फोटो साभार: गेटी इमेज
फोटो साभार: गेटी इमेज

वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम ने 1950 के दशक में टेस्ट क्रिकेट पटल पर उठना शुरू किया था जब थ्री डब्ल्यू  क्लाइड वॉलकट, ईवर्टन वीकेस और फ्रेंक वॉरेल ने वेस्टइंडीज टीम की कायापलट कर दी। ये तीनों उस समय के सबसे बेहतरीन मध्यक्रम के बल्लेबाज माने जाया करते थे।  इनके आने के पहले वेस्टइंडीज टीम की मध्यक्रम बल्लेबाजी की औसत 29.38 थी जो उस समय ऑस्ट्रेलिया 35.42 और इंग्लैंड 35.57 से कम थी। अगले 10 सालों में 1948 से 1958 तक वेस्टइंडीज के मध्यक्रम की बल्लेबाजी का औसत 63 प्रतिशत बढ़ गया। इन तीनों के आने के बाद वेस्टइंडीज टीम के मिडिल ऑर्डर का औसत 47.99 का हो गया जो उस समय सबसे ऊपर था।

दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलियाई मिडिल ऑर्डर का नाम आता था जिनका औसत 39.15 का था। इस दौरान जितने भी वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम ने रन बनाए अधिकतर उन्हीं तीनों के बल्लों से बने।  इस दौर में वेस्टइंडीज का मिडिल ऑर्डर सबसे बढ़िया था। इन तीनों की बल्लेबाजी का ही असर था कि वेस्टइंडीज ने 49 टेस्ट मैचों में 17 जीते और 15 हारे और उनका जीतने- हारने का अनुपात तीसरे नंबर पर रहा था जो इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बाद था जो उस समय विश्व की बेहतरीन टीमें थीं।

फोटो साभार: गेटी इमेज
फोटो साभार: गेटी इमेज

इनकी विरासत को आगे के सालों में क्लाइव लॉयड और विवियन रिचर्डस की नेतृत्व वाली टीम ने आगे बढ़ाया। वेस्टइंडीज टीम ने साल1981 से 1989 के बीच टेस्ट क्रिकेट में खूब कहर बरपाया। इस दौरान वेस्टइंडीज से मैच जीतना किसी भी टीम के लिए किसी सपने साकार होने जैसा था। इस दौरान लगभग अजेय रही वेस्टइंडीज टीम ने कुल 69 टेस्ट मैच खेले जिनमें उन्हें 40 में जीत और 7 मैचों में हार मिली। इस दौरान वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों का औसत जहां 36.27 रहा तो गेंदबाजों का औसत 26.13 रहा।

1990 के दशक के बाद वेस्टइंडीज टीम में विस्तृत स्तर पर बदलाव देखने को मिले। लेकिन नई जमात ने वेस्टइंडीज टीम को काफी हद तक संभालने में कामयाबी प्राप्त की। ब्रायन लारा ने जहां देश और विदेश में रनों का अंबार लगाया तो दूसरे बल्लेबाजों ने लारा का खूब साथ निभाया। लारा ने साल 2007 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया और इसके कुछ सालों बाद ही वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच भुगतान को लेकर विवाद गहरा गया। साल 2013 में वेस्टइंडीज टीम भुगतान विवाद के कारण ही दौरा बीच में छोड़कर वापस आ गई थी। ये विवाद समय- समय पर उभरता रहता है और वेस्टइंडीज क्रिकेट के भविष्य को अधर में लटकाता रहता है।

फोटो साभार: गेटी इमेज
फोटो साभार: गेटी इमेज

ऐसा कतई नहीं है कि वेस्टइंडीज के पास प्रतिभाशाली टेस्ट खिलाड़ियों की कमी है। बल्कि बोर्ड से टकराव के कारण कई बढ़िया खिलाड़ियों को टीम की ओर से खेलने का मौका नहीं दिया जाता। हाल ही में भारत के खिलाफ खेली गई सीरीज में वेस्टइंडीज टीम की बल्लेबाजी पर सवाल तल्ख हुए। जाहिर है कि वेस्टइंडीज की मुख्य टीम करीब एक साल से ही टेस्ट क्रिकेट से दूर है। खुद क्रिस गेल ने लगभग डेढ़ साल से टेस्ट क्रिकेट नहीं खेला है। अगर सितारों से भरी वेस्टइंडीज टीम भारत से अपनी सरजमीं पर मुकाबला करती तो शायद इस नीरस सीरीज का मजा कुछ और ही होता।  लेकिन जिस तरह से बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच टकराव सुलझता नजर नहीं आ रहा उससे टेस्ट क्रिकेट को गहरा धक्का लग रहा है। सवाल खड़ा होता है कि इस दोहरी बैटिंग लाइन अप के साथ वेस्टइंडीज कब तक अपनी सशक्त विरासत को संभाल पाएगा।