Devbrat Bajpai
देवब्रत वाजपेयी क्रिकेटकंट्री हिंदी के साथ senior correspondent के पद पर कार्यरत हैं
Written by Devbrat Bajpai
Last Updated on - February 12, 2016 1:15 PM IST


हाल ही में ऑस्ट्रेलियाई दौरे में रनों का अंबार लगाने वाली भारतीय टीम ने बल्लेबाजी विभाग में बेहतरीन प्रदर्शन किया था और ऐसा लगने लगा था कि टी20 क्रिकेट में उनके हाथ एक ऐसा फॉर्मूला लग गया है जिसके दम पर वह आगामी एशिया कप टी20 और विश्व कप टी20 में एक बढ़िया टीम साबित होगी। लेकिन हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ शुरू हुई टी20 घरेलू सीरीज के पहले मैच में एक करारी हार के बाद भारतीय टीम की कमियां उभरकर सामने आ गई हैं और अब टीम इंडिया को एहसास हो गया है कि विश्व की अव्वल दर्जे की टीमों को पछाड़कर कप जीतना इतना भी आसान नहीं होने वाला। चूंकि, श्रीलंका इस सीरीज में अपनी दोहरे दर्जे की टीम के साथ भारत से खेल रही है। ऐसे में पहला टी20 मैच पुणे में हारने के बाद भारतीय टीम रांची में होने वाले दूसरे टी20 के साथ अवश्य रूप से जीत की पटरी पर वापस लौटना चाहेगी। ऐसे में भारतीय टीम के लिए यह भी जरूरी है कि उन कारणों पर वह गौर फरमाएं जिनके कारण उन्हें टी20 सीरीज में अपनी धरती पर लगातार हार झेलनी पड़ रही है। ये भी पढ़ें: श्रीलंकाई अबूझ पहेलियों से कैसे निपटेगी भारतीय टीम?
1. गैर-जिम्मेदारी भरी बल्लेबाजी से बचना होगा: पहले टी20 मैच में भारतीय बल्लेबाज गैर-जिम्मेदारान शॉट खेलकर आउट हुए। भारत ने जब शुरू में ही रोहित और अजिंक्य रहाणे के रूप में दो विकेट गंवा दिए थे तब जरूरत थी कि दूसरे बल्लेबाज अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए टीम को संभालते। लेकिन शिखर धवन ने गैर जरूरी जोखिम लिया और अपना विकेट फेंक कर चलते बने। ऐसी परिस्थिति में यह जरूरी होता है कि दो में से एक बल्लेबाज हिटिंग करे और एक स्ट्राइक रोटेट करे, लेकिन इस दौरान बल्लेबाजों ने हिटिंग पर ज्यादा जोर दिया और निश्चित अंतराल में विकेट गंवाए। दूसरे टी20 मैच में भारत को इस बात पर जरूर ध्यान देना होगा। ये भी पढ़ें: दूसरे टी20 में श्रीलंका को धूल चटाने को बेताब टीम इंडिया
2. विपक्षी गेंदबाजों को कम ना आंके: पुणे की पिच पर अच्छी खासी घास होने की वजह से वह तेज गेंददबाजों के लिए मददगार साबित हुई। चूंकि भारतीय टीम श्रीलंका की युवा टीम के खिलाफ खेल रही थी, इसीलिए उन्होंने उन्हें गंभीरता से ना लेते हुए उलूल जुलूल शॉट्स खेले। यही भारतीय टीम के लिए भारी पड़ा और श्रीलंका टीम के तीन नए गेंदबाजों कसुन रजिथा, दुसामंथ चमीरा और दसुन शनाका ने आपस में कुल 8 विकेट बांटे। पहले मैच में कसुन रजिथा ने टी20 मैचों में पर्दापण किया था वहीं दसुन शनाका के करियर का यह दूसरा मैच था। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों को इन गेंदबाजों को शुरुआती ओवरों में समझते हुए फिर आक्रमण करना होगा। ताकि इन्हें सबक सिखाया जा सके। ये भी पढ़ें: श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टी20 के लिए भारत की संभावित अंतिम एकादश
3. लक्ष्य निर्धारित करते हुए करें बल्लेबाजी: पहले मैच में जब भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी करने उतरी थी और उन्हें पता चला कि पिच बल्लेबाजी के अनुकूल नहीं है तो उन्हें तभी लक्ष्य निर्धारित कर लेना चाहिए था कि उन्हें 20 ओवरों में कितना लक्ष्य बनाना है ताकि विपक्षी टीम को मात दी जा सके। अगर इस रणनीति के साथ बल्लेबाजी की गई होती तो शायद भारतीय टीम ने इतनी जल्दी विकेट नहीं गंवाए होते और परिस्थिति थोड़ा अलग होती और भारतीय टीम 20 ओवर खेलते हुए अगर 120 के आस-पास का स्कोर बना लेती तो विपक्षी टीम को एक कड़ी टक्कर दी जा सकती थी। ऐसे में इस मैच में भारतीय टीम अपनी इस रणनीति पर जरूर गौर फरमाना चाहेगी। ये भी पढ़ें: क्या भारतीय टीम को खल रही है विराट कोहली की कमी?
4. विपक्षी टीम को चौंकाएं: पहले टी20 मैच में श्रीलंका ने भारत को कुछ नए खिलाड़ियों व भिन्न रणनीति के साथ हैरत में डाल दिया था। वहीं दूसरी ओर भारत के पास उन्हें चकित करने के लिए कुछ नहीं था और जो था वह उसे ढंग से इस्तेमाल ही नहीं कर पाए। हार्दिक पांड्या और जसप्रीत बुमराह के अलावा भारतीय टीम के अलावा और कोई ऐसा खिलाड़ी नहीं था जिसे लंकाई जानते ना हों। लेकिन पांड्या पहले टी20 मैच में बल्ले व गेंद दोनों से बुरी तरह से असफल रहे। ऐसे में भारतीय कप्तान एमएस धोनी उनकी जगह नए नवेले खिलाड़ी पवन नेगी को टीम में शामिल करते हुए विपक्षी टीम को चौंका सकते हैं। वहीं दूसरी चाल यह भी हो सकती है कि धोनी अश्विन व जडेजा से शुरुआती ओवर फिंकवाते हुए पिंच हिटर के रूप में हार्दिक पांड्या को ऊपर भेजें और श्रीलंकाई टीम को पूरी तरह से चकित कर दें।
5. ऑस्ट्रेलिया की परिस्थितियों से उबरना होगा: भारतीय टीम हाल ही में ऑस्ट्रेलिया का लगभग महीने भर का दौरा करने के बाद स्वदेश लौटी है। ऐसे में वे अभी ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी परिस्थिति से उबरे नहीं हैं। इस संबंध में बात करते हुए सुनील गावस्कर ने कहा था, “मुझे लगता है कि ऑस्ट्रेलिया में खेलने की भारतीय टीम थोड़ी ज्यादा आदी हो गई है जहां आपको खड़े होकर स्ट्रोक खेलने पड़ते हैं और स्ट्रोक लगाने के लिए झुकना नहीं पड़ता। लेकिन भारत की सरजमीं पर आपको झुककर शॉट्स खेलने होंगे। मुझे नहीं लगता कि पुणे की पिच में बल्लेबाजी करना बहुत कठिन था। मुझे लगता है कि पिच पर थोड़ा घुमाव था जो अक्सर घास वाली पिच पर देखने को मिलता है। विशेष रूप से तब जब आप शाम को 7.30 के बाद मैच खेलते हैं तो ओस भी गेंदबाजों की सहायता करती है।
अब भारतीय टीम 12 फरवरी को श्रीलंका से दूसरे टी20 मैच में भिड़ने जा रही है। ऐसे में यह जरूरी है कि वे अच्छे होम वर्क के बाद ही मैदान पर उतरे और श्रृंखला में बराबरी करते हुए अपने उम्मीदों को जिंदा करें।
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