अल्फ्रेड शॉ और चॉल्स बैनरमैन  ©Wikimedia Commons
अल्फ्रेड शॉ और चॉल्स बैनरमैन ©Wikimedia Commons

140 साल पहले आज के ही दिन टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की शरुआत हुई थी। दुनिया का सबसे पहला टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेला गया था। कप्तान जेम्स लिलीवाइट की कप्तानी में इंग्लिश टीम ने साल 1876 में पहला ऑस्ट्रेलिया दौरा किया था। यह वो समय था जब ऑस्ट्रेलिया को बेहद की कमजोर क्रिकेट टीम माना जाता था। खासकर के इंग्लैंड जैसी दिग्गज टीम के समाने तो उसे नौसिखियों की टीम भी कहा जा सकता था। मेजबान टीम का नेतृत्व कर रहे थे डेविड विलियम जॉर्जी। 15 मॉर्च को शुरु हुए इस मैच की समयसीमा तय नहीं की गई थी हालांकि मैच केवल पांच दिन ही चला। इस मैच के साथ दोनों टीमों के कुल 22 खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट में पर्दापण कर रहे थे।

यह दुनिया का सबसे पहला टेस्ट मैच था तो जाहिर है कि इस मैच में अनगिनत रिकॉर्ड बने होंगे। इस मैच में छह नहीं बल्कि चार गेंदों का ओवर डाला गया था। यह नियम आगे भी कई सालों तक ऐसे ही चलता रहा, बाद में छह गेंदों का ओवर डालने की शुरुआत की गई। मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी ऑस्ट्रेलिया टीम ने की। वहीं टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की सबसे पहली गेंद डाली इंग्लैंड के अल्फ्रेड शॉ ने। साथ ही टेस्ट क्रिकेट की सबसे पहली गेंद खेलने वाले बल्लेबाज बने ऑस्ट्रेलिया के चॉल्स बैनरमैन। बैनरमैन ही वह खिलाड़ी है जिनके नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे पहला शतक लगाने का रिकॉर्ड है। गौरतलब है कि बैनरमैन ही सबसे पहले रिटायर हर्ट होने वाले बल्लेबाज भी हैं।

MCG stadium
मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड

ऑस्ट्रेलिया टीम ने अपना पहला विकेट केवल दो रन के स्कोर पर खो दिया और इसी के साथ एलेन हिल टेस्ट क्रिकेट में सबसे पहला विकेट और कैच लेने वाले खिलाड़ी बने। बैनरमैन ने एक छोर से लगातार गिरते विकेट के बावजूद भी पारी को संभाले रखा। उन्होंने 285 गेंदों में शानदार 165 रन बनाए। उनके अलावा कोई भी बल्लेबाज 20 का आंकड़ा छू नहीं सका। इंग्लैंड की ओर से एल्फ्रेड शॉ और जेम्स साउथटर्न ने 3-3 विकेट लिए और मेजबान टीम को 245 के स्कोर पर समेटा। अब बल्लेबाजी करने की बारी मेहमान टीम की थी। इंग्लैड टीम 200 का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी और पूरी टीम 196 पर ऑलआउट हो गई। मेहमान टीम की ओर से सर्वाधिक 63 रन हैरी जप ने बनाए। वहीं हैरी चॉल्सवुड ने 36 और एलेन हिल ने 35 रनों की पारी खेली। इसके अलावा कोई बल्लेबाज 15 का स्कोर भी नहीं बना सका।

मैच के तीसरे दिन ऑस्ट्रेलिया टीम 49 रनों की बढ़त के साथ उतरी। उनका लक्ष्य था जीत के लिए एक बड़ा स्कोर खड़ा करना। हालांकि इस बार उनके सबसे बेहतरीन बल्लेबाज बैनरमैन सस्ते में आउट हो गए। उनके आउट होते ही पूरा बल्लेबाजी क्रम बिखर गया और टीम 104 के स्कोर पर आउट हो गए। इंग्लैंड की ओर से एल्फ्रेड शॉ ने टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का पहला पांच विकेट हॉल लिया। इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 154 रनों का आसान लक्ष्य था लेकिन ऑस्ट्रेलिया टीम के गेंदबाजों के सामने इंग्लैंड टीम फीकी नजर आई। मेजबान टीम के सबसे सफल गेंदबाज रहे थॉमल किंडेल, उन्होंने 33.1 ओवर में 55 रन देकर कुल सात विकेट चटकाए। साथ ही 12 मेडन ओवर भी डाले। किंडेल के बेहतरीन स्पेल के सामने इंग्लैंड टीम 108 के स्कोर पर सिमट गई और ऑस्ट्रेलिया ने 45 रन से यह ऐतिहासिक टेस्ट मैच जीत लिया।

मैच से जुड़े रोमांचक तथ्य:

*बैनरमैन के रिटायर हर्ट होकर पवेलियन लौटने के बाद विलियम न्यूइंग ने उनकी जगह फील्डिंग की थी।

*बैनरमैन जॉर्ज उलियट की गेंद पर चोटिल होकर पवेलियन लौट गए थे। जब वह रिटायर हर्ट हुए टीम का स्कोर 240/7 था। बैनरमैन के दाएं हाथ की उंगली में चोट लगी थी।

*इस ऐतिहासिक मैच के दौरान पांच में से केवल चार दिन ही खेल हुआ था। 18 मार्च के दिन दोनों टीमों को आराम दिया गया था।

*यह मैच नवनिर्मित मेलबर्न स्टेडियम पर खेला गया था। पहले दिन स्टेडियम में 4,500 लोग मौजूद थे जबकि दूसरे दिन यह संख्या घटकर 4,000 हो गई। मैच के तीसरे दिन स्टेडियम में रिकॉर्ड 10,000 दर्शक मौजूद थे। मैच के आखिरी दिन दर्शकों की संख्या केवल 2,000 रह गई थी।