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भारतीय टेस्ट टीम के पूर्व खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग, राहुल द्रविड़ और महेंद्र सिंह धोनी © Getty Images

भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जा रही है। सीरीज का पहला मैच राजकोट में खेला जा रहा है। भारत और इंग्लैंड की टीमें जब भिड़ती हैं तो रोमांच अपने चरम पर होता है और दर्शकों की उतसुक्ता मैच को लेकर बहुत ज्यादा होती है। दोनों देशों के बीच क्रिकेट का इतिहास काफी लंबा और पुराना है। वैसे तो इंग्लैंड और भारत के बीच टैस्ट मैचों में कई रिकॉर्ड बने हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे रिकॉर्ड के बारे में बताएंगे। जिसके बारे में शायद ही आप जानते होंगे। जी हां, आज हम आपको बताएंगे भारतीय टीम के उन बल्लेबाजों के बारे में जिन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ दोहरे शतक लगाए हैं। तो आइए जानते हैं ऐसे ही बल्लेबाजों के बारे में जिन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ दोहरा शतक लगाया है।

6. नवाब पटौदी: साल 1964 में इंग्लैंड की टीम भारत दौरे पर थी। चौथे टेस्ट में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। भारत ने अपनी पहली पारी में 344 रन बनाए। जबकि इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी में 451 रनों का स्कोर बना डाला। दूसरी पारी में भारत के बल्लेबाज ने इतिहास रच दिया और नवाब पटौदी ने अपनी शानदार बल्लेबाजी के दम पर अपना दोहरा शतक पूरा किया। पटौदी ने मैच में 23 चौकों और दो छक्कों की मदद से नाबाद 203 रन बनाए। हालांकि मैच का कोई नतीजा नहीं निकल सका और मुकाबला ड्रॉ रहा। लेकिन पटौदी ने इतिहास रच दिया था। भारत बनाम इंग्लैंड, पहला टेस्ट: लाइव ब्लॉग देखने के लिए क्लिक करें

5. चेतेश्वर पुजारा: साल 2012 में इंग्लैंड की टीम भारत दौरे पर थी। सीरीज के पहले मैच में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। भारत की शुरुआत बेहद अच्छी रही और गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग ने पहले विकेट के लिए 134 रन जोड़े। इसके बाद बल्लेबाजी करने आए चेतेश्वर पुजारा ने सहवाग के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाया। इसी बीच सहवाग ने अपना शतक पूरा कर लिया। लेकिन शथक पूरा करने के बाद सहवाग आउट हो गए। लेकिन पुजारा उस दिन कुछ और ही सोचकर आए थे। पुजारा ने अंग्रेज गेंदबाजों की जमकर खबर लेते हुए किसी गेंदबाज को नहीं बख्शा। पुजारा ने शानदार बल्लेबाजी का मुजाहिरा पेश करते हुए 389 गेंदों पर 206 रन बनाए। पुजारा ने अपनी पारी में 21 चौके ओर कोई छक्की नहीं लगाया। पुजारा की पारी की बदौलत भारत ने उस मैच को 9 विकेट से अपने नाम किया था।

4. राहुल द्रविड़: साल 2002 में इंग्लैंड भारत दौरे पर थी। सीरीज के चौथे मैच में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। इंग्लैंड ने माइकल वॉन के 195 रनों की मदद से पहला पारी में शानदार 515 रन बनाए। जवाब में बड़े स्कोर का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने राहुल द्रविड़ के शानदार दोहरे शतक की मदद से 508 रन बनाए। रादुल द्रविड़ जब बल्लेबाजी के लिए उतरे तो भारत की स्थिति खराब थी। लेकिन द्रविड़ ने धैर्य का परिचय देते हुए संयम से बल्लेबाजी की और एक छोर पर डट गए। राहुल को आउट करने के लिए हर गेंदबाज ने अपना दम लगा दिया लेकिन राहुल को आउट नहीं कर सके। राहुल द्रविड़ ने 468 गेंदों में 217 रन बना डाले। राहुल ने अपनी पारी में 28 चौके और कोई छक्का नहीं लगाया। भारत और इंग्लैंड के बीच यह मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ था।

3. सुनील गावस्कर: साल 1979 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत सीरीज हार चुका था। चौथे टेस्ट में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। इंग्लैंड ने पहली पारी में 305 रन बनाए। भारत की पहली पारी मात्र 202 पर सिमट गई और इंग्लैंड ने पहली पारी के आधार पर अच्छी-खासी बढ़त हासिल कर ली। दूसरी पारी में इंग्लैंड ने 334 रन बनाए और अपनी बढ़त को और मजबूत कर लिया। भारत मैच बचाने के लिए केल रहा था। और ऐसे में ये जिम्मेदारी उठाई सुनील गावस्कर ने। गावस्कर ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए इंग्लैंड टीम के दांत खट्टे कर दिए। गावस्कर ने अपनी पारी में 443 गेंदों में 221 रन बनाए और 21 चौके जड़े। गावस्कर की पारी की बदौलत भारत उस टेस्ट को हारने से बच गया था और मैच को ड्रॉ कराने में सफल हुआ था। जो रूट ने अपने करियर का 11वां शतक लगाया

2. गुंडप्पा विश्वनाथ: साल 1982 में इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के पांचवें मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 481 रन बनाए। भारत की पारी में जो सबसे दिलचस्प था वो था विश्वनाथ की बल्लेबाजी। विश्वनाथ ने लाजवाब बल्लेबाजी का नमूना पेश करते हुए 374 गेंदों में 222 रन बनाए। विश्वनाथ ने 31 चौके और कोई छक्का नहीं लगाया। विश्वनाथ ने भारत की पारी में अहम योगदान दिया और मैच में भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। विश्वनाथ की बल्लेबाजी के सामने इंग्लैंडे के सभी गेंदबाज पस्त पड़ चुके थे और किसी को भी समझ नहीं आ रहा था कि विश्वनाथ को कैसे आउट किया जाए। अंत में 222 के निजी स्कोर पर विल्स ने विश्वनाथ को बोल्ड आउट कर दिया था। भारत और इंग्लैंड के बीच यह मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ था।

1. विनोद कांबली: साल 1993 में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 347 रन बनाए। जवाब में भारत ने पहली पारी में 591 रन बनाए और मैच को एक पारी और 15 रनों से अपने नाम किया। भारती की पारी में विनोद कांबली ने बेहतरीन खेल दिखाया और दोहरी शतक जड़ा। कांबली ने 411 गेंदों में 224 रन बनाए और पारी में 23 चौके जड़े। विनोद कांबली के सामने हर गेंदबाज पानी भरता नजर आया और कांबली को आउट करने में हर गेंदबाज विफल रहा। कांबली की पारी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ भारी अंतर से जीत करने में कामयाबी पाई।