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कोलकाता टेस्ट में भारत ने न्यूजीलैंड को एक बार फिर धूल चटा दी। कोलकाता के ईडेन गार्डन में खेले गए मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को मैच के चौथे दिन ही न्यूजीलैंड को 178 रनों से करारी शिकस्त देकर सीरीज जीत ली। भारत ने सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। अब भारत का इरादा इंदौर टेस्ट को जीतकर सीरीज में क्लीन स्वीप करने का होगा। दूसरे टेस्ट में भारत ने न्यूजीलैंड की नहीं चलने दी और कीवी बल्लेबाजों को रन बनाने का कोई मौका नहीं दिया। हालांकि दूसरी पारी में न्यूजीलैंड की शुरुआत अच्छी रही और दोनों सलामी बल्लेबाजों ने टीम के लिए अर्धशतकीय साझेदारी निभाई। चायकाल के बाद भारतीय गेंदबाजों ने वापसी करते हुए तास के पत्तों की तरह न्यूजीलैंड के विकेट गिरा दिए। आइए नजर डालते हैं उन भारतीय खिलाड़ियों पर जो दूसरे टेस्ट में भारत के लिए जीत का सूत्रधार बने।

5. तेज गेंदबाजों का चलना:

कानपुर टेस्ट में जहां स्पिन गेंदबाज छाए रहे थे तो वहीं तेज गेंदबाजों को विकेट के लिए तरसना पड़ा था। लेकिन कानपुर टेस्ट को इतिहास साबित करते हुए कोलकाता में मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार शानदार गेंदबाजी का मुजाहिरा पेश करते हुए भारत की जीत की नींव रखी। पहली पारी में जहां भुवनेश्वर ने 5 विकेट लिए तो दूसरी पारी में उन्होंने न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को खूब छकाया। मोहम्मद शमी की बात करें तो दोनों पारियों में कीवी बल्लेबाजों के लिए सिरदर्द बने रहे और मैच की दोनों पारियों में 3-3 विकेट हासिल करने में कामयाब रहे। इस तरह से मैच में तेजगेंदबाजों ने कुल 12 विकेट हासिल किए। मैच से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि हो सकता है विराट कोहली 3 स्पिनर और एक तेज गेंदबाज के साथ कोलकाता में उतरेंगे। लेकिन दोनों गेंदबाजों ने अपनी उपयोगिता साबित कर उन सभी कयासों को गलत ठहरा दिया।

4. फिरकी गेंदबाजों का कमाल:

स्पिन हमेशा से भारत की ताकत रही है। स्पिन गेंदबाज भारत की जीत की गारंटी रहे हैं और कोलकाता में भी अश्विन और जडेजा की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की जीत की पटकथा लिखी। भारत की जीत में अश्विन और जडेजा का बहुत बड़ा योगदान रहा। हालांकि पहली पारी में अश्विन ने एक और जडेजा ने भी एक विकेट ही लिया, लेकिन दूसरी पारी में दोनों फिरकी गेंदबाजों ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए भारत की जीत तय कर दी। दूसरी पारी में अश्विन ने पहले गप्टिल को फिर रॉस टेलर को आउट कर कीवियों की कमर तोड़ दी इसके बाद खतरनाक दिख रहे लेथम को भी आउट कर अश्विन ने भारत को जीत की दहलीज पर पहुंचा दिया। जडेजा भी कहां रुकने वाले थे, पहली पारी में विकेट न मिलने से गुस्साए जडेजा ने दूसरी पारी में ल्यूक रॉन्की, हेनरी निकोलस और मेट हेनरी के विकेट निकालकर भारत के लिए राह आसान कर दी। दोनों स्पिन गेंदबाजों ने भारत के लिए एक बार फिर मैच जिताऊ गेंदबाजी की।

3. रोहित शर्मा के 82 रन:

जब टीम संकट की स्थिति में थी और लग रहा था कि भारत जल्द ही ऑल आउट हो जाएगा ऐसे समय में रोहित शर्मा ने अपने विकेट के महत्व को समझते हुए भारत के लिए शानदार पारी खेली। रोहित की 82 रनों की पारी मैच का अंतर बदलने के लिहाज से निर्णायक साबित हुई। रोहित को भी इस पारी की सख्त जरूरत थी। भारत को रोहित ने सिर्फ सहारा दिया बल्कि 82 रन बनाकर भारत को उस स्थिति में ला खड़ा किया जहां से भारत मैच जीतने के बारे में सोच सकता था। रोहित की पारी ने टीम को ये भरोसा दिलाया की मैच अभी हाथ से फिसला नहीं है। रोहित शर्मा ने अपनी पारी में 9 चौके और 2 छक्के लगाए। रोहित ने संयम से खेलते हुए हर कीवी गेंदबाजों की खबर ली और आसानी से अपना विकेट नहीं गंवाया। रोहित की पारी भारत के लिए अहम साबित हुई।

2. रिद्धिमान साहा:

मैच की दोनों पारियों में नाबाद अर्धशतक लगाने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज रिद्धिमान साहा ने भारत के लिए लाजवाब पारी खेली। रिद्धिमान साहा के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। टीम में रविचंद्रन अश्विन से भङी नीचे बल्लेबाजी करने आए साहा ने ना सिर्फ दोनों पारियों में भारत को संकट की स्थिति से निकाला बल्कि पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ मिलकर टीम को सम्मानजनक स्थिति तक पहुंचाया। साहा ने पहली पारी में 54 और दूसरी पारी में 58 नाबाद रन बनाए। इसी के साथ साहा ने ऐसे कीर्तिमान रच डाला जो गिलक्रिस्ट, धोनी सरीखे बल्लेबाज भी नहीं कर सके। साहा 1961 के बाद ऐसे पहले वेकेटकीपर बल्लेबाज बन गए जिन्होंने दोनों पारियों में नाबाद अर्धशतक लगाया। इससे पहले ये कारनामा वेस्ट इंडीज के जेरी एलेक्सेंडर ने किया था। साफ है साहा की बल्लबाजी को देखते हुए लगता है कि भारत को साहा के रूप में एक अच्छा विकेटकीपर बल्लेबाज मिल गया है बस जरूरत है तो उनपर विश्वास दिखाने की।

1. चेतेश्वर पुजारा-अजिंक्य रहाणे का मैजिक:

कोलकाता टेस्ट में जब भारत 46 रन पर अपने तीन काबिल बल्लेबाजों के विकेट खो चुका था तो लग रहा था कि कीवी गेंदबाजों के सामने जल्दी ही भारत के बल्लेबाज हथियार डाल देंगे। लेकिन चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे को कुछ और ही मंजूर था। दोनों ने भारत के लिए ऐतिहासिक पारी खेलते हुए भारत को न सिर्फ संकट से उबारा बल्कि भारत को मैच जीतने की स्थिति में भी ला खड़ा किया। जब मैच में कीवी गेंदबाज हावी होते दिख रहे थे उसी दौरान दोनों बल्लेबाजों ने धैर्य, साहस और हिम्मत का परिचय देते हुए अपने-अपने अर्धशतक जमाए। पुजारा ने पहली पारी में 87 रन बनाए तो रहाणे ने भी शानदार 77 रनों का योगदान दिया। इन दोनों की पाीरियों के बदौलत भारत पहली पारी में निर्णायक बढ़त लेने में कामयाब रहा। दोनों की शानदार बल्लेबाजी के दम पर ही भारत 300 का आंकड़ा छूने में भी कामयाब रहा। तो साफ है कि कोलकाता टेस्ट में इन दोनों के योगदान के बिना भारत को जीत नहीं मिल सकती थी।