एमएस धोनी और सुरेश रैना
एमएस धोनी और सुरेश रैना

भारत में क्रिकेट सबसे चर्चित खेल है। इस खेल को हर वर्ग के लोग खेलते हैं और खिलाड़ियों की प्रतिभा के आधार पर उन्हें राष्ट्रीय टीम में खेलने का मौका मिलता है। चूंकि शिक्षा आजकल हर क्षेत्र में जरूरी हो गई है। लेकिन क्रिकेट को लेकर लोगों की धारणा होती है कि इस खेल के खिलाड़ी ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं होते। लेकिन पिछले कुछ दशकों में कई उच्च डिग्रीधारी क्रिकेटरों ने भी भारतीय टीम को अपनी सेवाएं दीं जिनके दम पर भारतीय टीम ने नई ऊंचाईयों को अपने नाम किया। तो आइए नजर डालते हैं इन हाइली-क्वालीफाइड क्रिकेटरों पर।

1. अनिल कुंबले: साल 1970 में बैंगलुरू में जन्में अनिल कुंबले ने अपनी लेग स्पिन के प्रभाव में विपक्षी बल्लेबाजों को हथियार डालने के लिए कई बार मजबूर किया। भारत की तरफ से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले कुंबले ने अपने क्रिकेट करियर के अंत में भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी भी की। क्रिकेट मैदान के अलावा कुंबले पढ़ाई में भी अच्छे रहे।

उन्होंने प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज एजुकेशन बासावानागुड़ी से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने आरवीसीई कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री की। कुंबले इस तरह से टेक्निकल रूप से इंजीनियर बन गए थे। इसी बीच उन्होंने साल 1989 में भारतीय टीम में पर्दापण किया और भारतीय टीम को पूरे 21 साल तक सेवाएं दीं । कुंबले साल 2010 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायर हो गए। कुंबले भारत के एकमात्र क्रिकेटर हैं जिन्होंने टेस्ट मैच की एक पारी में 10 विकेट लिए। [ये भी पढ़ें: जब मैदान पर विराट कोहली नहीं रोक पाए आंसू]

2. जवागल श्रीनाथ: 31 अगस्त 1969 को कर्नाटक में जन्में जवागल श्रीनाथ भारतीय टीम के पूर्व तेज गेंदबाज हैं अब वह आईसीसी के मैच रैफरी हैं। अपने समय के बेहतरीन तेज गेंदबाज श्रीनाथ वनडे क्रिकेट में 300 से अधिक विकेट लेने वाले भारत के एकमात्र तेज गेंदबाज हैं। श्रीनाथ ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पर्दापण साल 1991 में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध किया था। उन्होंने अपना अंतिम एकदिवसीय मैच भी ऑस्ट्रेलिया के ही खिलाफ साल 2003 में खेला। श्रीनाथ एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं उन्होंने क्रिकेट में आने से पहले मैसूर से इंस्ट्रुमेंटल इंजीनियरिंग में बैचलर इन इंजीनियरिंग डिग्री हासिल की थी।

3. राहुल द्रविड़: भारतीय टीम के श्रीमान भरोसेमंद राहुल द्रविड़ को उनकी बेहतरीन बल्लेबाजी तकनीकि के कारण उन्हें लोग “द वॉल” कहा करते थे। अपने करियर के उत्तरार्ध में टीम के कप्तान रहे द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी 1973, कर्नाटक में हुआ। द्रविड़ ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर की शुरुआत 1996 में की और वह भारतीय टीम की ओर से 16 साल तक खेले।

द्रविड़ ने साल 2012 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया। द्रविड़ की स्कूलिंग बैंगलोर के एक जाने माने सेंट जोसेफ बॉयज हाईस्कूल से हुई। बाद में उन्होंने बैंगलोर के सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ कॉमर्श से कॉमर्श में डिग्री हासिल की। जब वह सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन से एमबीए की पढ़ाई कर रहे थे तभी उनका चयन भारतीय टीम के लिए हो गया।

4. वीवीएस लक्ष्मण: भारतीय टीम के स्टायलिश बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण को उनकी कलाईयों के बेहतरीन इस्तेमाल के लिए जाना जाता है। लक्ष्मण का पूरा नाम वेंगीपुरापु वेंकटा साईं लक्ष्मण है। 1 नवंबर 1974 को हैदराबाद में जन्में लक्ष्मण ने टेस्ट पर्दापण दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ साल 1996 में किया। उन्होंने साल 2006 में ही अपना अंतिम एकदिवसीय मैच भी दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ही खेला। लक्ष्मण की स्कूलिंग हैदराबाद के लिटिल फ्लावर हाई स्कूल से हुई। 10+2 करने के बाद लक्ष्मण ने डॉक्टर बनने के लिए एक मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले लिया, लेकिन इस बीच उन्होंने दवाईयों के करियर को अलविदा कहते हुए क्रिकेट का दामन थाम लिया और आने वाले सालों में भारत के महान क्रिकेटर के रूप में उभरे।

5. रविचंद्रन अश्विन: वर्तमान समय में भारतीय टीम के सबसे बेहतरीन स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का जन्म 17 सितंबर 1986 को तमिलनाडु राज्य में हुआ। साल 2011 में अपने एकदिवसीय करियर की शुरुआत करने वाले अश्विन ने अपना पहला मैच साल 2011 में वेस्टइंडीज के विरुद्ध खेला था। अश्विन ने क्रिकेटर बनने से पहले इंन्फॉरमेशन टेक्नॉलजी में बीटेक डिग्री चेन्नई के जाने माने कॉलेज से पास की है। लेकिन अंत में उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़ क्रिकेट में करियर बनाने का निर्णय लिया।

6. अजिंक्य रहाणे: 6 जून 1988 को जन्में रहाणे ने भारतीय टीम की ओर से टेस्ट क्रिकेट में साल 2013 में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध पदार्पण किया। पढ़ाई लिखाई में भी रहाणे बढ़िया रहे हैं और उनके पास बी. कॉम की डिग्री है। रहाणे वर्तमान में टीम इंडिया के सबसे स्टाइलिश खिलाड़ियों में से एक हैं।

7. सुरेश रैना: 27 नवंबर 1986 को उत्तरप्रदेश में जन्में सुरेश रैना ने साल 2005 में भारतीय टीम की ओर से श्रीलंका के खिलाफ पदार्पण किया था। रैना ग्रेजुएट हैं और उनके पास बी. कॉम डिग्री है। रैना बाएं हाथ के आक्रामक बल्लेबाज हैं और साथ ही वे आईपीएल में गुजरात लायंस टीम के कप्तान भी हैं।

8. एमएस धोनी: क्रिकेटर बनने के बाद एमएस धोनी ने रांची के सिटी कॉलेज में बी कॉम की डिग्री के एडमीशन लिया था। लेकिन साल 2013 में बिजी शेड्यूल के कारण वह परीक्षा नहीं दे पाए थे। इसलिए इस साल वह फेल हो गए थे। बाद के सालों में एमएस धोनी ने परीक्षा दी और बी. कॉम पास करने के साथ ग्रेजुएट पास हो गए।

9. विराट कोहली: विराट कोहली दिल्ली के विश्व भारती एंड सेवियर कॉन्वेन्ट स्कूल से पढ़े हुए हैं। कोहली बचपन से ही सचिन तेंदुलकर की ही तरह एक बेहतरीन क्रिकेटर बनना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने अपना खूब पसीना बहाया। यही कारण रहा कि वह सिर्फ 12वीं तक पढ़ाई कर पाए। बहरहाल, अभी कोहली के पास समय है और वह ग्रेजुएशन कम से कम डिस्टेंस से तो कर ही सकते हैं। एम एस धोनी ने डिस्टेंस से पढ़ाई करके ही एक बार फेल हो जाने के बाद बी कॉम पास किया था।

10. शिखर धवन: दिल्ली के रहने वाले शिखर धवन भी 12वीं तक पढ़े हुए हैं और वह कभी कॉलेज नहीं गए। शिखर दिल्ली के जाने माने स्कूल St. Mark’s Senior Secondary Public School से पढ़े हुए हैं। शिखर टीम इंडिया में आने से पहले आईपीएल में खूब चमके थे और यहीं से उन्होंने टीम इंडिया में आने का रास्ता अख्तियार कर लिया था। जाहिर है कि खेल के दबाव के कारण शिखर को भी कॉलेज जाने का कभी मौका नहीं मिला।

11. युवराज सिंह: भारतीय टीम के बेहतरीन क्रिकेटरों में से एक युवराज सिंह ने साल 2000 में जब वह 21 साल के थे तब उन्होंने डेब्यू किया था। युवराज के पिता योगराज सिंह भी पूर्व क्रिकेटर हैं और वह हमेशा से युवराज को क्रिकेटर बनते देखना चाहते थे जिसके लिए युवराज से जमकर मेहनत भी की। लेकिन इस दौरान वह पढ़ाई में मन नहीं लगा सके और सिर्फ 12वीं पास कर पाए। युवराज चंडीगढ़ के डीएवी स्कूल से पढ़े हुए हैं।

12. जहीर खान: जहीर खान अपने स्कूल के समय में एक अच्छे स्टूडेंट थे। 12वीं अच्छों अंकों के साथ पास करने के बाद जहीर ने इंजीनियरिंग के लिए एडमीशन लिया। लेकिन क्रिकेट खेल के प्यार ने उन्हें अपनी ओर खीच लिया और वह इंजीनियरिंग को पीछे छोड़कर क्रिकेट में हाथ आजमाने में व्यस्त हो गए। अंततः जहीर सिर्फ 12वीं पास रह गए। जहीर खान भारतीय टीम के लिए एक दशक से ज्यादा समय के लिए क्रिकेट खेले औरइस दौरान वह टीम इंडिया के स्टार गेंदबाज रहे। साल 2011 के विश्व कप फाइनल में जहीर ने शुरुआती 3 ओवर मेडन फेके थे। यहीं से टीम इंडिया ने मैच में पकड़ बना ली थी।