टॉम लेथम ने खेली शतकीय पारी © AFP and Getty
टॉम लेथम ने खेली शतकीय पारी © AFP and Getty

पिछले कुछ महीनों से वनडे में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही टीम इंडिया को न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में 6 विकेट के करारी हार झेलनी पड़ी। पूरे मैच में टीम इंडिया न्यूजीलैंड के आगे कहीं नहीं नजर आई। पहले तो न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी और बाद में टॉम लेथम और रॉस टेलर ने भारतीय गेंदबाजों को दिन में तारे दिखाते हुए जीत मुंह से छीन ली। लेकिन इस बीच सवाल पैदा होता है कि ऐसा क्या हुआ कि टीम इंडिया को पहले वनडे में हार का सामना करना पड़ा। आइए नजर डालते हैं उन 5 कारणों पर।

1. ओपनिंग जोड़ी का फेल हो जाना: टीम इंडिया का पहला विकेट 16 रनों के योग पर शिखर धवन के रूप में गिरा। धवन इस मैच में शुरू से ही लेफ्ट आर्म पेसर ट्रेंट बोल्ट के खिलाफ जूझते नजर आ रहे थे और उन्होंने बाहर जाती गेंद पर अपना बल्ला अड़ा दिया और विकेट गंवा दिया। इस झटके से टीम इंडिया अंत तक उबर नहीं पाई और निश्चित अंतराल में विकेट गंवाए। विकेट गिरने के कारण रन रेट बढ़िया नहीं हो पाया। खामियाजन टीम इंडिया 30-40 रन कम बना पाई और इन्हीं रनों ने मैच में अंतर पैदा कर दिया।

धवन इस मैच के साथ ही करीब डेढ़ महीने के बाद वनडे क्रिकेट में वापसी कर रहे थे। धवन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज में अपनी पत्नी के बीमार होने के कारण नहीं खेले थे। उन्होंने टी20 सीरीज में वापसी की थी। जहां वह लगातार छोटा स्कोर बनाने में ही कामयाब हुए। धवन को वनडे टीम में जगह इनफॉर्म अजिंक्य रहाणे की जगह दी गई है जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में रनों का अंबार लगाया था। जाहिर है कि धवन को जल्दी ही अपनी फॉर्म में वापसी करनी होगी वरना उनकी जगह खतरे में पड़ सकती है।

2. रोहित शर्मा का अति-आत्मविश्वास पड़ा भारी: रोहित शर्मा इस मैच में जब उतरे तो वह अति-आत्मविश्वास से लबरेज थे। एक ओवर में जब टिम साउदी की कुछ गेंदें डॉट चली गईं तो रोहित बड़े शॉट खेलने के लिए आतुर नजर आने लगे और फाइन लेग क्षेत्र में एक ही अंदाज में दो छक्के मारे। अगला ओवर ट्रैंट बोल्ट लेकर आए। बोल्ट ने शुरुआती गेंदों में उन्हें छकाया, जिसके कारण वह और आक्रोश में आ गए और बड़ा स्ट्रोक लगाने के लिए निकल पड़े। इसी प्रयास में वह बोल्ड हो गए। यह बात किसी से छुपी नहीं है कि रोहित अक्सर लेफ्ट आर्म पेसर के खिलाफ आउट हो जाते हैं। अब रोहित अपनी इस कमजोरी को कैसे भूल गए, बहरहाल ये तो उनका आक्रामक रवैया ही बता सकता है।

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3. नंबर 4 पर बल्लेबाजों का लगातार फेल होना: साल 2015 वर्ल्ड कप के बाद से ही टीम इंडिया के लिए नंबर 4 पोजीशन परेशानी रही है। इन दो सालों में इस पोजीशन पर कुल 14 खिलाड़ियों को आजमाया जा सका है लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। पिछले दिनों युवराज सिंह, एमएस धोनी, हार्दिक पांड्या और मनीष पांडे को इस पोजीशन पर आजमाया गया है। इन बल्लेबाजों का इस पोजीशन पर असफल होने का कारण ये भी है कि किसी को इस पोजीशन पर लगातार मौके नहीं दिए गए। मुंबई वनडे में केदार जाधव को नंबर चार पर भेजा गया और वह भी असफल रहे। यही विकेट टीम इंडिया को खासा खला और काफी देर तक रन रेट लटका रहा। टीम इंडिया को जल्दी ही इस समस्या का निवारण करना होगा तभी बात बन पाएगी।

4. एमएस धोनी का सेट होने के बाद विकेट गंवाना: दिनेश कार्तिक के आउट होने के बाद बल्लेबाजी करने के लिए आए एमएस धोनी ने विराट कोहली का अच्छा साथ निभाया और धीरे-धीरे पारी को संवारने लगे। धोनी विराट के साथ अर्धशतकीय साझेदारी निभा चुके थे और अब वह चौके भी लगा रहे थे। ऐसे में लगा कि धोनी बड़ी पारी खेलेंगे। लेकिन इसी वह बीच बोल्ट की एक छोटी लेंथ वाली गेंद को बैकवर्ड प्वाइंट में हवा में खेल गए। जाहिर है कि धोनी इस तरह का स्ट्रोक उस पोजीशन में कतई नहीं खेलना चाहते थे। उनके चेहरे के भाव हर कुछ बयां कर रहे थे। धोनी का सेट होकर आउट हो जाना टीम इंडिया की हार का बड़ा कारण रहा क्योंकि धोनी अगर वहां आउट नहीं होते तो टीम इंडिया 300 के पार जरूर जाती।

5. स्वीप ने किया भारतीय स्पिनरों का काम तमाम: युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव की जोड़ी ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को पिछली सीरीज में खासा परेशान किया था, लेकिन न्यूजीलैंड के रॉस टेलर और टॉम लेथम ने भारतीय स्पिनरों के खिलाफ एक अजब रणनीति बना रखी थी। वह स्वीप शॉट के सहारे गेंद की पिच पर पहुंच रहे थे जिसके कारण भारतीय स्पिनर पूरी पारी में बेअसर नजर आए। वहीं भारतीय गेंदबाज उनके स्वीप का कोई तोड़ नहीं निकाल पाए। पुणे वनडे के पहले भारतीय गेंदबाजों को स्वीप का तोड़ जरूर निकालना होगा तभी बात बन पाएगी।