Devbrat Bajpai
देवब्रत वाजपेयी क्रिकेटकंट्री हिंदी के साथ senior correspondent के पद पर कार्यरत हैं
Written by Devbrat Bajpai
Last Updated on - December 27, 2015 5:40 PM IST


भारत में क्रिकेट को लेकर लोगों में जमकर दीवानगी देखी जाती है। भारत में क्रिकेट फैन बेस अन्य क्रिकेट खेलने वाले देशों की तुलना में बहुत बड़ा है। स्टेडियम में मैच देखने के लिए टिकट की खरीदारी में जो हाय-तौबा होती है उससे तो ज्यादातर भारतीय क्रिकेटप्रेमी अच्छी तरह से वाकिफ हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में अन्य देशों के मुकाबले स्टेडियम में क्रिकेट देखने के लिए सबसे ज्यादा पैसा वसूला जाता है। भारत में क्रिकेट व्यवस्थापकों के लिए फैन उनकी आमदनी की एक और बूंद के अलावा कुछ नहीं है। वहीं खिलाड़ी के लिए फैन एक वफादार चीयरलीडर है, जिसका काम होता है कि उसकी प्रशंसा करना और उसके विपक्षी को धिक्कारना।
इंग्लैंड के क्रिकेट फैन्स भी उनके देश में क्रिकेट मैच देखने के लिए स्टेडियम में महंगी टिकट को लेकर अपनी नाराजगी समय-समय पर व्यक्त करते रहते हैं। लेकिन इंग्लैंड में भारत के मुकाबले टिकट का दाम कम है। इंग्लैंड में टिकट के ज्यादा दामों की वजह क्रिकेट स्टेडियम का छोटा होना है, जिनकी क्षमता 30,000 होती है। ऐसे में टिकट का दाम बढ़ना लाजिमी हैं। इंग्लैंड में एक टेस्ट देखने के लिए 80 पाउंड खर्च करने होते हैं जो उनकी मासिक आमदनी का 4 प्रतिशत होता है।
वहीं टेस्ट मैच देखने के लिए ऑस्ट्रेलिया में 35 डॉलर खर्च करने होते हैं जो उनकी मासिक आमदनी का 1 प्रतिशत से भी कम होता है। इस तरह से ऑस्ट्रेलिया के मुकाबले इंग्लैंड में क्रिकेट फैन्स को एक क्रिकेट मैच देखने के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है। बेहतरीन क्रिकेट स्टेडियम व सुविधाओं के साथ इतने कम पैसों में मैच देखने का मजा ऑस्ट्रेलिया के दर्शकों के लिए विश्व में सबसे बढ़िया है। हालांकि इंग्लैंड में सुविधाएं तो ऑस्ट्रेलिया जैसी ही हैं लेकिन भारत में आते ही यह कहानी बदल जााती है।
भारत में टिकट की कीमतें ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड से बहुत ज्यादा हैं। वहीं वनडे क्रिकेट मैच के टिकट तो और भी महंगे होते हैं। उदाहरण के तौर पर पिछले दिनों वानखेड़े मुंबई में दक्षिण अफ्रीका-भारत के बीच खेले गए फाइनल मैच में टिकट का दाम 1000 रुपए था, जो भारतीयों की मासिक आमदनी का 11 प्रतिशत है।
यही कहानी आईपीएल की है। भले ही आईपीएल विश्व की सफलतम क्रिकेट लीग हो लेकिन क्रिकेट मैदान में जाकर मैच देखने के हिसाब से यह टूर्नामेंट दर्शकों के लिए महंगा है भले ही बिजनेस एक्जीक्यूटिव और सेलीब्रिटियों को हॉस्पिटलिटी बॉक्सेस में टिकट फ्री में मिल जाते हों लेकिन इस टूर्नामेंट का सबसे सस्ता टिकट 600 रुपए का होता है। जो भारतीयों की मासिक आमदनी का 7 प्रतिशत है। इस मामले में फिर से ऑस्ट्रेलियाई फैन आगे हैं, क्योंकि उन्हें बिग बैश लीग गेम में टिकट के लिए मात्र 20 डॉलर खर्च करने होते हैं।
अगर टिकट के दाम को ना भी गिने, लेकिन सोचिए कि इतने महंगे टिकट के बदले में आपको क्या दिया जा रहा है। सबसे दुख की बात यह है कि जब स्टेडियम में व्यवस्थाओं की बात आती है तो भारतीय फैन्स को यहां पर बुरी तरह से निराश होना पड़ता है। हालांकि ऐसा कहना गलत होगा कि इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में लोगों को मैच देखने के दौरान परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता बल्कि करना पड़ता है। लेकिन भारतीय स्टेडियमों की तरह वहां की हालत खराब नहीं है।
आमतौर पर, यहां के स्टेडियमों में बढ़िया आयोजन और रखरखाव होता है ताकि दर्शक पूरे मजे से मैच को देख सकें और आनंद उठा सकें। साथ ही यहां का प्रबंधकीय विभाग, सिक्युरिटी लोगों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। पिछले कुछ सालों में विकलांग दर्शकों के लिए व्यवस्थाएं जमाने के लिए भी यहां कई सुधार किए गए हैं। पिछले 20-30 सालों से अगर आज की तुलना करें तो इंग्लिश व ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट ग्राउंड लोगों के लिए व्यवस्थाओं के हिसाब से और भी बेहतर हुए हैं।
लेकिन भारतीय फैन्स के लिए यह विडंबना है की वे ऑस्ट्रेलियाई व इंग्लैंड के फैन्स से ज्यादा टिकट पर पैसा खर्च करते हैं लेकिन व्यवस्थाओं के नाम पर उन्हें ठेंगा दिखा दिया जाता है। यहां सबसे कठिन काम है टिकट की खरीदारी का पता लगाना। ऑनलाइन सेल्स का कोई ठिकाना नहीं रहता और यह अविश्वसनीय भी है। वहीं अगर आप डायरेक्ट स्टेडियम काउंटर से जाकर टिकट खरीदते हैं तो टिकट खरीदने की बजाय सिर्फ टिकट खरीदने के बारे में सोच सकते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण हैं कि जिन स्थानीय एसोसिएशन्स को टिकट बेचने की जिम्मेदारी दी जाती है वह टिकट के बेचने के लिए प्रभावपूर्ण तरीके से विज्ञापित नहीं कर पाते।
वहीं जब मैदान में अंदर जाने के बारी आती है तो दर्शकों को लाइन में लगकर भीतर जाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। जहां बाद में उन्हें भेड़ों की तरह भीतर सात से आठ घंटों के लिए घुसेड़ दिया जाता है। भारत के कई मैदानों में शेड की व्यवस्थाएं भी नहीं हैं जिसकी वजह से कई बार दर्शकों को धूप में भी झुलसना पड़ता है। वहीं इन मैदानों में टॉयलेट की सुविधाएं या तो बहुत कम हैं या है ही नहीं। भारत के मैदानों में क्रिकेट मैच देखने आए एक आम फैन के साथ एक पैसा देकर मैच देखने वाले उपभोक्ता की तरह नही बल्कि एक संभावित उपद्रवी के रूप में व्यवहार किया जाता है।
टीवी में मैच देखने का भारतीय दर्शकों का अनुभव सबसे बढ़िया : अंतरराष्ट्रीय मैचों में भले ही दर्शकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन घरेलू मैचों में इन तीनों देशों के दर्शकों को खुली आजादी है। इंग्लैंड में पूरे साल में घरेलू मैच देखने के लिए आपको 200 पाउंड खर्च करने होते हैं और आप साल में होने वाले सभी घरेलू मैचों का आनंद उठा सकते हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया में शेफील्ड शील्ड गेम में मैच देखने लिए 5 डॉलर खर्च करने होते हैं। वहीं भारत में रणजी मैच देखना पूर्णतः फ्री है।
भले ही क्रिकेट स्टेडियमों में मैच देखने को लेकर खूब प्रचार प्रसार किया जाता हो लेकिन अधिकतर लोग टीवी में मैच देखना पसंद करते हैं। लेकिन टीवी में मैच देखने के मामले में इंग्लैंड के क्रिकेट फैन्स के हाथों निराशा आती है। आज से 10 साल पहले इंग्लैंड में टीवी में मैच देखना फ्री टू एयर था, लेकिन बाद के सालों में ब्रॉडकास्ट राइट टू स्काई ने इंग्लिश फैन्स का मैच देखने का अनुभव लगभग बिगाड़कर रख दिया। इस तरह इंग्लैंड में फैन्स को टीवी में मैच देखने के लिए सालाना 600 पाउंड चुकाने होते हैं। यह कीमत हर महीने स्टेडियम में जाकर एक क्रिकेट मैच देखने के बराबर है। यह दाम कई लोगों की पॉकेट के बाहर है।
लेकिन इस मामले में भारत के दर्शक अच्छी स्थिति में हैं। यहां सेटेलाइट टेलीवीजन और केबल नेटवर्क के चलते स्पोर्ट्स पैकेज सस्ते हैं और दर्शक मैचों को बिना किसी तकलीफ के इन्जॉय करते हैं। यही हाल ऑस्ट्रेलिया में है जहां चैनल 9 घरेलू पिचों पर होने वाले मैचों को फ्री टू एयर ब्रॉडकास्ट करता है। इसके अलावा क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया शेफील्ड शील्ड मैचों की फ्री ऑनलाइन कवरेज उपलब्ध करवाता है।
लेकिन इन सबके अलावा सबसे बड़ा सवाल भारत में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मैचों में दर्शकों की व्यवस्थाओं को लेकर है। दुनिया के सबसे अमीर बोर्डों में से एक बीसीसीआई ने पिछले सालों में क्रिकेट में खूब पैसा कमाया है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर बीसीसीआई ने कुछ भी नहीं किया है। बीसीसीआई को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful.
Strictly Necessary Cookie should be enabled at all times so that we can save your preferences for cookie settings.
If you disable this cookie, we will not be able to save your preferences. This means that every time you visit this website you will need to enable or disable cookies again.
