भारतीय दर्शकों के जेहन में आज भी छलकता है हारे हुए इन मैचों का दर्द
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साल 2003 में जब टीम इंडिया विश्व कप फाइनल में पहुंची तो क्रिकेट का बुखार पूरे देश में चढ़ गया। अब क्या बूढ़ा और क्या लड़का हर कोई टीवी के सामने टकटकी लगाए भारतीय टीम को जितते देखना चाहते थे। भारत ने पूरे टूर्नामेंट में जबरदस्त खेल दिखाया और फाइनल में प्रवेश किया। लेकिन टीम इंडिया इस मैच में जीत हासिल करने में नाकामयाब रही और करोड़ों दिल उस दिन टूट गए। बहरहाल, ये पहला मौका नहीं था जब भारतीय टीम की हार पर क्रिकेट फैन्स आहत हुए बल्कि ऐसे और भी मौके आए हैं।

1. साल 2003 फाइनल:

Indian cricket fans still remember these matches which Team India lost
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साल 2003 फाइनल इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि 20 साल के लंबे इंतजार के बाद जाकर क्रिकेट के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर करने वाले देश भारत की टीम फाइनल में पहुंची थी। फाइनल मैच में भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। लेकिन उनका फैसला उस वक्त गलत साबित हुआ जब ऑस्ट्रेलिया ने रिकी पोटिंग के तेज तर्रार शतक की मदद से 50 ओवरों में 2 विकेट पर 359 रनों का स्कोर खड़ा कर दिया था। 

लेकिन इसके बावजूद भारतीय दर्शकों को सचिन पर भारी भरोसा था कि सचिन अगर चल गए तो वे अब भी मैच जीत सकते हैं। लेकिन ऐसा हुआ नहीं और सचिन ने पहले ओवर में मैक्ग्रेथ की गेंद पर चौका तो मारा लेकिन अंतिम गेंद पर वह शॉट मिसटाइम कर गए और अपना बहुमूल्य विकेट गंवा बैठे।

यहीं से भारतीय पारी का पतन आरंभ हो गया और सहवाग के अलावा कोई भी भारतीय बल्लेबाज ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों का जमकर सामना नहीं कर पाया। अंततः पूरी भारतीय टीम 39.2 ओवरों में 234 रनों पर ऑलआउट हो गई और मैच 125 रनों से हार गई। इस हार ने पूरे देश को तिलमिला दिया था।

2. साल 2007 विश्व कप में बांग्लादेश के हाथों हार:

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साल 2007 में जब भारतीय टीम वेस्टइंडीज में विश्व कप खेलने पहुंची तो भारतीय दर्शकों के जेहन में फिर से 2003 विश्व कप की तस्वीर घूम सी गई। अब भारतीय दर्शक चाहते थे कि चलो अब इस बार तो टीम इंडिया विश्व कप जीतेगी। लेकिन शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था। भारत और बांग्लादेश के बीच पोर्ट ऑफ स्पेन में मुकाबला खेला गया। भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी की।

लेकिन भारत ने अपने शुरुआती चार विकेट 72 रनों पर ही गंवा दिए। आलय ये था कि सौरव गांगुली(67) और युवराज सिंह(47) के अलावा कोई भी बल्लेबाज बांग्लादेशी गेंदबाजों का डटकर सामना नहीं कर पाया। अंततः पूरी भारतीय टीम 49.3 ओवरों में 191 रनों पर ऑलआउट हो गई।

जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी बांग्लादेश टीम के तीन बल्लेबाजों ने अर्धशतक जमाए और उन्होंने इस मैच को बड़ी आसानी से 5 विकेट से जीत लिया। इस हार ने भारतीय टीम को विश्व कप से बाहर कर लिया। भारतीय दर्शक इस हार से बुरी तरह से टूट गए क्योंकि जिस टीम से वे विश्व कप लाने की उम्मीद कर रहे थे वह अब पहले राऊंड से ही बाहर हो चुकी थी।

3. आईसीसी टी20 विश्व कप 2014 फाइनल:

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साल 2014 टी20 विश्व कप में भारत और श्रीलंका के बीच फाइनल मुकाबला खेला गया जिस तरह से टीम इंडिया ने पूरे टूर्नामेंट में प्रदर्शन किया था उससे ये साफ प्रतीत हो रहा था कि फाइनल में भी टीम इंडिया धमाल मचाएगी। लेकिन फाइनल मैच में विराट कोहली के अलावा सभी भारतीय बल्लेबाजों ने धीमी बल्लेबाजी की। पहले 10 ओवरों में भारत ने जहां 64 रन बनाए थे। वहीं जब युवराज सिंह आए तो रन रेट और भी कम हो गया।

युवराज ने इस मैच में 21 गेंदों में 11 रन बनाए थे। वहीं एम एस धोनी ने भी अंतिम ओवरों में निराश किया जब वह 7 गेंदों में 4 रन ही बना सके। सिर्फ कोहली ही इस मैच में 58 गेंदों में 77 रन बनाने में कामयाब हो पाए थे। इस तरह भारतीय टीम 20 ओवरों में 4 विकेट पर 130 रन ही बना पाई थी और श्रीलंका ने इस मैच को बड़ी आसानी से 6 विकेट से जीत लिया था। इस हार के बाद युवराज सिंह के प्रदर्शन खूब सवाल उठे थे।

4. 1996 विश्व कप फाइनल:

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साल 1996 में भारतीय सरजमीं पर दूसरी बार विश्व कप का आयोजन किया गया और इस विश्व कप में भारतीय टीम प्रबल दावेदार मानी जा रही थी, लेकिन सेमीफाइनल में भारतीय टीम की बल्लेबाजी एक दम से ढह गई और एक समय बेहद मजबूत स्थिति में नजर आ रही भारतीय बल्लेबाजी औंधे मुंह गिर पड़ी।

श्रीलंका के 252 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए एक समय भारतीय टीम का स्कोर 98 रन पर एक विकेट था वहीं पलक झपकते ही यह स्कोर 120 रनों पर 8 विकेट हो गया। सचिन तेंदुलकर (65) के आउट होने के बाद विकटों का पतझड़ शुरू हुआ और भारतीय बल्लेबाज अपने विकेट गंवाने लगे। भारतीय टीम के इस खराब प्रदर्शन से दर्शक गुस्से में लाल हो गए और उन्होंने मैच में व्यवधान डाल दिया। अंततः श्रीलंका को जीता करार दे दिया गया। विनोद कांबली का रोता हुआ चेहरा आने वाले सालों में इस मैच का चेहरा बनकर उभरा।