भारतीय टीम ने टेस्ट सीरीज 3-0 से जीती
भारतीय टीम ने टेस्ट सीरीज 3-0 से जीती

भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में 3-0 से हराते हुए श्रृंखला अपने नाम की। विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है और हर सीरीज में जीत दर्ज कर रही है। विराट कोहली ने दिसंबर 2014 में टीम इंडिया की कप्तानी का दारोमदार अपने कंधों पर लिया था। तबसे टीम इंडिया लगातार जीत दर्ज कर रही है और अब टेस्ट रैंकिंग में नंबर एक पर काबिज है। टेस्ट क्रिकेट में यह चौथा मौका है जब टीम इंडिया ने किसी टीम को क्लीन स्वीप किया हो। इसके पहले टीम इंडिया ने 1993 में इंग्लैंड को, 1994 में श्रीलंका को और 2013 में श्रीलंका को क्लीन स्वीप किया था। किसी भी टीम को क्लीन स्वीप करना आसान नहीं होता। इसके लिए टीम के खिलाड़ियों को एक ईकाई में प्रदर्शन करना होता है। वही टीम इंडिया ने किया और पूरी सीरीज में न्यूजीलैंड के खिलाड़ियो पर दबाव बनाए रखा। आइए हम आपको उन पांच अहम कारणों से रूबरू कराते हैं जिनके कारण टीम इंडिया ने सीरीज में जीत दर्ज की। भारत बनाम न्यूजीलैंड, तीसरा टेस्ट, फुल स्कोरकार्ड पढ़ने के लिए क्लिक करें…

1. बल्लेबाजों का शानदार प्रदर्शन: इस सीरीज में टीम इंडिया के बल्लेबाजों पर अगर नजर दौड़ाएं तो वे शुरू से अंत तक न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को खौफजदा करते रहे। सीरीज में शीर्ष 5 बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में 4 भारतीय बल्लेबाज हैं। वहीं पांचवें नंबर पर जाकर न्यूजीलैंड के ल्यूक रॉन्की का नाम आता है जिन्होंने 6 पारियों में बल्लेबाजी करते हुए कुल 200 रन 33.33 की औसत से बनाए। इस सीरीज में सर्वाधिक रन चेतेश्वर पुजारा ने बनाए। उन्होंने 6 पारियों में 74.60 की औसत से 373 रन बनाए जिसमें एक शतक और 3 अर्धशतक शामिल हैं। पुजारा ने ऐसे मौकों पर रन बनाए जब टीम इंडिया को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। दूसरे नंबर पर अजिंक्य रहाणे रहे जिन्होंने 6 पारियों में 69.40 की औसत से 347 रन बनाए। रहाणे ने इस दौरान एक शतक और एक अर्धशतक जमाया। इस दौरान उनके द्वारा इंदौर टेस्ट में 188 रनों की पारी खासी चर्चा में रही। रन बनाने के मामले में तीसरे और चौथे नंबर पर विराट कोहली और रोहित शर्मा रहे।

2. विराट कोहली की शानदार कप्तानी: साल 2014 में जब टीम इंडिया को टेस्ट क्रिकेटसे दामन छोड़ दिया तो लगा कि टीम इंडिया की नैय्या अब तो मझधार में डूब जाएगी। ऐसे समय में विराट कोहली आए और उन्होंने अपनी बेहतरीन कप्तानी के बलबूते टीम इंडिया तमाम तरह से प्रयोग किए और नंबर एक टीम के रूप में काबिज किया। वेस्टइंडीज गई टीम इंडिया में विराट कोहली ने जहां 5 गेंदबाजों की रणनीति से विपक्षी टीम को चकमा दिया था तो स्वदेश लौटते ही उन्होंने नई रणनीति इजाद की और चार गेंदबाजों के साथ उतरे। इन दोनों सीरीजों में अगर टीम इंडिया की गेंदबाजी की बात करें तो वह कहीं भी कमजोर नजर नहीं आई। बल्कि वे विपक्षी टीम से हर विभाग में दो कदम आगे नजर आए। विराट कोहली ने स्पिन को मदद देने वाली पिचों पर जडेजा और अश्विन का भरपूर इस्तेमाल किया। कानपुर टेस्ट में एक समय टॉम लेथम और केन विलियमसन भारतीय गेंदबाजों के नाक में दम कर रहे थे। लेकिन कोहली जानते थे कि अश्विन रूपी इस महान बल्लेबाज को अगर कोई मात दे सकता है तो वह अश्विन ही हैं। अश्विन को जरूर पहले दिन उके सामने गेंदबाजी करने में परेशानी हुई। लेकिन एक दिन के बाद ही उनकी ऑफ स्टंप के बाहर की कमी भांप गए और उन्होंने कानपुर टेस्ट में उन्हेंएक बेहतरीन गेंद पर बोल्ड कर दिया। इसके बाद से अश्विन ने हर बार उन्हें आउट किया और उन्हें सीरीज में बड़ा स्कोर बनाने का मौका ही नहीं दिया। इंदौर टेस्ट में टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड को 321 रनों के भारी अंतर से हराया। यह टेस्ट मैच में रनों के आधार पर दर्ज की गई टीम इंडिया की सबसे बड़ी जीत है। इसके पहले टीम इंडिया ने साल 2015 में दक्षिण अफ्रीका को दिल्ली में 337 रनों से हराया था।

3. आर. अश्विन का जादू: आर. अश्विन इस सीरीज में पूरे रंग में नजर आए। अश्विन ने इस सीरीज के तीन मैचों में सर्वाधिक 27 विकेट लिए। साथ ही इंदौर टेस्ट में उन्होंने अकेले 13 विकेट ले डाले। अश्विन ने इस सीरीज में जिस लाइन और लेंथ पर गेंदें फेकी उससे बल्लेबाज अक्सर चकमा खाते दिखे। इस सीरीज में कुल 33 बार बल्लेबाज पगबाधा आउट हुए। यह विश्व क्रिकेट में दूसरी बार देखा गया जब बल्लेबाज इतनी बार पगबाधा आउट हुए। इसके पहले साल 2012 में इंग्लैंड बनाम पाकिस्तान सीरीज में 43 बल्लेबाज पगबाधा आउट हुए थे। इनमें 8 मौकों पर अश्विन ने बल्लेबाज को पगबाधा आउट किया। ये बताता है कि वह बल्लेबाजों के लिए कितनी परेशानी का सबब बने हुए थे। अश्विन ने पिछले साल दक्षिणअफ्रीका के खिलाफ खेली गई सीरीज में भी कहर बरपाया था और 31 विकेट ले डाले थे। अश्विन का वही कहर यहां भी देखने को मिला। अश्विन टेस्ट क्रिकेट में 21 पांच विकेट हॉल हो चुके हैं। वहीं वही 39 टेस्ट मैचों में 220 विकेट ले चुके हैं। जिस रफ्तार से वह विकेट ले रहे हैं। उसे देखते हुए वह जल्दी कई रिकॉर्ड्स अपने नाम कर सकते हैं। वर्तमान में अश्विन विश्व के चुनिंदा गेंदबाजों में से एक हैं। पूरे सीरीज का अगर एक विश्लेषण करे तो हम मैच में अश्विन ने अपना बड़ा योगदान दिया और इसीलिए उन्हें मैन ऑफ द सीरीज एक बार फिर से चुना गया। वह अब तक 7 बार मैन ऑफ द सीरीज चुने जा चुके हैं। जो अपने अपने आपमें एक बड़ा रिकॉर्ड है। अश्विन ने इस सीरीज में न्यूजीलैंड के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज केन विलियमसन को हर बार आउट किया।

4. विराट कोहली की शानदार बल्लेबाजी: सीरीज की शुरुआत में विराट कोहली लगातार अपने बल्ले से असफल हो रहे थे। लेकिन उन्होंने इस दौरान कप्तानी में कोई कसर नहीं छोड़ी। आखिरकार जब टीम को उकी सबसे ज्यादा जरूरत थी तो उन्होंने कोलकाता टेस्ट की दूसरी पारी में 45 रन जड़कर अपनी वापसी का संकेत दे दिया। ये 45 न टर्न लेती हुई उस पिच पर बहुत महत्वपूर्ण थे जहां अन्य भारतीय बल्लेबाजों ने अपने हथियार डाल दिए थे। अंततः भारतीय टीम ने कोलकाता मैच तो जीता है। साथ ही जब इंदौर टेस्ट के लिए टीम इंडिया आई तो कोहली ने अपने बल्ले के जादू से एक बार फिर से सबको सराबोर कर दिया और दोहरा शतक जड़ दिया। उन्होंने अपनी इस पारी के दौरान बिल्कुल भी आक्रामकता नहीं दिखाई और बाउंड्रीज से इतर चौकों व छक्कों पर ज्यादा गौर किया। कोहली ने अपनी 211 रनों की पारी के दौरान सिर्फ 20 चौके जड़े वहीं छक्के के बारे में उन्होंने सोचा भी नहीं। यही कारण रहा की टीम इंडिया ने साल 2013 के बाद पहली बार एक पारी में 400 से ज्यादा का स्कोर बनाया और 321 रनोंके अंतर से एक विशाल जी दर्ज की। कोहली का यह बतौर कप्तान टेस्ट में दूसरा दोहरा शतक है।

5. भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद शमी और रविंद्र जडेजा की धारदार गेंदबाजी: कोलकाता टेस्ट में भुवनेश्वर कुमार को टीम में शामिल किया गया था। पिच में शुरुआती दिनों में काफी उछाल थी। ऐसे में स्पिन गेंदबाजों की जगह तेज गेंदबाजों का रोल अहम होने वाला था। ऐसी परिस्थिति में भुवनेश्वर कुमार ने शानदार गेंदबाजी की और पही पारी में अकेले 6 विकेट झटके। दूसरी छोर से मोहम्मद शमी ने भी उनका अच्छा साथ निभाया और बाकी के बल्लेबाजों को पवेलियन लौटाने का जिम्मा लिया। भले ही भुवी ने एक मैच खेला लेकिन 6 विकेट लेकर वह सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की फेहरिस्त में छठवें नंबर पर रहे। मोहम्मद शमी भारतीय टीम की ओर से सबसे ज्यादा विकेट लेनेवाले तेज गेंदबाज रहे और उन्होंने 3 मैचों में 8 विकेट लिए। उन्होंने उस मौके पर विकेट लिए जब टीम को विकटों की सख्त जरूरत थी।

वहीं बात करें रविंद्र जडेजा की तो उन्होंने अश्विन का दूसरे छोर से अच्छा साथ निभाया और विकटों की झड़ी लगा दी। सीरीज में जडेजा विकेट लेने के मामले में दूसरे नंबर पर रहे और उन्होंने कुल 14 विकेट चटकाए।