भगवत चंद्रशेखर ने इस मैच में दोनों पारियों में छह विकेट लेकर भारत को जीत दिलाई।  © Getty Images
भगवत चंद्रशेखर ने इस मैच में दोनों पारियों में छह विकेट लेकर भारत को जीत दिलाई। © Getty Images

भारतीय टीम इस समय विश्व की सबसे बेहतरीन टेस्ट टीम है। साथ ही भारत ने इस साल टेस्ट रैंकिग में शीर्ष स्थान भी पाया है। विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने पहले न्यूजीलैंड और फिर इंग्लैंड को हराकर पूरे विश्व में अपनी धाक जमा दी है। हालांकि अब भी भारतीय टीम के विदेशी धरती पर प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं लेकिन एक समय ऐसा था जब भारतीय टीम के लिए विदेशों में जीतना दूर की कौड़ी था। भारत के टेस्ट क्रिकेट शुरू करने के सालों बाद तक हम टेस्ट मैच में एक अदद जीत पाने के लिए प्रयासरत रहे। उस समय भारत की सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी टीम थी ऑस्ट्रेलिया। कंगारू टीम एक समय क्रिकेट जगत पर राज किया करती थी और साल 1978 तक भारत ऑस्ट्रेलिया में एक भी टेस्ट मैच जीत नहीं पाया था लेकिन भारत ने जनवरी 1978 में आखिरकार इस रिकॉर्ड को तोड़ा और ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर पहला टेस्ट मैच जीत कर दिखाया। ये भी पढ़ें: जब वीरेंद्र सहवाग सिर्फ एक रन से चूक गए थे लंच के पहले शतक जड़ने का रिकॉर्ड

1932 से भारतीय टीम ने टेस्ट क्रिकेट खेलना शुरू किया था और 1947 में पहली बार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज खेली थी। इस सीरीज में भारत 4-0 से बूरी तरह हार गया था। इसके बाद 1967-68 में भारतीय टीम एक बार फिर कप्तान चंदू बोर्डे के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई थी। इस बार भी भारतीय टीम के हाथ निराशा ही लगी और टीम इंडिया 4-0 से हार कर लौटी। हालांकि भारत अब तक घरेलू सीरीज पर खेले गए मैचों में ऑस्ट्रेलिया को हरा चुकी थी लेकिन ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में हराना अब भी बाकी था। भारतीय टीम को यह अवसर 1977-78 के दौरे पर मिला जब बिशन सिंह बेदी की कप्तानी में टीम इंडिया एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर टेस्ट सीरीज खेलनी उतरी। इस दौरे पर भारत को पांच टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी थी जिसमे से पहले दो टेस्ट भारत बहुत कम मार्जिन से हारा था। पहला टेस्ट 16 रन से भारत के हाथ से निकल गया वहीं दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने केवल 2 रन से जीत हासिल की। दोनों टेस्ट में भारतीय टीम का प्रदर्शन काबिले तारीफ रहा था। इससे तीसरे टेस्ट में टीम इंडिया का हौसला काफी बढ़ा। ये भी पढ़ें: भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी को संवार रहे हैं राहुल द्रविड़

मेलबर्न के मैदान पर खेले गए इस टेस्ट में भारतीय टीम इतिहास रचने के इरादे से उतरी। टॉस जीतकर कप्तान बेदी ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। भारत का बल्लेबाजी क्रम ऑस्ट्रेलिया के बेहतरीन गेंदबाजों के सामने टिक नहीं पाया और 256 पर भारतीय पारी सिमट गई। हालांकि सुनील गावस्कर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 72 रन बनाए और उनका साथ दिया गुंडप्पा विश्वनाथ ने, जिन्होंने 59 रनों की संघर्षपूर्ण पारी खेली। भारतीय टीम जानती थी कि यह स्कोर ऑस्ट्रेलिया के लिए काफी नहीं है इसलिए अब भारतीय टीम की कमान गेंदबाजों को संभालनी थी। ऐसे में सामने आया भारत का जादूई स्पिनर भगवत चंद्रशेखर। चंद्रशेखर के आगे कंगारू टीम को कोई भी बल्लेबाज रन नहीं बना सका। हालांकि क्रेग सरजेंट ने 85 रनों की शानदार पारी खेली लेकिन उन्हें चंद्रशेखर ने शतक बनाने से पहले ही बोल्ड कर पवेलियन भेज दिया। उन्होंने उस मैच में 52 रन देकर 6 विकेट लिए और विश्व क्रिकेट पर दबाव बनाने वाली ऑस्ट्रेलियन बल्लेबाजी को घुटनों पर ला दिया। नतीजतन मेजबान टीम 213 रन पर ऑल आउट हो गई। दूसरी पारी के लिए भारत ने 43 रन की छोटी सी बढ़त बना ली थी जिसे उन्हें और बढ़ाना था। पहली पारी में शानदार 72 रन बनाकर अपनी क्षमता का केवल ट्रेलर दिखाने वाले गावस्कर ने दूसरे पारी में अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया और धमाकेदार शतक जड़ा। उन्होंने 285 गेंदो पर 118 रन बनाए और ‘वन मैन शो’ दिखाते हुए भारत का स्कोर 343 तक पहुंचाया। अब भारत के पास 386 की विशाल बढ़त थी और ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर जीत हासिल करने का सुनहरा मौका भी। ऑस्ट्रेलिया में भारत की पहली जीत को भारत की स्पिन जोड़ी ने सुनिश्चित किया। पहली पारी में 213 पर आउट होने के बाद दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया टीम केवल 164 रन ही बना सकी। कप्तान बिशन सिंह बेदी ने चार विकेट लिए साथ ही चंद्रशेखर ने एक बार फिर छह विकेट चटकाए। भारत ने आखिरकार ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर अपनी पहली टेस्ट जीत हासिल की वह भी 222 जैसे बड़े अंतर से। ये भी पढ़ें:साल 2016 में भारतीय बल्लेबाजी के पांच सबसे यादगार पल

भारत की इस ऐतिहासिक जीत के नायक रहे सुनील गावस्कर और भगवत चंद्रशेखर। इस जीत में आज के दिन का खास महत्व इसलिए हैं क्योंकि 30 दिसंबर से चार जनवरी तक चले इस मैच के चौथे दिन यानि कि 3 जनवरी को भगवत चंद्रशेखर ने दूसरी बार छह विकेट लेकर इतिहास रच दिया था। भारत की जीत तो चौथे दिन ही निश्चित हो गई थी और फिर पांचवे दिन चार विकेट लेकर कप्तान बेदी ने ऑस्ट्रेलिया की हार के ताबूत में आखिरी कील ठोंक दी। इस तरह से भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को उसके घरेलू मैदान पर टेस्ट मैच में हराया था। हालांकि यह सीरीज भारत 3-2 से हार गया था लेकिन अगर पहले दो टेस्टों को देखें तो भारत जीत के काफी करीब था और ऑस्ट्रेलिया छोटे अंतर से जीता था। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में यह सीरीज काफी अहम है। इस साल ऑस्ट्रेलियन टीम भारत दौरे पर आ रही है और उसे विश्व की नंबर एक टीम का सामना करना है। अब देखना होगी कि इस सीरीज में किसकी जीत होती है।