट खोकर इस चुनौती को हासिल कर लिया।

सीरीज की दूसरा मैच दिल्ली के फिरोज शाह कोटला में खेला गया। जहां भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पहली पारी में 307 रनों का स्कोर खड़ा किया। बल्लेबाजी के लिए उतरी इंग्लैंड ने बेहतरीन बल्लेबाजी की और पहली पारी में 418 रन बना डाले। वहीं दूसरी पारी में भारत ने 235 रन बनाए और इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 125 रनों का लक्ष्य रखा जिसे इंग्लैंड ने आसानी से हासिल कर लिया। दो मैचों के बाज सीरीज 1-1 की बराबरी पर थी और सीरीज का तीसरा मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ। ये भी पढ़ें: इंग्लैंड के खिलाफ बदला लेने के इरादे से मैदान पर उतरेंगे गौतम गंभीर

सीरीज के चौथे मुकाबले में भारत ने अपनी पहली पारी में 272 रन बनाए जिसके जवाब में इंग्लैंड टीम ने 652 रन बना डाले। इंग्लैंड की तरफ से जी फोलर और गैटिंग ने दोहरे शतक जड़ थे। भारत ने काफी संघर्ष के बाद दूसरी पारी में 412 रन बनाए और इंग्लैंड के सामने 33 रनों का लक्ष्य रखा, जिसे इंग्लैंड ने मात्र 1 विकेट खोकर रही हासिल कर लिया। सीरीज का पांचवां मैच ड्रॉ हो गया और भारत सीरीज फिर से हार गया।

अब भारत के विराट कोहली के पास मौका भी है और दस्तूर भी। विराट कोहली अगर अपनी कप्तानी में टीम को जीत दिला देते हैं तो वह इतिहास रचने में कामयाब हो जाएंगे और इतिहास के सुनहरे पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लेंगे। दोनों देशों के बीच पहला मैच बुधवार को राजकोट में खेला जाना है।