सचिन के शतक जड़ने पर टीम इंडिया ज्यादा हारी, जानें टीम इंडिया से जुड़े ऐसे ही झूठ
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ये किसी से छुपा नहीं है कि भारत में लोग क्रिकेट को लेकर दीवाने हैं। युवाओं के बीच क्रिकेट पर बात करना एक आम बात है। एक दौर था जब लोग क्रिकेट को लेकर बातें एक चौपाल में बैठकर करते थे। चूंकि, अब युग सोशल मीडिया का है तो ये गप्पों की बिसातें गली- नुक्कड़ से उठकर इंटरनेट पर बिछती हैं और जमकर गप्पे की जाती हैं। लेकिन इस बीच कुछ ऐसी बातों को लेकर तूल दिया जाता है जिनका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं होता। क्रिकेट के ऐसे ही कुछ झूठे किस्सों का पर्दा आज हम उठाएंगे जिसे ज्यादातर क्रिकेटप्रेमी सच मानते हैं।

1. सचिन के शतक जड़ने पर भारत ने ज्यादा हार झेली:

Indian Cricket myths that Have Been Proven Wrong
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भारतीय टीम के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को ताउम्र शतक लगाकर भारत को ना जितवा पाने को लेकर निंदा झेलनी पड़ी। लेकिन अगर तथ्यों पर नजर दौड़ाई जाए तो सचिन के द्वारा जड़े गए 49 वनडे शतकों में से 33 शतक भारत की जीत के दौरान आए हैं। वहीं जब टीम इंडिया ने मैच जीता है तो सचिन का औसत भी 56.63 का रहा है। इस तरह से ये पुराना और खोखला दावा पूरी तरह से खारिज होता है।

2. सौरव गांगुली ने भारत को एशिया के बाहर जमकर टेस्ट मैच जितवाए:

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भले ही सौरव गांगुली ने टीम इंडिया को विदेशी सरजमीं पर जीतना सिखाया होगा। लेकिन विदेशी धरती में टेस्ट मैचों में उनकी कप्तानी फुस्स रही है। सौरव गांगुली की कप्तानी में भारत ने एशिया के बाहर सिर्फ जिम्बाब्वे में साल 2005 में टेस्ट सीरीज जितवाई थी। इसके अलावा उन्होंने साल 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज 1-1 से ड्रॉ और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2003-04 में भी सीरीज ड्रॉ करवाई थी। लेकिन कभी उन्होंने जिम्बाब्वे के अलावा कोई सीरीज जितवाई नहीं।

3. भारतीय बल्लेबाज तेज गेंदबाजों को बढ़िया नहीं खेलते:

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क्रिकेट जगत में एक अफवाह ये भी है कि भारतीय बल्लेबाज स्पिनरों के खिलाफ ज्यादा बेहतर तरीके से बल्लेबाजी करते हैं, लेकिन जब बात तेज गेंदबाजों की आती है तो उन्हें उनका सामना करने में परेशानी होती है। लेकिन इसके इतर अगर भारतीय बल्लेबाजों सचिन, सहवाग, द्रविड़, लक्ष्मण या वर्तमान में कोहली, रोहित या किसी अन्य बल्लेबाज को देखें तो वे तेज गेंदबाजी को उतनी ही बेहतर तरीके से खेलते हैं।

गौर करने वाली बात ये है कि साल 2007 में युवराज सिंह ने तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड की ही गेंदों पर 6 गेंदों में 6 छक्के जड़े थे। वहीं अगर 2002 से 2010 तक की बात करें तो तेज गेंदबाजों के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों का रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है। वहीं अगर 1970-1980 के दशक की बात करें तो सुनिल गावस्कर, गुंडप्पा विश्वनाथ, दिलिप वेंगसरकर और मोहिंदर अमरनाथ स्पिन और तेज गेंदबाजों को बहुत अच्छी तरह से खेलते थे।

4. अनिल कुंबले घरेलू घूमती हुई पिचों पर ही सफल गेंदबाज थे:

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भारत में अनिल कुंबले की गेंदों को बहुत खतरनाक माना जाता था। लेकिन बहुत से लोग मानते हैं कि अनिल विदेशी पिचों पर कुछ खास नहीं थे। लेकिन इस बात की अगर तफ्तीश की जाए तो पता चलता है कि अनिल का विदेशी पिचों पर भी कोई जवाब नहीं था। साल 2003-04 में कुंबले ने 6 टेस्ट मैचों में जो उन्होंने ऑस्ट्रेलिया व पाकिस्तान में खेले थे उनमें कुल 36 विकेट लिए थे। साथ ही 2002 का इंग्लैंड का दौरा भी उनके लिए गजब रहा था। सत्य ये है कि कुंबले हमेशा ही देशी और विदेशी पिचों पर भारत के सबसे अच्छे स्पिनर रहे हैं।

5. झूठा है सहवाग का बाप- बेटा डायलॉग:

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भारतीय विस्तफोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने एक बार एक इंटरव्यू में बताया था कि एक बार जब वह दोहरे शतक के करीब पहुंच रहे थे तो शोएब अख्तर ने उन्हें हुक मारने के लिए उकसाया था। तो उन्होंने शोएब से कहा था, “दूसरे छोर पर तेरा बाप खड़ा है, उसको बोल वो मारके दिखाएगा।” सहवाग ने इसी स्टोरी में बताया था कि अगली गेंद पर सचिन ने छक्का जड़ा था और सहवाग ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा था, “बेटा- बेटा होता है, बाप- बाप होता है।”

लेकिन जब इस बात की तफ्तीश की गई तो कुछ और ही निकलकर सामने आया। सहवाग पाकिस्तान के खिलाफ चार बार 200 रनों के करीब पहुंचे हैं। जिनमें से शोएब अख्तर दो मर्तबा ही खेले हैं और सचिन ने उन दोनों मौकों पर छक्का ही नहीं मारा। इससे इस बात का खुलासा साफ तौर पर होता है।

6. युवराज ने अपने पहले वनडे में ही 84 रन मार दिए थे: यह माना जाता है कि युवराज सिंह ने अपने पहले वनडे मैच में ही ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 84 रन ठोक दए थे। लेकिन सत्य ये है कि वह युवराज का पहला मैच नहीं था बल्कि दूसरा मैच था। उन्होंने अपना पहला मैच केन्या के खिलाफ खेला था जिसमें उन्हें बल्लेबाजी करने का मौका नहीं मिला था।