भारतीय टीम का मिडिल ऑर्डर चिंता का सबब है © Getty Images
भारतीय टीम का मिडिल ऑर्डर चिंता का सबब है © Getty Images

इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के शुरू होने में अब चंद ही दिन बचे हैं और भारतीय टीम तैयार है अपने टेस्ट प्रदर्शन को वनडे में भी दोहराने के लिए। लेकिन वनडे में टीम के सामने चुनौती आसान नहीं रहेगी। क्योंकि टीम के कई खिलाड़ी ऐसे हैं जो टेस्ट में नहीं थे। लेकिन इन सबके इतर भारतीय टीम विराट कोहली पर कुछ ज्यादा ही निर्भर रही है और कई मौकों पर देखा गया है कि कोहली के आउट होने के बाद भारतीय टीम का मध्यक्रम लड़खड़ाता रहा है। ऐसे में भारतीय टीम के सामने चुनौती है कि टीम के मध्यक्रम का पालनहार कौन होगा। कौन संभालेगा टीम के चरमराते मध्यक्रम की जिम्मेदारी। तो आइए जानते हैं।

सबसे पहले आपको बताते हैं कि भारतीय टीम ने साल 2016 में कुल 13 वनडे मैच खेले जिनमें भारत को 7 में जीत और 6 में हार का मुंह देखना पड़ा। वहीं इनमें अगर हम जिम्बाब्वे के खिलाफ 3 मैचों को हटा दें तो भारत का रिकॉर्ड 10 मैचों में 4 जीत और 6 हार का हो जाता है। इन 10 मैचों में से भारत ने पांच मैचों की वनडे सीरीज ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ और पांच मैचों की वनडे सीरीज न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली। इस दौरान भारत को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में 4-1 से हार का सामना करना पड़ा तो न्यूजीलैंड के खिलाफ टीम को 3-2 से जीत मिली। इन दोनों ही सीरीज में देखने को मिला कि जिस मैच में कोहली का प्रदर्शन खराब रहा उस मैच में भारत को हार का सामना करना पड़ा या फिर कोहली के आउट होते ही भारतीय मध्यक्रम लड़खड़ा गया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले वनडे में विराट कोहली ने 91 रनों की पारी खेली थी लेकिन उनके आउट होते ही भारतीय पारी लड़खड़ा गई और टीम मैच हार गई। वहीं दूसरे मुकाबले में भी कोहली ने 59 रनों की पारी खेली और जैसे ही कोहली आउट हुए वैसे ही एक बार फिर से टीम का मध्यक्रम ढह गया और टीम फिर से हार गई। यही कहानी तीसरे और चौथे वनडे की भी रही।

वहीं न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज की बात करें तो भारत ने पहले मैच में तब जीत हासिल की जब कोहली ने नाबाद 85 रनों की पारी खेली। वहीं दूसरे मैच में कोहली जल्द आउट हो गए तो टीम का मध्यक्रम एक बार फिर से दबाव के बोझ तले दब गया और टीम को हार का मुंह देखना पड़ा। तीसरे मैच में भारत ने जीत हासिल की, लेकिन इस बार फिर से कोहली ने नाबाद 154 रनों की पारी खेली। कोहली का बल्ला चौथे मैच में खामोश रहा तो भारत को फिर से हार का सामना करना पड़ा। ये भी पढ़ें: भारत बनाम इंग्लैंड वनडे सीरीज के खास होने की 5 बड़ी बातें

साल 2016 में साफ देखा गया कि भारतीय बल्लेबाजी क्रम कोहली के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा और कोहली के आउट होते ही मध्यक्रम लड़खड़ा गया। ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय टीम में ये जिम्मेदारी कौन उठाएगा। टीम के मध्यक्रम की बात करें तो चयनकर्ताओं ने महेंद्र सिंह धोनी, युवराज सिंह, मनीष पांडे, हार्दिक पांड्या को टीम में शामिल किया गया है। लेकिन धोनी, पांड्या और मनीष पांडे का प्रदर्शन पिछली सीरीज में कुछ खास नहीं रहा है। वहीं युवराज विश्वस्तरीय गेंदबाजी के सामने बौने ही साबित हुए हैं। यही कारण था कि वह 2013 में टीम से बाहर कर दिए गए थे। आइए आपको इन सबके रिकॉर्डों के बारे में व्यक्तिगत जानकारी देते हैं।

1. महेंद्र सिंह धोनी: साल 2016 में टीम के कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी का बल्ला सालभर खामोश रहा और वह रन बनाने के लिए तरसते नजर आए। धोनी ने पिछले साल सिर्फ एक ही अर्धशतक लगाया। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर धोनी ने 18, 11, 23, 0, 34 रन बनाए तो जिम्बाब्वे दौरे पर उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। इसके बाद कीवी टीम के खिलाफ धोनी ने 21, 39, 80, 11 और 41 रन बनाए। इस दौरान धोनी अपने बल्लेबाजी क्रम को लेकर भी बहुत भ्रमित रहे। कभी फिनिशर की भूमिका निभाने वाले धोनी चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए इच्छुक नजर आने लगे और कहा कि अव वह इसी नंबर पर खेलते नजर आएंगे। लेकिन धोनी ने मध्यक्रम में भारत के लिए हाल-फिलहाल कुछ खास नहीं किया है। ऐसे में अब सिर्फ विकेटरीपर बल्लेबाज की भूमिका निभा रहे धोनी के ऊपर मध्यक्रम को मजबूती देने का दबाव होगा।

2. युवराज सिंह: भारतीय टीम में 3 साल बाद वापसी करने वाले स्टार खिलाड़ी युवराज सिंह के लिए चुनौती आसान नहीं रहेगी। क्योंकि इंग्लैंड के गेंदबाजों को युवराज की हर कमजोरी का पता है। साथ ही युवराज के बारे में ये भी कहा जाता रहा है कि वह विश्वस्तरीय गेंदबाजी के सामने हथियार डाल देते हैं। युवराज को जब साल 2013 में टीम से बाहर किया गया था तो उन्होंने 18 मैचों में 19 की बेहद मामूली औसत के साथ सिर्फ 276 रन ही बनाए थे। युवराज का सर्वोच्च सिर्फ 61 रन रहा था और उन्होंने मात्र 2 अर्धशतक लगाए थे। इसके अलावा युवराज ने साल 2013 में 18 में से 16 मुकाबले भारत में ही खेले थे।

वहीं अगर टी20 की बात करें तो साल 2016 में युवराज ने टी20 मैचों में भी इतना प्रभावशाली प्रदर्शन नहीं किया है कि उनपर भरोसा किया जा सके। युवराज ने 2016 में खेले गए 15 मैचों में 20 के घटिया औसत के साथ सिर्फ 166 रन ही बनाए। इस दौरान उनके नाम कोई शतक और ना ही कोई अर्धशतक रहा। युवराज का स्ट्राइक रेट सिर्फ 104 का ही रहा। ऐसे में युवराज के लिए इंग्लैंड के गेंदबाजों के सामने खुद को झाल पाना वाकई मुश्किल होगा। इसके साथ ही भारत के मध्यक्रम में अपनी उपयोगिता साबित करना भी एक चुनौती होगी।

3. मनीष पांडे: आईपीएल में बेहतरीन खेल दिखाने वाले मनीष पांडे को जब भारतीय टीम में शामिल किया गया तो भारत को उनसे बहुत उम्मीदें थीं। लेकिन अभी तक वो उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। 2016 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उन्हें ज्यादा बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला और जिन दो मैचों में उन्हें खेलने का मौका मिला उसमें उन्होंने 6 और नाबाद 104 रनों की पारी खेली। इसके बाज जिम्बाब्वे दौरे पर भी उन्हें सिर्फ एक पारी में ही खेलने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने नाबाद 4 रन बनाए। लेकिन इसके बाद न्यूजीलैंडे के खिलाफ उन्हें बल्लेबाजी का पूरा मौका मिला। लेकिन इस बार वह लगातार फ्लॉप रहे और कोई छाप नहीं छोड़ सके। कीवी टीम के खिलाफ खेले गए मुकाबलों में उन्होंने 17, 19, 28*, 12 और 0 का स्कोर किया। साफ है पांडे ने अपने नाम के अनुरूप खेल नहीं दिखाया और लगातार खराब खेला। ऐसे में मध्यक्रम में उनका रन ना बनाना टीम के लिए चिंताजनक है। ये भी पढ़ें: युवराज सिंह को वनडे टीम में चुनना चयनकर्ताओं का एक कमजोर फैसला

4. हार्दिक पांड्या: अपने पहले ही मैच में मैन ऑफ द मैच का खिताब पाने वाले हार्दिक पांड्या बल्लेबाजी में उतने प्रभावशाली नहीं रहे जितना की उनसे उम्मीद की जा रही थी। पांड्या ने चार मैचों में 22 की मामूली औसत के साथ सिर्फ 45 रन ही बनाए और इस दौरान उनका सर्वोच्च स्कोर 36 रन रहा। न्यूजीलैंड के खिलाफ दो मैचों में जब पांड्या बल्लेबाजी कर रहे थे तो मैच बेहद ही रोमांचक मोड़ पर था लेकिन उस समय पांड्या उस दबाव को झेल नहीं सके और टीम को बीच मझधार छोड़ वापस पवेलियन लौट गए। कह सकते हैं कि पांड्या को अभी काफी कुछ सीखने की जरूरत है और वनडे में आप हर गेंद पर चौके-छक्के नहीं लगा सकते। ऐसे में पांड्या को अगर मध्यक्रम में भारत की टीम में अपनी जगह पक्की करनी है तो उन्हें बल्लेबाजी में ध्यान देना होगा।