मसाई क्रिकेटर्स: समाज के उद्धार के लिए पकड़ा क्रिकेट का दामन
चित्र साभार: GETTY IMAGES(telegraph.co.uk)

बदन में लाल रंग की स्कर्ट व गले में छोटे- छोटे व आकर्षक पत्थरों से बने हार(नेकलेस) को पहने हुए ये लोग केन्या की आदिवासी प्रजाति मसाई से ताल्लुक रखते हैं। पिछले कई सालों से ये क्रिकेट खेल रहे हैं और अब ये विश्व भर में क्रिकेट खेल के माध्यम से अपने समुदाय को उन्नत करने में लगे हुए हैं। इन्होंने क्रिकेट के लिए बरछी व भाले को त्याग दिया है और बस अब लेदर की गेंद व बल्ला ही इनके जीवन का अहम अंग है। इस समुदाय के युवा अपने समुदाय में क्रिकेट के माध्यम से अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा दे रहे हैं। साथ ही ये एचआईवी/एड्स व महिलाओं संबंधी बीमारियों के बारे में जागरुकता फैला रहे हैं। ये अपने आपको “मसाई क्रिकेट योद्धा” कहते हैं।

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केन्या के शहरी क्षेत्रों से इस अलग थलग इस इलाके में क्रिकेट आज से करीब 7 साल पहले शुरू हुआ था। यहां क्रिकेट शुरू करने का श्रेय दक्षिण अफ्रीकी महिला अलिया बाउर को जाता है जिन्होंने मसाई टीम को कोचिंग दी। बाउर को केन्या के लैकिपिया क्षेत्र में लंगूरों पर रिसर्च करने के लिए भेजा गया था। शहरी क्षेत्र से दूर कई दिनो रहने के कारण बाउर क्रिकेट को बहुत मिस कर रही थीं। इसीलिए उन्होंने इस खेल के बारे में स्थानीय लोगों को बताया और अपने घर में रखे हुए क्रिकेट के सामान को लेकर वह स्थानीय स्कूल में पहुंची और खेल के बारे में लोगों को रूबरू करवाया। 

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इस खेल पर मसाई लड़कों ने एक अच्छी प्रतिक्रिया दी, इस बात पर बाउर ने उन्हें एक हफ्ते में दो बार आकर क्रिकेट की ट्रेनिंग देने के लिए हामी भर दी। जब ये क्रिकेटर खेल रहे होते हैं तो आसपास से गुजरने वाले दूसरे आदिवासी लोग इस खेल को देखने के लिए कौतूहलवश वहीं रुक जाते। कुछ दिनों के बाद भारी मात्रा में वहां के लोगों में इस खेल के प्रति जिज्ञासा उभरी और अब वे सभी इस खेल में हाथ आजमाना चाहते थे। जब इस खेल में लोगों की भरमार होने लगी तो बाउर को लगा कि अब उन्हें थोड़ी मदद की आवश्यकता है और उन्होंने ‘चैरिटी क्रिकेट विदाउट बाउंड्रीज’ से संपर्क किया। उनकी मदद से बाउर ने ट्रेनिंग के लिए और भी किटें मंगवाईं। अब मसाई क्रिकेटर्स तंजानिया और आसपास की टीमों के खिलाफ मैच भी खेलने लगे थे।

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उचित खेलने की सुविधाओं की कमियों, पैसों की कमी, और लगातार प्रतियोगिताओं की कमी के बावजूद इस टीम ने जमीनी स्तर पर जमकर मेहनत की और आज इनकी टीम में कुल 24 खिलाड़ी हैं। ये सभी खिलााड़ी आसपास के गांवों से हैं। लेकिन खेल में आनंद उठाने के अतिरिक्त ये क्रिकेट योद्धा क्रिकेट का इस्तेमाल करके सामाजिक परेशानियों व स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता भी फैला रहे हैं। ये क्रिकेटर्स आसपास के गांवों के लोगों को क्रिकेट के गुर सिखाते हैं और इस ट्रेनिंग के दौरान एचआईवी/एड्स, महिलाओं के संबंध में चल रही भ्रांतियों, बाल विवाह, आपसी सहयोग के बारे में भी इन सभी को बताते हैं।

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इस टीम के एक सदस्य फ्रांसिस ओले मिशाने बताते हैं कि क्रिकेट एक दिन मसाईयों के बीच एक स्टार को जन्म लेगा। उन्होंने कहा कि गेंदबाजी करना भाले फेंकने की ही तरह है। एक महिला स्टूडेंट कहती है कि क्रिकेट में ध्यान लगाने से यहां की लड़कियां कम उम्र में शादी के बारे में अब नहीं सोचती। हाल ही में मसाई टीम को दक्षिण अफ्रीका के कैपटाउन में आयोजित लास्ट मैन स्टैंड्स टी20 चैंपियनशिप में आमंत्रित किया गया था। यहां के लोगों को उस दिन का इंतजार है जब मसाई प्रजाति से कोई क्रिकेटर एक दिन केन्या टीम का प्रतिनिधित्व करेगा साथ ही उनकी कोच व मेंटर बाउर का यह सपना भी है।