भारतीय टीम © Getty Images
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भारत और इंग्लैंड के बीच वनडे सीरीज शुरू होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं और वनडे सीरीज के बाद टी20 सीरीज भी खेली जाएगी। ऐसे में भारतीय टीम सीरीज में शानदार खेल दिखाने की पूरी कोशिश करेगी। साथ ही सीरीज को जीतने का भी भरपूर प्रयास करेगी। टीम के ऊपर सीरीज जीतने का दबाव तो होगा साथ ही टीम के कई खिलाड़ियों पर भी भारी दबाव होगा। किसी खिलाड़ी के ऊपर अच्छे प्रदर्शन का दबाव होगा तो किसी पर अच्छी कप्तानी का। तो आइए आपको बताते हैं कि इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में कौन-कौन से खिलाड़ी रहेंगे दबाव में।

विराट कोहली (सीमित ओवरों में कप्तानी का दबाव): महेंद्र सिंह धोनी के कप्तानी पद से इस्तीफा देने के बाद विराट कोहली को भारत के हर प्रारूप का कप्तान नियुक्त कर दिया गया है। हमने कोहली को टेस्ट में कप्तानी करते हुए देखा है और साथ ये भी देखा कि कोहली ने टेस्ट में टीम इंडिया को बुलंदियों पर पहुंचा दिया। इसके अलावा उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने एक भी टेस्ट सीरीज नहीं हारी है। ऐसे में आनन-फानन में सीमित ओवरों के कप्तान बने कोहली पर अच्छे प्रदर्शन का दबाव होगा। साथ ही उनकी कप्तानी में कई वरिष्ठ खिलाड़ी खेलेंगे और कोहली उनका किस तरह का उपयोग करते हैं ये भी देखने वाली बात होगी।

भारत को चैंपियंस ट्रॉफी से पहले एक ही सीरीज खेलनी है ऐसे में कोहली पर टीम से भी शानदार प्रदर्शन करवाने और चैंपियंस ट्रॉफी से पहले टीम को ढालने का भी दबाव होगा। देखने वाली बात ये भी होगी कि क्या कोहली बतौर कप्तान सीमित ओवरों में पहले जैसी बल्लेबाजी जारी रख पाएंगे या नहीं।

महेंद्र सिंह धोनी, (बतौर खिलाड़ी टीम में जगह बनाने का दबाव): हाल ही में कप्तानी से इस्तीफा देने वाले महेंद्र सिंह धोनी पर बतौर खिलाड़ी टीम में अपनी जगह बनाने का दबाव होगा। साल 2016 में टीम के कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी का बल्ला सालभर खामोश रहा और वह रन बनाने के लिए तरसते नजर आए। धोनी ने पिछले साल सिर्फ एक ही अर्धशतक लगाया। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर धोनी ने 18, 11, 23, 0, 34 रन बनाए तो जिम्बाब्वे दौरे पर उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। इसके बाद कीवी टीम के खिलाफ धोनी ने 21, 39, 80, 11 और 41 रन बनाए। इस दौरान धोनी अपने बल्लेबाजी क्रम को लेकर भी बहुत भ्रमित रहे। कभी फिनिशर की भूमिका निभाने वाले धोनी चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए इच्छुक नजर आने लगे और कहा कि अब वह इसी नंबर पर खेलते नजर आएंगे। लेकिन धोनी ने हाल-फिलहाल कुछ खास नहीं किया है। ये भी पढ़ें: जो रूट पिता बने, पूरी सीरीज के लिए रहेंगे उपलब्ध

ऐसे में धोनी पर बतौर खिलाड़ी अपनी जगह बनाने का दबाव होगा। अगर इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में उनका बल्ला खामोश रहा और वह रन बनाने में कामयाब नहीं हो पाए तो आने वाले मुकाबलों में उनके ऊपर सवाल किए जा सकते हैं।

युवराज सिंह, (3 साल बाद टीम में जगह पक्की करने का दबाव): वहीं सिक्सर किंग के नाम से मशहूर युवराज सिंह ने लगभग 3 साल बाद वनडे टीम में वापसी की है। साथ ही युवराज सिंह का सपना है कि वह भारत के लिए साल 2019 का विश्व कप भी खेलें। ऐसे में अगर युवराज को अपना सपना पूरा करना है तो उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ खेले जाने वाली सीरीज में अपने बल्ले से जमकर रन बरसाने होंगे। अगर वह ऐसा नहीं कर पाए तो हो सकता है कि उनके सपने पर पानी फिर जाए। इंग्लैंड के खिलाफ युवराज सिंह के लिए चुनौती आसान नहीं रहेगी क्योंकि इंग्लैंड के गेंदबाजों को युवराज की हर कमजोरी का पता है। साथ ही युवराज के बारे में ये भी कहा जाता रहा है कि वह विश्वस्तरीय गेंदबाजी के सामने हथियार डाल देते हैं। युवराज को जब साल 2013 में टीम से बाहर किया गया था तो उन्होंने 18 मैचों में 19 की बेहद मामूली औसत के साथ सिर्फ 276 रन ही बनाए थे। युवराज का सर्वोच्च सिर्फ 61 रन रहा था और उन्होंने मात्र 2 अर्धशतक लगाए थे। इसके अलावा युवराज ने साल 2013 में 18 में से 16 मुकाबले भारत में ही खेले थे।

ऐसे में 3 साल बाद टीम में लौटे युवराज पर टीम में अपनी जगह पक्की करने का भारी दबाव होगा। क्योंकि अगर वह इंग्लैंड के खिलाफ अगर बेहतर बल्लेबाजी नहीं कर सके तो हो सकता है कि उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए।

4. सुरेश रैना, (वनडे टीम में वापसी का दबाव): कभी भारतीय टीम के लिए मैच विनर माने जाने वाले सुरेश रैना के लिए चुनौती बढ़ती ही जा रही है। रैना वनडे टीम से बाहर चल रहे हैं और इंग्लैंड के खिलाफ भी उन्हें वनडे टीम में शामिल नहीं किया गया है। रैना ने अपने करियर में कुल 223 वनडे खेले हैं जिनमें उन्होंने 93.76 के स्ट्राइक रेट से 5,568 रन बनाए हैं। रैना के बारे में कहा जाता रहा है कि वह अच्छी शुरुआत को बड़े में नहीं बदल पाते हैं और यही कारण रहा है कि वह अब तक टीम में अपनी जगह पक्की नहीं कर पाए हैं। रैना अक्सर टीम से अंदर बाहर होते रहते हैं। पिछले साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मुंबई में खेले अपने आखिरी वनडे में रैना ने सिर्फ 12 ही रन बनाए थे।

ऐसे में टी20 टीम में रैना को मौका मिला है और वह इस मौके को भुनाने का पूरा प्रयास करेंगे। रैना को पता है कि अगर उन्हें वनडे टीम में वापसी करनी है तो टी20 ही अब उनके पास एकमात्र रास्ता बचा है। ऐसे में जब सुरेश रैना इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में खेलने उतरेंगे तो उनकी नजरें वनडे टीम में वापसी पर होंगी।  ये भी पढ़ें: विराट कोहली के बाद ये उपलब्धि हासिल करने वाले दूसरे खिलाड़ी बने केन विलियमसन

5. शिखर धवन, (टीम से बाहर होने का दबाव): रोहित शर्मा के चोटिल होने की वजह से टीम में फिर से शामिल किए गए शिखर धवन के लिए ये आखिरी मौका साबित हो सकता है। धवन का फॉर्म काफी समय से खराब रहा है और वह लगातार खराब प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ अगर वह वापसी नहीं कर पाए तो उनपर टीम से बाहर होने का दबाव हो सकता है। धवन ने अपने करियर में 74 मैचों में 43.97 की औसत के साथ 3,078 रन बनाए हैं। धवन के नाम 9 शतक और 17 अर्धशतक हैं और उनका सर्वोच्च स्कोर 137 रन रहा है।

धवन ने पिछले साल 4 टेस्ट मैचों में 26 की मामूली औसत के साथ सिर्फ 156 रन ही बनाए थे। वहीं न्यूजीलैंड के खिलाफ भी उनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। धवन ने न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 1, 17 रनों की पारी खेली थी। लेकिन इसके बाद धवन चोटिल हो गए थे और उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था। धवन इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भी वापसी नहीं सर सके थे। लेकिन रोहित शर्मा के चोटिल होने के कारण अब उन्हें टीम में वापस बुलाया गया है। ऐसे में अगर उनका प्रदर्शन अव्वल दर्जे का नहीं रहा तो उन्हें रोहित की वपासी के बाद टीम से हाथ धोना पड़ सकता है।