आखिरकार आईपीएल-10 से कोलकाता नाइट राइडर्स की भी विदाई हो गई। क्वालीफायर-2 में मुंबई इंडियंस के हाथों 6 विकेट से शिकस्त झेलने के बाद कोलकाता के सफर पर रोक लग गई। मुंबई के खिलाफ मुकाबले में कोलकाता की तरफ से ना ‘कोरबो दिखा’ और ‘ना लोड़बो’ दिखा जिसकी वजह से टीम को ‘जीतबो रे’ हासिल नहीं हो सका। प्वॉइंट्स टेबल में कोलकाता ने 14 मैचों में 8 जीत और 6 हार के साथ चौथे पायदान पर अपना सफर खत्म किया था। टीम ने प्लेऑफ में भी जगह बना ली थी। एलिमिनेटर में टीम ने हैदराबाद को हराकर दूसरे क्वालीफायर में जगह बनाई जहां उसका सामना मुंबई से होना था, लेकिन मुंबई ने कोलकाता को चारों खाने चित कर दिया और कोलकाता के सफर पर ब्रेक लग गया। आखिर कोलकाता के आईपीएल से बाहर होने की क्या वजह रहीं, आइए जानते हैं। ये भी पढ़ें: आईपीएल से बाहर होने के बाद छलका गौतम का ‘गंभीर’ दर्द!

शुरुआत में ‘हिट’ तो बाद में ‘पिट’ गई टीम: कोलकाता ने टूर्नामेंट का आगाज बेहतरीन तरीके से किया था, लेकिन टूर्नामेंट के अंतिम पड़ाव में टीम के प्रदर्शन में गिरावट देखी गई। प्लेऑफ से पहले टीम के प्रदर्शन पर नजर डालें तो टीम को आखिरी 5 में से 4 मुकाबले हारने पड़े। इस दौरान टीम ने एक बार भी 170 के आंकड़े को नहीं छुआ। साफ है जब टूर्नामेंट अंतिम और अहम पड़ाव पर था, तभी टीम की लय खोती नजर आई और टीम को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।

कोलकाता नाइट राइडर्स © IANS
कोलकाता नाइट राइडर्स © IANS

सुनील नरेन से लगातार ओपनिंग कराना: टीम के लिए सुनील नरेन से लगातार ओपनिंग कराना महंगा साबित हुआ। नरेन के भले ही ओपनिंग करते हुए आईपीएल इतिहास में सबसे तेज अर्धशतक लगाने के रिकॉर्ड की बराबरी की हो, लेकिन वो निरंतर अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रहे और इसका असर उनकी गेंदबाजी में भी देखने को मिला। इक्का-दुक्का मौकों को छोड़ दिया जाए तो नरेन ने कुछ खास प्रदर्शन नहीं किया। नरेन के आखिरी 10 मैचों के प्रदर्शन पर गौर करें तो उन्होंने (34, 16, 4, 1, 0, 54, 18, 0, 10) रन बनाए। इस दौरान एलिमिनेटर में उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला था। ऐसा नहीं है कि नरेन सिर्फ बल्लेबाजी में ही फ्लॉप रहे, बल्कि बल्लेबाज बनने की कोशिश में उनके गेंदबाजी आंकड़े भी खराब होते चले गए। आखिरी 9 मैचों में से 5 में नरेन एक विकेट भी हासिल नहीं कर सके। इस दौरान वो 3 बार 1-1 विकेट ले सके और एक मौके पर उन्होंने 2 खिलाड़ियों को आउट किया। ये भी पढ़ें: संजीव गोयनका ने कहा, एमएस धोनी से एक कदम आगे हैं स्मिथ

जरूरत के वक्त ‘तिकड़ी’ का खामोश रहना: टीम के पास अगर दुनिया के सबसे विस्फोटक बल्लेबाज हों, तो फिर टीम के लिए राह आसान हो जाती है। कोलकाता के पास लिन, उथप्पा, गंभीर के रूप में तीन बेहतरीन बल्लेबाज थे, तीनों ने कई मैचों में अपने दम पर मैच भी जितवाए, लेकिन जब जब टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी तब ही इनका बल्ला खामोश हो गया और टीम को आईपीएल से बाहर होना पड़ा। आखिरी 4 मैचों में तीनों ही बल्लेबाजों के प्रदर्शन में गिरावट देखी गई। लिन ने आखिरी 4 मैचों में (4, 6, 26, 84) रन बनाए। तो वहीं उथप्पा ने इस दौरान (1, 1, 2, 0) का ही स्कोर किया। इसके अलावा कप्तान गंभीर ने भी (12, 32*, 21, 8) का स्कोर ही किया। साफ है जब टूर्नामेंट सबसे अहम पड़ाव पर था तब टीम के सबसे अहम बल्लेबाजों के बल्ले को सांप सूंघ गया और जिसका खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा।