महेंद्र सिंह धोनी फिलहाल भारत-न्यूजीलैंड सीरीज में कप्तानी कर रहे हैं © AFP
महेंद्र सिंह धोनी फिलहाल भारत-न्यूजीलैंड सीरीज में कप्तानी कर रहे हैं © AFP

वैसे तो भारतीय टीम के सीमित ओवरों के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हैं, फिर चाहें वो बल्लेबाजी में हों या फिर कप्तानी में। धोनी की कप्तानी की बात करें तो धोनी भारतीय टीम के सबसे सफल कप्तान हैं। धोनी ने अपनी कप्तानी में भारत को बुलंदियों पर पहुंचा दिया और युवा खिलाड़ियों को पनपने का मौका दिया। धोनी की कप्तानी में वनडे में भारत ने अब तक 196 मुकाबले खेले हैं जिनमें भारत ने 108 मैच जीते हैं तो 72 में भारत को हार मिली है। इस दौरान धोनी की जीत का प्रतिशत 59.78 रहा।

आज हम आपको देश के सबसे सफलतम कप्तान के उस रिकॉर्ड के बारे में बताएंगे जो शायद ही आपको पता हो। जी हां, सबसे ज्यादा टाई मैचों में कप्तानी करने वालों की सूचि में धोनी पहले स्थान पर हैं। दूसरे लहजे में कहें तो धोनी ने सबसे ज्यादा टाई मैचों में कप्तानी की है। धोनी की कप्तानी में भारत ने चार मैच टाई खेले हैं। तो आइए विस्तार से जानते हैं धोनी की कप्तानी में खेले गए उन टाई मैचों के बारे में।  भारत बनाम न्यूजीलैंड दूसरा वनडे, लाइव स्कोर जानने के लिए क्लिक करें

4. 27 फरवरी, 2011: भारत बनाम इंग्लैंड

मौका था साल 2011 में भारतीय उपमहाद्वीप में खेले गए आईसीसी विश्वकप के ग्रुप बी के ग्यारहवें मैच का। बैंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए उस मैच में भारत ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर की सलामी जोड़ी ने भारत को तेज शुरुआत दी, भारत का पहला विकेट 46 के कुल योग पर गिरा।

तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए गौतम गंभीर ने सचिन का बखूबी साथ दिया और भारत का स्कोर 100 रन के पार पहुंचा दिया। इसी बीच सचिन और गंभीर ने अपना-अपना अर्धशतक पूरा किया। गंभीर 61 गेंदों पर 51 रन बनाकर आउट हो गए और भारत का दूसरा विकेट 180 रन पर गिरा। इसके बाद बल्लेबाजी करने आए युवराज सिंह ने भारत के स्कोर को तेजी से बढ़ाना जारी रखा और इसी बीच सचिन ने अपना शतक पूरा कर लिया। युवराज भी तेजी से रन बनाने रहे थे। इसी बीच सचिन 120 के निजी स्कोर पर आउट हो गए भारत का स्कोर 236 पर 3 विकेट हो गया।

इसके बाद बल्लेबाजी के लिए आए धोनी ने तेजी से रन बनाए और युवराज के साथ मिलकर टीम का स्कोर 300 के पार ले गए, हालांकि अर्धशतक लगाकर युवराज सिंह पवेलियन लौट गए। धोनी के 31 रनों की मदद से भारत ने इंग्लैंड के सामने 338 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया।

पहाड़ जैसे स्कोर का पीछा करने उतरी इंग्लैंड टीम की शुरुआत भी अच्छी रही और केविन पीटरसन-एंड्रू स्ट्रास की जोड़ी ने टीम को तेज और मजबूत शुरुआत दी। पीटरसन के 22 गेंदों में 31 रन की बदौलत इंग्लैंड ने 9.3 ओवर में 68 रन जोड़ डाले। हालांकि 31 के निजी स्कोर पर पीटरसन आउट हो गए और भारत को पहली सफलता मिल गई।

इंग्लैंड का दूसरा विकेट भी जल्दी गिर गया और ट्रॉट 11 के निजी स्कोर पर आउट हो गए। लेकिन एंड्रू स्ट्रास मैदान पर जमे रहे और अपना अर्धशतक पूरा किया। स्ट्रास ने चौथे नंबर बल्लेबाजी के लिए इयान बेल के साथ 170 रनों की साझेदारी की और टीम की जीत की उम्मीद को बरकरार रखा। इसी बीच स्ट्रॉस ने अपना शतक भी पूरा किया। हालांकि 42.4 ओवर में इंग्लैंड को तीसरा झटका लगा और बेल 71 गेंदों में 69 रन बनाकर आउट हो गए।

इसके बाद भारत ने मैच में वापसी करते हुए इंग्लैंड का 289 पर 6 विकेट कर दिया। इंग्लैंड टीम के सभी बड़े बल्लेबाज पवेलियन लौट गए थे और भारत को जीत की खुशबू आने लगी थी। अंतिम दो ओवर में इंग्लैंड को जीत के 29 रन चाहिए थे और भारत को तीन विकेट। धोनी ने 49वें ओवर में पीयूष चावला को गेंद थमाई, क्रीज पर बल्लेबाज थे ग्रीम स्वान, चावला की पहली गेंद पर कोई रन नहीं बना। स्वान ने दूसरी गेंद पर छक्का जड़ दिया, तीसरी गेंद पर स्वान ने एक रन लेकर स्ट्राइक ब्रेसनन को दे दी। ब्रेसनन ने चौथी गेंद पर 2 रन लिए, पांचवीं गेंद पर ब्रेसनन ने छक्का लगा दिया, अंतिम गेंद पर ब्रेसनन आउट हो गए और भारतीय खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई।

अंतिम ओवर में इंग्लैंड को जीत के लिए 15 रन की जरूरत थी। मुनाफ पटेल की पहली गेंद पर स्वान ने 2 रन लिए, दूसरी गेंद पर स्वान ने एक रन लिया और स्ट्राइक पर शहजाद थे, शहजाद ने तीसरी गेंद पर छक्का लगा दिया और बालकनी में बैठे कप्तान स्ट्रास के चेहरे पर खुशी झलक पड़ी। चौथी गेंद पर इंग्लैंड को एक रन मिला, पांचवीं गेंद पर स्वान ने 2 रन दौड़कर ले लिए। अंतिम गेंद पर इंग्लैंड को जीत के लिए दो रन चाहिए थे, मुनफ की गेंद पर स्वान ने तेज ड्राइव किया और दौड़कर एक रन ले लिया और भारत के जबड़े से जीत छीनकर मैच को ड्रॉ करा दिया।

3. 11 सितंबर 2011: भारत बनाम इंग्लैंड:

धोनी की कप्तानी में भारत ने एक बार फिर से इंग्लैंड के खिलाफ दूसरा टाई मैच खेला। इंग्लैंड के लॉर्ड्स ग्राउंड में खेले गए उस मुकाबले में भारत ने एक बार फिर पहले बल्लेबाजी की और रैना के शानदार 84 और धोनी के नाबाद 78 रनों की बदौलत पचास ओवर में 280 रनों का स्कोर खड़ा किया।

जवाब में इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही और 61 रनों के भीतर ही इंग्लैंड के तीन खिलाड़ी पवेलियन लौट गए। इसके बाद बेल और बोपारा ने पारी को संभाला और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया, बेल 54 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद बोपारा ने इंग्लैंड के निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ मिलकर रन बनाने का सिलसिला जारी रखा। लेकिन जब इंग्लैंड को जीत के लिए दो ओवर में 15 रनों की जरूरथ थी इसी बीच मैच में बारिश ने खलल डाला और खेल रोके जाने तक इंग्लैंड को जीत के लिए सात गेंदों में 11 रनों की दरकार थी और उसके दो विकेट शेष थे, लेकिन इसके बाद मैच दोबारा शुरू नहीं हुआ और डकवर्थ लुऊस नियम के आधार पर मैच को टाई घोषित कर दिया गया।

2. 14 फरवरी 2012: भारत बनाम श्रीलंका:

ऑस्ट्रेलिया के एडीलेड में खेले गए उस मुकाबले में श्रीलंका ने टॉस जकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था। भारत ने श्रीलंका को पहला झटका शून्य पर ही दे दिया और 28 रन पर टीम के दो विकेट झटक लिए। इसके बाद संगकारा और चंडीमल ने पारी को संभाला, इसके बाद चंडीमल 43 के निजी योग पर आ्रउट हो गए और संगराका ने अपना अर्धशतक पूरा किया। श्रीलंका ने संगकारा के 84 रनों के बदौलत 50 ओवर में 236 रन का स्कोर खड़ा किया।

भारत के लिए मैच जीतना मुश्किल नहीं लग रहा था, गंभीर-सचिन की जोड़ी मैदान पर उतरी लेकिन कुलसेकरा ने सचिन को जल्दी आउट कर दिया। इसके भारत को तीन और झटके जल्दी-जल्दी लगे और भारत का स्कोर 118 रन पर 4 विकेट हो गया। लेकिन धोनी ने गंभीर के साथ मिलकर पारी को संभाला और दोनों ने अपने-अपने अर्धशतक पूरे किए। इसी बीच गंभीर दुर्भाग्यवश रन आउट हो गए और अपने शतक से केवर 9 रन से चूक गए।

भारत को अंतिम दो ओवर में 24 रनों की जरूरत थी और 49वें ओवर में भारत ने 15 रन ठोक डाले और मैच जीतने के बेहद करीब आ गए। अंतिम ओवर में भारत को जीत के लिए 9 रन चाहिए थे। क्रीज पर भारत के कप्तान धोनी थे, धोनी ने पहली गेंद पर 2 रन लिए, मलिंगा की दूसरी गेंद पर धोनी ने एक रन लिया, तीसरी गेंद पर विनय कुमार ने धोनी को स्ट्राइक दी, चौथी गेंद पर धोनी एक ही रन ले सके, पांचवीं गेंद पर बाउंड्री के बाहर भेजने के चक्कर में विनय कुमार आउट हो गए, अंतिम गेंद में धोनी क्रीज पर थे भारत को जीत के लिए चार रन चाहिए थे, अंतिम गेंद पर धोनी ने तेज शॉट खेला और दौड़कर तीन रन पूरे किए। इस तरीके से भारत ने मैच को टाई कराने में सफलता पाई।

1. 25 जनवरी 2014: भारत बनाम न्यूजीलैंड:

धोनी की कप्तानी में ये भारत का चौथा टाई मैच था। न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में खेले गए इस मुकाबले में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी की, गप्टिल और राइडर ने टीम को तेज शुरुआत दी, हालांकि 36 के कुल योग पर भारत ने राइडर को आउट कर दिया। लेकिन इसके बाद बल्लेबाजी के लिए उतरे विलियम्सन ने गप्टिल के साथ मिलकर तेजी से रन बनाने का सिलसिला जारी रखा और दोनों ने अपने-अपने अर्धशतक पूरे किए। विलियम्सन 65 के निजी स्कोर पर आउट हुए। इसी बीच गप्टिल ने अपना शतक पूरा किया और रॉन्की के साथ मिलकर टीम का स्कोर 300 के पीर पहुंचा दिया।

अंत में न्यूजीलैंड की टीम ने 50 ओवर में 314 का स्कोर खड़ा किया, भारत को जीत के लिए 315 रनों की दरकार थी। भारत की तरफ से रोहित-धवन ने टीम को ठोस शुरुआत दिलाई और पहले विकेट के लिए 64 रन जोड़े। इसके बाद भारत को जल्दी-जल्दी झटके लगे और भारत का स्कोर 79 रन पर 4 विकेट हो गया।

क्रीज पर आए धोनी ने रैना के साथ मिलकर पारी को संभालना ही शुरु किया था कि रैना 31 रनों पर आउट होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद धोनी, अश्विन और जडेजा ने अर्धशतक ठोक मैच में भारत की वापसी करा दी।

भारत को अंतिम ओवर में जीत के लिए 18 रन चाहिए थे और क्रीज पर जडेजा थे, जडेजा ने पहली गेंद पर चौका जड़ दिया, दूसरी गेंद वाइड रही और भारत को जीत के लिए अब पांच गेंदों पर 13 रनों की जरूरत थी। इसके बाद दूसरी और तीसरी गेंद पर कोई रन नहीं बना, चौथी गेंद पर जडेजा को फिर वाइड से एक रन मिला, चौथी गेंद पर जडेजा ने चौका जड़ दिया, पांचवीं गेंद पर जडेजा ने छक्का लगाकर भारत को जीत के दहलीज तक पहुंचा दिया अंतिम गेंद पर जीत के लिए दो रन चाहिए थे लेकिन जडेजा सिर्फ एक ही रन बना सके और मैच टाई हो गया।