कहीं लूट तो नहीं रहा आईपीएल?
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लीगों की बात करें तो यह कभी फुटबॉल का हिस्सा हुआ करती थी। लेकिन टी20 क्रिकेट के आने के बाद क्रिकेट में भी लीग के प्रचलन को बढ़ावा दिया गया। आखिरकार साल 2008 में बीसीसीआई ने आधिकारिक रूप से आईपीएल( इंडियन प्रीमियर लीग) को शुरू किया। आईपीएल ने पिछले सालों में कई विवादों के बावजूद सफलतम आयोजन किए और क्रिकेट देखने वाले एक बड़े वर्ग को जमकर इंटरटेन किया। आईपीएल की ही तर्ज पर अन्य देशों में भी क्रिकेट लीगों का आयोजन किया गया जिसमें बिग बैश लीग, बीबीएल, सीएसएल, और पीएसएल प्रमुख है। इन लीगों के शुरू होने के बाद से आईपीएल के द्वारा स्टेडियम टिकट में वसूले जाने वाले पैसे को लेकर सवाल मुखर हो चले हैं। सवाल ये भी है कि जहां इन देशों में अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए टिकट की राशि ज्यादा होती है तो लीग के मैचों के लिए स्टेडियम का टिकट लगभग उस रेट से आधा होता है। लेकिन आईपीएल में इस तरह की कतई छूट नहीं है।

भले ही बिजनेस एक्जीक्यूटिव और सेलीब्रिटियों को हॉस्पिटलिटी बॉक्सेस में टिकट फ्री में मिल जाते हों लेकिन इस टूर्नामेंट का सबसे सस्ता टिकट 700 रुपए का होता है। जो भारतीयों की मासिक आमदनी का 7 प्रतिशत है। इस मामले में ऑस्ट्रेलियाई फैन आगे हैं, क्योंकि उन्हें बिग बैश लीग गेम में टिकट के लिए मात्र 20 डॉलर खर्च करने होते हैं जो उनकी मासिक आमदनी का 1 प्रतिशत से भी कम होता है। गौर करने वाली बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग में टिकट(20$) का रेट टेस्ट मैचों की टिकट 35$ से भी कम है। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं किस तरह से आईपीएल जिसकी टिकटों का दाम अपेक्षाकृत भारत में खेले जाने वाले  टेस्ट मैचों की टिकटों का लगभग 60 प्रतिशत होना चाहिए था, उसे अंतरराष्ट्रीय वनडे मैच की टिकट से महज 100 से 200 रुपए सस्ते में बेचा जा रहा है। 

ये भी मानना ठीक है कि आईपीएल के आने से क्रिकेट का तेजी से विकास हुआ है और उन युवाओं को मौका मिला है जो क्रिकेट में करियर बनाना चाहते थे। लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्रिकेट से लगातार पैसे की उगाही क्यों की जा रही है और दर्शकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए स्टेडियम में टिकट के रेटों में तब्दीली क्यों नहीं की जा रही? जाहिर है बीसीसीआई को इस संबंध में गहराई से सोचने की जरूरत है ताकि विश्व का सबसे बड़ा मार्केट माने जाने वाले देश में दर्शकों को क्रिकेट देखने के लिए थोड़ी और सहूलियत दी जा सके।

टीवी में मैच देखने के मामले में भारतीयों का अनुभव सबसे अच्छा:  टीवी में मैच देखने के मामले में भारत के दर्शक अच्छी स्थिति में हैं। यहां सेटेलाइट टेलीवीजन और केबल नेटवर्क के चलते स्पोर्ट्स पैकेज सस्ते हैं और दर्शक मैचों को बिना किसी तकलीफ के इन्जॉय करते हैं, लेकिन इस मामले में इंग्लैंड के क्रिकेट फैन्स के हाथों निराशा आती है। आज से 10 साल पहले इंग्लैंड में टीवी में मैच देखना फ्री टू एयर था, लेकिन बाद के सालों में ब्रॉडकास्ट राइट टू स्काई ने इंग्लिश फैन्स का मैच देखने का अनुभव लगभग बिगाड़कर रख दिया। इस तरह इंग्लैंड में फैन्स को टीवी में मैच देखने के लिए सालाना 600 पाउंड चुकाने होते हैं।

यह कीमत हर महीने स्टेडियम में जाकर एक क्रिकेट मैच देखने के बराबर है। यह दाम कई लोगों की पॉकेट के बाहर है। ऑस्ट्रेलिया में चैनल 9 घरेलू पिचों पर होने वाले मैचों को फ्री टू एयर ब्रॉडकास्ट करता है। इसके अलावा क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया शेफील्ड शील्ड मैचों की फ्री ऑनलाइन कवरेज उपलब्ध करवाता है।