महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में ही सचिन तेंदुलकर का विश्व कप जीतने का सपना पूरा हुआ था।
महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में ही सचिन तेंदुलकर का विश्व कप जीतने का सपना पूरा हुआ था।

भारत बनाम पाकिस्तान यह एक ऐसा मैच होता है जिसके लिए दोनों देशों के क्रिकेट फैन्स हमेशा ही उत्साहित रहते हैं। पिछले दिनों बीसीसीआई ने यह साफ कर दिया कि भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान के साथ कोई भी मैच नहीं खेलेगी, यहां तक कि अगले साल होने वाली चैम्पियंस ट्रॉफी में भी दोनों टीमों को अलग पूल में रखने की बात की जा रही है। इस फैसले से दर्शकों को काफी निराशा हुई है क्योंकि अब दोनों टीमों के बीच होने वाले रोमांचक मैच वह नहीं देख पाएंगे। भारत और पाकिस्तान जब भी आमने सामने होते है एक बेहद ही कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है। चाहे वह विश्व कप हो, एशिया कप या द्विपक्षीय सीरीज। फिलहाल कई सालों से दोनों टीमें द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेल रही हैं लेकिन पहले के मैचों के कई मजेदार किस्से लोग आज भी याद करते हैं। इन्ही में से एक है 2007 में पाकिस्तान के भारत दौरे का पहला वनडे मैच। ये भी पढ़ें: रविचंद्रन अश्विन ने उड़ाया पार्थिव पटेल का मजाक

नौ साल पहले जब पाकिस्तानी टीम भारत दौरे पर आई थी तब पांच वनडे और तीन टेस्ट की फुलपैक्ड सीरीज का आयोजन किया गया था। पहले वनडे मैच से पहले पाकिस्तान टीम ने दिल्ली की टीम के साथ एक अभ्यास मैच भी खेला था। जिसमें मेहमान टीम ने सात विकेट से जीत हासिल की थी। गोवाहाटी में खेल गए वनडे से पहले पड़ोसी टीम के हौसले काफी बढ़े हुए थे, इस टीम का नेतृत्व कर रहे थे शोएब मलिक। नेहरू स्टेडियम में आयोजित मैच में पाकिस्तान ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया। गोवाहाटी की इस पिच पर कई बार 250 से ज्यादा का स्कोर बनाया गया था इस लिहाज़ से पिच बल्लेबाजी के लिए उम्दा थी। मेहमान टीम की ओर से सलामी बल्लेबाजी करने के लिए सलमान बट्ट और कामरान अकमल मैदान पर उतरे। दोनों बल्लेबाजों ने धीमी लेकिन ठोस शुरूआत की लेकिन महज़ 12 रन के स्कोर पर विकेटकीपर अकमल इरफान पठान का शिकार बने। सलमान ने नए बल्लेबाज यूनिस खान के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाया। अर्धशतक पूरा करते ही सलमान खराब तालमेल और युवराज सिंह की बेहतरीन फील्डिंग के चलते रन आउट हो गए। इसके बाद बारी थी यूनिस खान की जो 25 रन बनाकर भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह की गेंद पर इरफान पठान के हाथों कैच आउट हो गए। जिसके बाद मैदान पर उतरे पाकिस्तान के सबसे मशहूर बल्लेबाज और मौजूदा कप्तान शाहिद अफरीदी। अफरीदी ने मोहम्मद यूसुफ के साथ पाकिस्तान के स्कोर को 150 के पार पहुंचाया। वहीं 39वें ओवर में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने गेंद थमाई भारत के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को। सचिन अच्छे बल्लेबाज होने के साथ पार्ट टाइम स्पिनर का काम भी करते थे, वहीं अफरीदी और सचिन का मुकाबला भी देखने लायक था। अफरीदी ने आते ही आक्रामक बल्लेबाजी शुरू कर दी, सचिन के ओवर में उन्होंने दो चौके जड़ दिए। सचिन इससे काफी परेशान दिख रहे थे तभी धोनी ने विकेट के पीछे से आवाज दी कि ‘इसे वाइड फेंक सकते हैं’ और ओवर की पांचवी गेंद पर सचिन ने ऑफ स्टंप से बाहर की ओर गेंद कराई, अफरीदी शॉट खेलने के चक्कर में क्रीज से एकदम बाहर खड़े थे और 4जी से भी तेज भारत के कप्तान धोनी ने फटाक से अफरीदी का स्टंप उड़ा दिया। सचिन ने विकेट लेते ही खुशी से धोनी को गले लगा लिया। ये भी पढ़ें: भारत बनाम इंग्लैंड मोहाली टेस्ट: भारत की जीत के चार कारण

मैच का वीडियो आप यहां देख सकते हैं..

ऐसा पहली बार नहीं था जो धोनी ने अपनी चतुराई से बल्लेबाज को चकमा दिया हो। धोनी जाने ही जाते हैं विकेट के पीछे अपनी तेजी के लिए, बतौर विकेटकीपर कप्तान धोनी विकेट के पीछे से पूरे खेल पर अपनी नज़र बनाए रखते हैं। एक विकेटकीपर सबसे अच्छी तरह से देख सकता है कि बल्लेबाज कैसे खेल रहा है और आगे क्या करने वाला है। धोनी ने पहले ही पढ़ लिया था कि अफरीदी क्रीज से बाहर आकर खेल रहे हैं और उन्हे विकेट के पीछे चकमा दिया जा सकता है। धोनी ने इसके अलावा कई बार बिना देखे ही बल्लेबाज को रन आउट किया है। वहीं अगर सचिन और धोनी की बात करें तो दोनों के बीच काफी अच्छी दोस्ती रही है। सचिन से जब भी यह पूछा गया है कि उन्हें अपने से जूनियर खिलाड़ी धोनी की कप्तानी में खेलना कैसा लगता है। सचिन का हमेशा यही जवाब होता है कि धोनी उन बेहतरीन कप्तानों में से एक है जिनके साथ उन्होंने क्रिकेट खेला है। वहीं धोनी ने ही सचिन का विश्व कप जीतने का सपना पूरा करने में अहम भूमिका निभाई थी। दोनों ही बल्लेबाज एक दूसरे का सम्मान करते हैं। इस मैच में धोनी ने 63 रनों की शानदार पारी खेली थी और भारत यह मैच पांच विकेटों से जीत गया था। मैन ऑफ द मैच का खिताब भी धोनी को ही दिया गया था।