वनडे और टी-20 टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को कई बार गलत फैसले के कारण आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा था © AFP (File Photo)
वनडे और टी-20 टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को कई बार गलत फैसले के कारण आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा है © AFP (File Photo)

महेंद्र सिंह धोनी को उनके अलग फैसले, रिस्क लेने की क्षमता और सबसे जुदा अंदाज के लिए जाना जाता है। मैदान पर धोनी जिस तरह से दांव-पेच खेलते हैं वो हर किसी के बस की बात नहीं होती। यही अंदाज धोनी को विश्व का सबसे सफल खिलाड़ी और कप्तान बनाता है। धोनी के फैसलों ने कई बार टीम इंडिया तो हार के मुंह से बाहर निकालकर जीत की दहलीज तक पहुंचाया है। 2007 का वो टी-20 विश्व कप भला कौन भूल सकता है, जब धोनी ने आखिरी ओवर हरभजन से न करवाकर जोगिंदर शर्मा से कराया था और भारत पहले टी-20 विश्व कप का चैंपियन बन गया था। अगर भारत वो मैच हार जाता तो धोनी को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ सकता था, लेकिन धोनी ने इन सब की परवाह न करते हुए अपने फैसले पर अडिग रहे। ऐसा ही धोनी ने 2011 विश्व कप में भी किया जब फॉर्म में चल रहे युवराज सिंह के स्थान पर वो बल्लेबाजी के लिए मैदीन पर उतरे और भारत को 28 साल बाद चैंपियन बना दिया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धोनी फैसलों की वजह से भारत को कई बार इसका खामियाजा भी उठाना पड़ा। कई दफा धोनी के फैसलों के कारण जीत की दहलीज पर खड़ी भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा है। आज हम आपको बताएंगे कि कब-कब धोनी के फैसले टीम इंडिया पर पड़े भारी।

5. 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला गया पहला टेस्ट:

साल 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेला मुकाबला धोनी के गलत फैसले की वजह से भी याद किया जाता है। धोनी के उस फैसले के लिए कई क्रिकेट पंडितों ने धोनी की जमकर आलोचना की थी। दरअसल, मैच के पहले दिन चोटिल होने के कारण जहीर खान नहीं खेल पाए थे, जिसकी वजह से धोनी सवालों में आ गए थे। टेस्ट मैच के दूसरे दिन सभी को चौंकाते हुए ग्लव्स उतारकर खुद ही गेंदबाजी करने का फैसला किया। ये फैसला क्रिकेट विशेषज्ञों को जरा भी रास नहीं आया और सबने धोनी को खूब खरी-खोटी सुनाई। धोनी की गेंदबाजी पर पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव ने कहा कि धोनी ने टेस्ट में गेदबाजी कर टेस्ट क्रिकेट का मजाक बनाया है, तुम ऐसा नहीं कर सकते। धोनी ने उस मैच में 8 ओवर कराए थे और उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला था। गौरतलब है कि भारत उस मुकाबले को 196 रन के बड़े अंतर से हार गया था

4. 2014 में इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 मैच

धोनी जब मैदान पर होते हैं तो उन्हें खुद पर पूरा भरोसा होता है कि वो किसी भी समय कोई भी लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। धोनी को 2014 में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए टी-20 के उस मुकाबले पर अपनी मैच फिनिशंग क्षमता पर पूरा यकीन था। उस मैच में भारत को चीत के लिए अंतिम ओवर में 17 रनों की दरकार थी। क्रीज पर थे धोनी और अंबाती रायडु। धोनी को खुद पर इस कदर भरोसा था कि आखिरी ओवर की हर गेंद उन्होंने ही खेली और रायडु को एक बार भी स्ट्राइक लेने का मौका महीं दिया। नतीजा भारत मुकाबले को 4 रन से हार गया। आखिरी दो गेंदों में जीत के लिए पांच रन चाहिए थे, पांचवीं गेंद पर धोनी ने डीप मिड वेकिट की तरफ शॉट खेला, शॉट पर सिंगल आसानी से लिया जा सकता था लेकिन धोनी अपनी क्रीज पर खड़े रहे और एक रन नहीं लिया। अगली गेंद पर जीत के लिए छक्के की जरूरत थी लेकिन धोनी छक्का लगाने में नाकामयाब रहे और भारत मैच चार रन से हार गया। ये भी पढ़ें: महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली ने टेस्ट में टीम को बनाया नंबर वन

3. ऑस्ट्रेलिया में कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज:

कैप्टन कूल के नाम से विख्यात महेंद्र सिंह धोनी को तब आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा जब ऑस्ट्रेलिया में साल 2011-12 में कॉमनवेल्श बैंक सीरीज में भारत को धोनी की वजह से हार का सामना करना पड़ा। धोनी अपनी फिनिशिंग क्षमता को परखते हुए मैच को अंतिम ओवर में खत्म करने का माद्दा रखते हैं और जब वो इसमें विफल हो जाते हैं तो उन्हें काफी आलोचना भी झेलनी पड़ती है। उस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 237 रनों का लक्ष्य दिया था। और गौतम गंभीर के 91 रनों की बेहतरीन पारी के दम पर भारत आसानी से मैच जीतने की तरफ बढ़ रहा था। लेकिन धोनी कुछ और ही सोच कर मैदान पर आए थे और वो मैच को आखिरी ओवर तक ले गए जिसके कारण भारत को वो मैच गंवाना पड़ा। फिर क्या था आलोचकों ने धोनी को आड़े हाथों लिया और जमकर धोनी को लताड़ा। यहां तक की गौतम गंभीर ने भी धोनी को हार का जिम्मेदार ठहराया और खुद के रन आउट का ठीकरा भी धोनी पर ही फोड़ा। ये भी पढ़ें: महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली ने टेस्ट में टीम को बनाया नंबर वन

2. टी-20 विश्व कप 2014, भारत बनाम श्रीलंका फाइनल:

2014 का टी-20 विश्व कप भारतीय फैन्स के लिए किसी सदमे से कम नहीं था। जिस स्टार खिलाड़ी ने भारत को टी-20 विश्व कप का खिताब जितवाया था वही 2014 में हार का विलेन बन कर उभरा था। फाइनल में हार के लिए युवराज सिंह ही जिम्मेदार थे। आखिर ऐसा क्या हो गया था कि एक हीरो अचानक विलेन बन गया। दरअसल, युवराज ने फाइनल मुकाबले में बेहद धीमी बल्लेबाजी की जिसके कारण भारत को फाइनल में हार का सामना करना पड़ा। युवराज सिंह ने मैच में 21 गेंदों पर सिर्फ 11 रन ही बनाए। जो कि टी-20 के लिहाज से काफी धीमी बल्लेबाजी थी और यही रन अंत में हार का कारण भी बने। जो मैच आसानी से भारत की झोली में आ सकता था वो युवराज की धीमी बल्लेबाजी के कारण भारत से दूर हो गया। जिसके बाद प्रशंसकों ने युवराज पर जमकर गुस्सा निकाला और धोनी के फैसले का भी विरोध किया कि धोनी ने युवराज को अंतिम एकादश में शामिल क्यों किया। तब युवराज के समर्थन में धोनी ने कहा ‘जितने निराश युवराज हैं, शायद ही कोई होगा’।

1. विश्व कप 2011, भारत बनाम साउथ अफ्रीका:

विश्व कप के ग्रुप मुकाबले में वीसीए स्टेडियम में खेला गया दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वो मैच कौन भूल सकता है। अंतम ओवर तक मैच की विजेता भारतीय टीम ही लग रही थी, लेकिन धोनी के एक फैसले ने पूरे मैच की तस्वीर बदल कर रख दी। उस फैसले के बाद धोनी हर किसी के निशाने पर आ गए थे। हर क्रिकेट फैंन धोनी को जमकर कोस रहा था। उस मैच में आखिरी ओवर में दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए 13 रनों की दरकार थी। धोनी ने अंतिम ओवर आशीष नेहरा से कराने का फैसला किया जबकि हरभजन ने उस मुकाबले में किफायती गेंदबाजी की थी। क्रीज पर मौजूद थे रॉबिन पीटरसन। रॉबिन पीटरसन ने नेहरा के उस ओवर में विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए दो चौकों और एक छक्के की मदद से टीम को अप्रत्याशित जीत दिला दी। जिसके बाद भारतीय प्रशंसकों का पारा गरम हो गया और उन्होंने धोनी और नेहरा को जमकर कोसा।