साल 1721 में पहली बार खेला गया भारत में क्रिकेट, जानिए भारतीय घरेलू क्रिकेट का इतिहास
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जानकारों के मुताबिक भारत में क्रिकेट सबसे पहले साल 1721 में खेला गया था। इस समय क्रिकेट यूरोपीय जहाजी व्यापारी आपस में खेला करते थे। साल 1792 में कलकत्ता क्रिकेट क्लब की स्थापना की गई। जहां आज ईडेन गार्डन मैदान है वहीं कलकत्ता क्रिकेट क्लब स्थापित किया गया था। इसके पांच सालों के बाद बॉम्बे ने पहले मैच का आयोजन किया। इस तरह क्रिकेट को सबसे पहले खेलने वाला भारतीय शहर बॉम्बे बना। 18वीं शताब्दी के खत्म होते ही पारसियों ने भी इस खेल में अपनी रुचि दिखाई और ओरिएंट क्लब की स्थापना की। उस समय क्रिकेट खेलने का सामान लगभग दुर्लभ हुआ करता था इसीलिए वे यूरोपियन क्लब की पुरानी क्रिकेट किट का इस्तेमाल किया करते थे।

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साल 1877 में पारसियों ने यूरोपियों को हरा दिया और जीत का स्वाद चखते ही इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के दौरे की योजना बनाई। लेकिन उनकी ऑस्ट्रेलिया दौरे की योजना बीच में ही रद्द हो गई। अंततः साल 1978 में उन्होंने इंग्लैंड का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कुल 28 मैच खेले जिनमें 1 में जीत दर्ज की। दो साल के बाद फिर से पारसियों ने इंग्लैंड का दौरा किया और इस दौरान उन्होंने 31 मैच खेले जिनमें से 8 में जीत दर्ज की। इन मैचों में मेहलासा पावरी ने कुल 170 विकेट निकाले।

साल 1889 में एक अपरिपक्व इंग्लिश टीम ने भारत का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अपने ज्यादातर मैच यूरोपियों के विरुद्ध खेले, लेकिन पारसियों के खिलाफ खेले गए एक मैच में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस मैच में पावरी ने 9 विकेट लिए। साल 1892 में उन्होंने दोबारा भारत का दौरा किया और 20 मैचों में से 2 मैच हारे और ये मैच भी वह पारसियों के हाथों हारे।

भारतीय घरेलू टूर्नामेंट की शुरुआत: साल 1895 में भारत में प्रतियोगी क्रिकेट की शुरुआत हुई और पहला मैच यूरोपियों और पारसियों के बीच खेला गया। इस सीरीज का नाम ‘प्रेसीडेंसी मैचेज’ पड़ा। भारत के रणजी सिंह उस समय अपने क्रिकेट करियर के चरम पर थे। रणजी सिंह इंग्लैंड में क्रिकेट खेला करते थे। साल 1907 में हिंदुओं ने अपनी टीम बनाई। इस तरह वह यूरोपीय और पारसियों के साथ त्रिकोणीय श्रृंखला खेले। इसके ठीक 5 साल के बाद साल 1912 में मुस्लिमों ने भी अपनी टीम बनाई और वह भी इस टूर्नामेंट के भागीदार बन गए। साल 1937 में क्रिस्चियनों और यहूदियों ने मिलकर रेस्ट टीम बनाई और इस तरह अब भारतीय घरेलू टूर्नामेंट पांच टीमों के मध्य खेला जाने लगा।

साल 1932 में भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी टीम लॉन्च की, इसके पहले भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टूर्नामेंट के आयोजन के कोई प्रयास नहीं किए गए थे। साल 1932 में ही भारत को टेस्ट देश का दर्जा हासिल हुआ। इसके पहले साल 1911 में एक ऑल इंडिया टीम ने पटियाला के महाराजा की अगुआई में इंग्लैंड का दौरा किया था। इस दौरे में उन्हें बहुत थोड़ी सफलता मिली। साल 1920 तक भारतीय टीम के खेल को देखकर आईसीसी ने भारतीय टीम को टेस्ट दर्जा देने का निर्णय कर लिया था।

लेकिन इस समय तक भारतीय क्रिकेट को नियंत्रित करने के लिए किसी केंद्रीय संस्था की स्थापना नहीं की गई थी। इसीलिए 1928 में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की स्थापना की गई। भारत को टेस्ट पर्दापण साल 1930-31 में करना था लेकिन उस समय भारत में स्वतंत्रता आंदोलन चरम पर थे जिसके कारण इस ट्रिप को निरस्त कर दिया गया और 18 महीने बाद भारत ने लॉर्ड्स मैदान पर टेस्ट मैचों में पर्दापण किया।

साल 1934 में बीसीसीआई ने भारत के राजकुमारों और रियासतों के मध्य एक राष्ट्रीय टूर्नामेंट का आयोजन किया। इसी टूर्नामेंट का नाम भारत के महान खिलाड़ी के एस रणजीत सिंह के नाम पर रणजी ट्रॉफी पड़ा। इसके अलावा बोर्ड ने अंतः विश्वविद्यालयीन प्रतियोगिताओं की शुरुआत भी की।