सुरेश रैना के लिए टीम में जगह बनाना आसान नहीं होगा © Getty Images
सुरेश रैना के लिए टीम में जगह बनाना आसान नहीं होगा © Getty Images

टेस्ट के बाद अब बारी है वनडे मैचों की, भारत ने टेस्ट में जहां न्यूजीलैंडो को 3-0 से हरा दिया तो वनडे में भारतीय टीम के इरादे भी टेस्ट के प्रदर्शन को दोहराने को होंगे। हालांकि वनडे में न्यूजीलैंड भारत को कड़ी टक्कर देगा। आईसीसी रैंकिंग में न्यूजीलैंड भारत से एक स्थान ऊपर तीसरे नंबर पर है। भारत की टीम में कई बदलाव देखने को मिले हैं। अश्विन-जडेजा की जगह अमित मिश्रा और अक्षर पटेल को मौका मिला है तो पांड्या को वनडे में पदार्पण करने का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ है। टीम में मनीष पांडे भी हैं।

इन सबके बीच सबकी नजरें भारत के आक्रामक बल्लेबाज सुरेश रैना पर भी टिकी होंगी। हालांकि वायरल बुखार के कारण रैना पहले मैच में नहीं खेल रहे हैं, लेकिन ये सीरीज रैना के करियर के लिए काफी महत्वपूर्ण है। सुरेश रैना वनडे टीम में लगभग एक साल बाद वापसी कर रहे हैं। रैना को उनके खराब प्रदर्शन के कारण टीम से बाहर कर दिया गया था। रैना ने इससे पहले अपना आखिरी वनडे दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था, जिसमें दक्षिण अफ्रीका ने भारत को 214 रनों के अंतर से हराकर सीरीज 3-2 से अपने नाम की थी। ऐसे में रैना के लिए इस सीरीज का बहुत महत्व है। रैना काफी भाग्यशाली हैं जो चयनकर्ताओं ने उन्हें टीम में चुना अब जबकि युवा खिलाड़ी काफी अच्छा खेल दिखा रहे हैं। ऐसे में रैना को खुद को एक बार फिर से साबित करना होना और सबको बताना होगा कि उनके बल्ले में अभी काफी आग है।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि रैना एक शानदार खिलाड़ी हैं, उन्होंने भारत के लिए कई उपयोगी पारियां खेली हैं। रैना ने पिछले 10 सालों में भारत को कई मैच जिताए हैं। जब रैना अपने करियर के चरम पर थे टो वह टीम के स्थायी सदस्य थे और टीम से रैना को बाहर करना लगभग असंभव सा होता था। रैना टीम में हरफनमौला खिलाड़ी का रोल निभाते हैं और धोनी के लिए वह एक तुरुप का इक्का हैं। भारत के निचले क्रम में धोनी के रैना भारत के सबसे आक्रामक बल्लेबाजों में से एक हैं। रैना उस समय बल्लेबाजी के लिए आते हैं जब भारत को तेज गति से रनों की जरूरत होती है। रैना ने अब तक 35 की औसत से 5568 रन बनाए हैं और इस दौरान रैना का स्ट्राइक रेट 93 से भी ज्यादा का रहा है। रैना नंबर 5 और नंबर 6 पर खेलते हुए भारत के लिए काफी उपयोगी साबित हुए हैं।

रैना का करियर उस वक्त ढलान पर आ गया जब रैना शॉर्ट पिच गेंदों पर असहज महसूस करने लगे। रैना की शॉर्ट गेंदों पर कमजोरी का फायदा विपक्षी टीम उठाने लगीं और रैना जैसे ही क्रीज पर आते गेंदबाज उन्हें शॉर्ट गेंद फेंककर परेशान करने लगते। शॉर्ट गेंदों को खेलने में परेशानी के कारण रैना कई मैचों में फ्लॉप हुए और यहीं से रैना के करियर का ग्राफ लगातार नीचे गिरने लगा। जिसके बाद रैना टीम से अंदर-बाहर रहने लगे। रैना के लिए न्यूजीलैंड के खिलाफ मिला मौका किसी सुनहरे अवसर से कम नहीं है। रैना की उम्र लगभग 30 की है और इस समय खिलाड़ी को अपनी कमजोरी और मजबूती का बखूबी अंदाजा होता है।

करियर के इस पड़ाव में रैना को एक बार फिर से खुद को एक बल्लेबाज और एक खिलाड़ी के तौर पर निखारना होगा। रैना टीम के लिए फिनिशर की भूमिका शानदार तरीके से निभाते आए हैं और एक बार फिर से रैना को अपनी काबिलियत पर भरोसा रखते हुए उसी तरह के प्रदर्शन को दोहराना होगा। भारतीय टीम में फिनिशर की भूमिका फिलहाल धोनी निभा रहे हैं। रैना ने कई बार भारत के लिए फिनिशर के रोल को बखूबी निभाया है और धोनी के विकल्प के तौर पर रैना ही फिनिशर के रूप में दिखते थे।

रैना टीम में सिर्फ एक आक्रामक बल्लेबाज की भूमिका ही नहीं निभाते हैं बल्कि वह टीम के लिए संकट की घड़ी में गेंदबाजी कर विकेट लेने भी कामयाब होते हैं। रैना ने कई बार बड़ी साझेदारियों को तोड़ा है, वहीं फील्डिंग में रैना का कोई सानी नहीं है, रैना फील्डिंग के दौरान मैदान में एक दम चौकन्ने रहते हैं और बल्लेबाज को उनके बगल से गेंद निकालना एक चुनौती जैसा होता है। रैना द्वारा बड़े और आक्रामक शॉट किसी भी क्षण खेलना उनकी सबसे बड़ी ताकत में से एक है। रैना कभी भी अपने ऊपर दबाव नहीं लेते और विपक्षी टीम पर चढ़कर खेलने में भरोसा करते हैं। लेकिन अब जब टीम में मनीष पांडे, केदार जाधव और हार्दिक पांड्या जैसे खिलाड़ी भी हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है तो ऐसे में रैना के लिए टीम में जगह बनाना खासा मुश्किल भरा है। टीम में हर जगह के लिए कट्टर प्रतिसपर्धा है ऐसे में रैना को अपने खेल में निखार लाने की आवश्यकता है, रैना को अपने बल्ले से और अच्छे प्रदर्शन की जरूरत है। जिससे रैना अपने आलोचकों का मुंह बंद कर सकें।