वीरेंद्र सहवाग
वीरेंद्र सहवाग

भारतीय टीम के विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने वैसे तो भारतीय टीम की ओर से वनडे क्रिकेट में पदार्पण साल 1999 में ही कर लिया था लेकिन टेस्ट क्रिकेट में स्थान बनाने के लिए उन्हें दो और सालों का इंतजार कना पड़ा। सहवाग ने अंततः 3 नवंबर 2001 से दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले जाने वाले पहले टेस्ट मैच में पदार्पण किया। मैच में दक्षिण अफ्रीकी कप्तान शॉन पोलक ने टॉस जीता और पहले क्षेत्ररक्षण करने का निर्णय लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया की शुरुआत खासी खराब रही और 51 रनों पर तीन बल्लेबाज पवेलियन लौट गए। ये तीनों बल्लेबाज शिव सुंदर दास(9), राहुल द्रविड़(2), और वीवीएस लक्ष्मण(32) थे। गौर करने वाली बात है कि सहवाग को इस मैच में ओपनिंग नहीं उतारा गया था। बल्कि छठवें क्रम पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया था।

ऐसे में सचिन तेंदुलकर ने चौथे विकेट के लिए सौरव गांगुली के साथ मिलकर पारी संभालने की कोशिश की लेकिन गांगुली भी 14 रन बनाकर आउट हो गए। ऐसे में लग रहा था कि टीम इंडिया जल्दी ही ऑलआउट हो जाएगी। इसी बीच एक बल्लेबाज जो हूबहू सचिन तेंदुलकर जैसा दिखाई देता था मैदान में चहलकदमी करता नजर आया। ये कोई और नहीं वीरेंद्र सहवाग था। सहवाग ने आते ही सचिन तेंदुलकर का अच्छा साथ निभाया और लगातार उन्हें स्ट्राइक देते नजर आए। सचिन इस दौरान आक्रामक नजर आए और हर ढीली गेंद पर चौका जड़ रहे थे और सहवाग दूसरे छोर से खराब गेंदों पर ही स्ट्रोक लगा रहे थे। मैदान में बैठे दर्शक इस बात से भी हैरान थे कि दोनों बल्लेबाजों के खेलने का अंदाज एक दूसरे जैसा ही था। सचिन जिस अंदाज में गेंद को प्वाइंट की दिशा में खेलकर चार रनों के लिए निकाल रहे थे। उसी अंदाज और फुटवर्क के साथ सहवाग भी गेंद को अंजाम तक पहुंचा दे रहे थे। सचिन और सहवाग की इस कलाबाजी का मजा हर कोई ले रहा था और दोनों बल्लेबाजों के बल्ले रनों का अंबार लगा रहे थे।

दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 220 रनों की साझेदारी निभाई और इस दौरान सचिन 155 न बनाकर आउट हो गए। सचिन ने इस दौरान 184 गेंदों का सामना किया और 23 चौकों सहित 1 छक्का भी जड़ा। ऐसे में सहवाग के ऊपर जिम्मेदारी आ गई कि वह स्कोर को लगातार बढ़ाएं। सहवाग ने सचिन के आउट होने के थोड़ी देर बाद ही अपने पहले वनडे में शतक जड़ा और किसी मंजे हुए बल्लेबाज की तरह बल्लेबाजी करते नजर आए। सहवाग अंततः 105 रन बनाकर आउट हुए जिसके लिए उन्होंने 173 गेंदों का सामना किया। सहवाग ने इस दौरान 19 चौके जड़े, वहीं छक्का एक भी नहीं लगाया। सहवाग ने छठवें विकेट के लिए दीपदास गुप्ता(34) के साथ जरूर अर्धशतकीय साझेदारी निभाई। लेकिन सहवाग के आउट होने के थोड़ी देर बाद ही भारतीय पारी 379 रनों पर सिमट गई।

जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी दक्षिण अफ्रीका टीम ने हर्षल गिब्स(107) लांस क्लजूनर(108) व अन्य तीन बल्लेबाजों के अर्धशतकों की मदद से 563 रनों का स्कोर बनाया। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका ने पहली पारी के आधार पर 184 रनों की बढ़त ले ली जो भारी मालूम पड़ रही थी। जवाब में तीसरी पारी में जब टीम इंडिया बल्लेबाजी के लिए उतरी तो शिव सुंदर दास(62) के अलावा कोई अन्य बल्लेबाज कमाल नहीं दिखा सका। सहवाग ने जरूर(32) रनों के दौरान 6 चौके जड़कर पारी को संभालना चाहा लेकिन टीम इंडिया अंततः 237 रनों पर ऑलआउट हो गई। चौथी पारी में दक्षिण अफ्रीका को जीतने के लिए 54 रनों का लक्ष्य मिला जिसे उन्होंने 1 विकेट खोकर हासिल कर लिया। भले ही टीम इंडिया ये मैच हार गई लेकिन सहवाग रूपी एक भावी ओपनर का यहां उदय हो चुका था जो आगे के समय में टीम इंडिया के बहुत काम आया। सहवाग ने साल 2004 में ही पाकिस्तान सीरीज में तिहरा शतक जड़कर अपनी असीम प्रतिभा का सुबूत पेश किया।