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इतिहास के पन्नों से: विश्व कप के रोमांचक मुकाबले में जब भारत और इंग्लैंड का मैच हो गया था टाई

आखिरी ओवर में इंग्लैंड को जीतने के लिए 14 रनों की जरूरत थी लेकिन टीम 13 रन ही बना सकी थी

Edited By : Manoj Shukla |Jan 04, 2017, 03:23 PM IST

Published On Jan 04, 2017, 03:23 PM IST

Last UpdatedJan 04, 2017, 03:23 PM IST

भारतीय टीम © Getty Images
भारतीय टीम © Getty Images

इतिहास के पन्नों से आज हम आपके लिए खंगाल के लाए हैं साल 2011 में भारतीय उपमहाद्वीप में खेले गए विश्व कप में भारत और इंग्लैंड के बीच का मुकाबला। 27 फरवरी को बेंगलुरू के चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए इस मैच ने रोमांच की सारी हदें पार कर दीं थीं। ग्रुप बी में खेले गए भारत और इंग्लैंड के बीच के इस मुकाबले ने सभी की धड़कनों को रोक दिया था और अंत में मुकाबला टाई पर समाप्त हुआ था। आखिर क्या हुआ था उस दिन, आइए जानते हैं।

ग्रुपी बी के मुकाबले में भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था। भारत की तरफ से सलामी बल्लेबाजी के लिए सबसे धाकड़ बल्लेबाजों में से एक सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग। दोनों ने आते ही इंग्लैंड के गेंदबाजों पर हल्ला बोल दिया। दोनों के विस्फोटक अंदाज के सामने इंग्लैंड के कप्तान एंड्रू स्ट्रॉस को कुछ समझ नहीं आ रहा था। दोनों ताबड़तोड़ अंदाज में बल्लेबाजी कर रहे थे कि तभी टिम ब्रेसनेन की गेंद पर सहवाग गच्चा खा गए और मेट प्रायर को कैच थमा बैठे। भारत को पहला झटका 7.5 ओवरों में 46 रन पर लग चुका था। इन 46 रनों में सहवाग के 26 गेंदों में 35 रन थे। साफ है भारत को बड़ा झटका लगा था। लेकिन इसके बाद बल्लेबाजी के लिए गौतम गंभीर ने सचिन का बखूबी साथ दिया और दोनों ने टीम के स्कोर को 100 के पार पहुंचा दिया।

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इसी बीच सचिन ने अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। अब सचिन और खतरनाक होकर बल्लेबाजी कर रहे थे। वहीं गौतम गंभीर भी अच्छी लय में नजर आ रहे थे। इसी बीच टीम का स्कोर 150 के पार पहुंच गया और भारत बेहद मजबूत स्थिति में पहुंच चुका था। देखते ही देखते गंभीर ने भी अपना अर्धशतक पूरा किया। दोनों ही बल्लेबाज आसानी से रन बना रहे थे। इसी बीच ग्रीम स्वान ने गंभीर को बोल्ड कर भारत को दूसरा झटका दे दिया। गंभीर 61 गेंदों में 51 रन बनाकर आउट हुए।

हालांकि गंभीर के आउट होने से भारत को ज्यादा फर्क नहीं पड़ा क्योंकि गंभीर के बाद युवराज सिंह ने आते ही ताबड़तोड़ बल्लेबाजी शुरू कर दी और रन रेट को नीचे नहीं आने दिया। वहीं दूसरे छोर पर टिके सचिन तेंदुलकर ने अपना शतक पूरा कर लिया। सचिन ने जैसे ही शतक लगाया वैसे ही पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सचिन अब खुलकर खेल रहे थे, लेकिन तभी एंडरसन ने सचिन को 120 के निजी स्कोर पर आउट कर भारत को तीसरा झटका जे दिया। सचिन जब आउट हुए तो भारत का स्कोर 38.2 ओवरों में 3 विकेट के नुकसान पर 236 रन था।

सचिन के आउट होने के बाद क्रीज पर कप्तान एमएस धोनी। धोनी ने युवराज के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाया। दोनों ही बल्लेबाज काफी तेज गति से रन बना रहे थे। इसी बीच भारत का स्कोर 300 के पार पहुंच गया। इसके साथ ही युवराज ने भी अपना अर्धशतक पूरा कर लिया था। लेकिन तभी बड़ा शॉट खेलने के चक्कर में युवराज यार्डी की गेंद पर कैच आउट हो गए। युवराज के आउट होने के फैरन बाद ही धोनी भी 31 रन बनाकर आउट हो गए। इतिहास के पन्नों से: जब भारतीय टीम ने आखिरी ओवर में 17 रन बनाकर हारे हुए मैच को करा लिया था टाई

भारत का स्कोर अब 46.1 ओवरों में 5 विकेट के नुकसान पर 305 रन हो चुका था। इसके बाद बल्लेबाजी का दारोमदार यूसुफ पठान और विराट कोहली ने संभाला। पठान ने बड़े शॉट खेलेने शुरू कर दिए और भारत के स्कोर को और आगे ले जाने लगे। लेकिन आखिरी ओवरों में इंग्लैंड के गेंदबाजों ने वापसी करते हुए पठान को 14 और कोहली को 8 रन पर आउट कर दो झटके दे दिए। वहीं हरभजन को भी शून्य पर निपटा इंग्लैंड ने भारत के 350 की उम्मीद को खत्म कर दिया था। अंत में 49.5 ओवरों में बारत की पूरी टीम 338 रनों पर सिमट गई। एक समय भारत का स्कोर 350 के पार दिख रहा था लेकिन इंग्लैंड ने भारत को 338 पर समेट दिया था।

जवाब में इतने बड़े स्तर पर इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड टीम के दोनों सलामी बल्लेबाज स्ट्रॉस और केविन पीटरसन ने अपनी टीम को धमाकेदार शुरुआत दी। दोनों ही बल्लेबाजों ने आते ही भारतीय गेंदबाजों को धोना शुरू कर दिया। खासकर पीटरसन, पीटरसन बेहद तेज गति से रन बना रहे थे। देखते ही देखते दोनों ने टीम के स्कोर को 50 के पार पहुंचा दिया। खतरनाक दिख रही इस जोड़ी को तोड़ मुनाफ पटेल ने। पटेल ने पीटरसन को आउट कर भारत को पहली सफलता दिया दी। भारतीय समर्थकों को मानो इसी पल का इंतजार था। पूरा स्टेडियम खुशी से झूम उठा। पीटरसन के आउट होने के बाद इंग्लैंड का स्कोर 9.3 ओवरों में एक विकेट के नुकसान पर 68 रन था।

इसके बाद बल्लेबाजी के लिए जोनाथन ट्रॉट। दूसरे छोर पर टिके स्ट्रॉस ने अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। देखते ही देखते इंग्लैंड का स्कोर 100 के पार पहुंच गया। एक बार फिर से दोनों बल्लेबाज अच्छी साझेदारी करने की कोशिश में जुटे थे कि तभी पीयूष चावला ने ट्रॉट को 16 रनों पर आउट कर भारत की झोली में दूसरी सफलता डाल दी। भारतीय समर्थकों को एक बार फिर से झूमने का मौका मिल गया था और पूरा स्टेडियम गूंजाएमान हो उठा। चौथे नंबर पर खेलने आए इयान बेल। बेल ने अपने कप्तान का बखूबी साथ दिया और दोनों तेज गति से रन बनाने लगे। इसी बीच स्ट्रॉस ने अपना शतक पूरा कर लिया और इंग्लैंड को मैच में बनाए रखा। दोनों बल्लेबाज अब आसानी से रन बना रहे थे। भारतीय किलाड़ियों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकतीं थीं। दोनों ने इंग्लैंड के स्कोर को पहले 200 और फिर 250 के पार पहुंचा दिया। दोनों ने रनरेट में भी कोई गिरावट नहीं आने दी और तेज गति से रन बनाते रहे। शानदार बल्लेबाजी कर रहे स्ट्रॉस ने अपने 150 रन भी पूरे कर लिए और लगने लगा कि वह इंग्लैंड को जीत दिला कर ही दम लेंगे।

भारत के कप्तान एमएस धोनी वरिष्ठ खिलाड़ियों से सलाह मशवरा करने लगे और काफी देर सलाह करने के बाद गेंदबाजी में जहीर खान को लगाया। जहीर ने अपने कप्तान, अपनी टीम और अपने प्रशंसकों के भरोसे को जाया नहीं जाने दिया और तेज खेल रहे इयान बेल को 69 रनों के निजी योग पर आउट कर भारत को तीसरी सफलता दिला दी। काफी देर से मायूस बैठे समर्थकों के चेहरे पर खुशी लौट आई और पूरी टीम जश्न मनाने लगी। ऐसा लग रहा था कि भारत की जीत के बीच बेल दीवार बनकर खड़े थे। जहीर यहीं नहीं रुके और अगली ही गेंद पर उन्होंने स्ट्रॉस को भी निपटा दिया। स्ट्रॉस का विकेट गिरते ही भारतीय टीम पूरे मैदान में जश्न मनाने लगी ऐसा लगने लगा कि भारत को अब जीत की खुश्बू मल चुकी थी। भारतीय टीम के साथ-साथ प्रशंसक भी जश्न मनाने लगे थे।

इसके बाद टीम को जीत दिलाने का भार पॉल कॉलिंगवुड और मेट प्रॉयर के कंधों पर आ गया। लेकिन जहीर की रफ्तार के सामने कॉलिंगवुड भी टिक नहीं सके और मात्र 1 रन बनाकर आउट हो गए। भारत को अब लगातार विकेट मिल रहे थे। इंग्लैंड का स्कोर अब 44.3 ओवरों में 285 रनों पर पांच विकेट हो गया था। इंग्लैंड को अब जीत दूर लगने लगी थी और भारत की जीत की उम्मीद और बढ़ गई थी। इसके अगले ही ओवर में हरभजन ने प्रायर को भी पवेलियन का रास्ता दिखा दिया और खचाखच भरे स्टेडियम में भारत की जीत के नारे लगने लगे। इंग्लैंड अब मैच से बाहर लगने लगा था, वहीं भारत जीत का प्रबल दावेदार नजर आने लगा था।

इंग्लैंड का हर बड़ा खिलाड़ी पवेलियन लौट चुका था। क्रीज पर थे यार्डी और ब्रेसनेन। दोनों ने निचले क्रम में टीम को अहम योगदान दिया और टीम के स्कोर को 300 के पार पहुंचा दिया। मैच का रुख एक बार फिर से पलटने लगा था और भारत की ओर आता दिख रहा भारत के हाथों से फिसलता दिख रहा था। इसी बीच यार्डी को पटेल ने आउट कर भारत को सातवीं सफलता दिला दी। इंग्लैंड का स्कोर अब 47.3 ओवरों में सात विकेट के नुकसान पर 307 रन हो चुका था। इंग्लैंड को अब दो ओवरों में 29 रनों की दरकार थी जबकि उसके 3 विकेट शेष थे। क्रीज पर थे ग्रीम स्वान और टिम ब्रेसनेन। गेंदबाजी में काफी विचार विमर्श के बाद पीयूष चावला को लाया गया। पहली गेंद पर कोई रन नहीं बना और समर्थकों ने चिल्लाकर अपनी टीम का समर्थन किया। ये भी पढ़ें: इतिहास के पन्नों से: जब आखिरी ओवर में 17 रन बनाकर भारत ने कंगारुओं का कर दिया था सूपड़ा साफ

दोनों ही बल्लेबाजों पर दबाव बन चुका था। विश्व कप का इतना बड़ा आयोजन और भारतीय समर्थकों का हुजूम के आगे इंग्लैंडे के दो निचले क्रम के बल्लेबाज अपनी टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाने की कोशिश कर रहे थे। दूसरी गेंद पर स्वान ने शानदार शॉट खेला और गेंद को छह रनों के लिए भेज दिया। तीसरी गेंद पर चावला ने एक रन दिया। चौथी गेंद पर ब्रेसनेन ने दो रन लिए और पांचवीं गेंद पर करारा प्रहार करते हुए अपनी टीम के खाते में छह और रन जोड़ दिए। मैच का रुख एक बार फिर से बदलने लगा था। अंतिम गेंद पर चावला ने ब्रेसनेन का विकेट निकालकर भारत को आठवीं सफलता दिला दी और ब्रेसनेन का विकेट गिरते ही भारत एक बार फिर से खुशी मनाने लगा।

अब अंतिम ओवर में इंग्लैंड को जीतने के लिए 14 रन तो भारत को जीतने के लिए दो विकेट चाहिए थे। भारत के पास रन बचाने के लिए बहुत थे। भारत जीत का प्रबल दावेदार नजर आ रहा था। लेकिन कहते हैं क्रिकेट अनिश्तिताओं से भरा खेल है और उस दिन भी यही हुआ। पटेल की पहली गेंद को स्वान ने दो रनों के लिए खेला। इंग्लैंड को अब जीतने के लिए पांच गेंदों में 12 रनों की जरूरत थी। दूसरी गेंद पर स्वान ने एक रन लिया और भारतीय समर्थकों ने फिर से अपने शोर से स्टेडियम को गूंजाएमान कर दिया। तीसरी गेंद पर शहजाद ने जोरदार शॉट खेला और गेंद को छह रनों के लिए भेज दिया। मैच का रुख कभी भारत तो कभी इंग्लैंड की तरफ झुक रहा था। अगली तीम गेंदों में अब इंग्लैंड को पांच रनों की जरूरत थी। चौथी गेंद शहजाद के पैड में गेंद लगी और दोनों बल्लेबाजों ने दौड़कर एक रन चुरा लिया। अब दर्शकों की सांसें थम चुकीं थीं। रोमांच अपने चरम पर पहुंच चुका था।

भारत को जीतने के लिए दो गेंदों में दो विकेट तो इंग्लैंड को जीतने के लिए दो गेंदों में 4 रनों की जरूरत थी। पांचवीं गेंद पर स्वान बड़ा शॉट खेलना चाहते थे लेकिन गेंद उनके बल्ले के भीतरी किनारे को लेते हुए फील्डर के हाथों में गई जब तक दोनों ब्लेलबाजों ने दौड़कर दो रन पूरे कर लिए थे। अब गेंद बची थी एक और रन चाहिए थे दो। दोनों बल्लेबाजों ने गहन चर्चा की वहीं पटेल को भी भी जहीर ने काफी समझाया। पटेल ने अंतिम गेंद फेंकी और स्वान ने जोरदार शॉट लगाया गेंद सीधा फील्डर के हाथों में गई लेकिन इसी बीच दोनों खिलाड़ियों ने दौड़कर एक रन पूरा कर लिया और विश्व कप के इतिहास में मैच को टाई करा लिया। टीम इंडिया एक समय मैच में मजबूत थी लेकिन अंत में मैच के नतीजे से ज्यादा खुश नहीं दिखी। रोमांच की सारी हदों को पार करते हुए इंग्लैंड ने हारे हुए मैच को टाई कराने में कामयाबी पाई थी।

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