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धोनी और कोहली के बीच कप्तानी के लिए जबर्दस्त टक्कर देखने को मिलेगी © Getty Images

भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच वनडे मैचों की सीरीज का पहला मैच रविवार को धर्मशाला में खेला जाएगा। रविवार के मैच में भारत की जर्सी भी बदल जाएगी और कप्तान भी। हैरान मत होइए, हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकी भारत ने अभी न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेली थी जिसमें भारत की जर्सी का रंग सफेद था और कप्तान थे विराट कोहली। लेकिन वनडे में भारत की जर्सी का रंग होगा नीला और कप्तान होंगे महेंद्र सिंह धोनी। महेंद्र सिंह धोनी लंबे ब्रेक के बाद टीम की कमान संभालेंगे, धोनी के सामने जीत के रथ पर सवार टीम इंडिया की जीत की लय बरकरार रखने की होगी।

हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ संपन्न हुई टेस्ट सीरीज में विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने न्यूजीलैंड को चारों खाने चित कर दिए और न्यूजीलैंड की एक नहीं चलने दी। विराट की कप्तानी में टीम में जीत की भूख और जीतने की ललक साफ देखी जा सकती थी, नतीजा आपके सामने है। अब जबकि भारत को वनडे सीरीज खेलनी है तो भारत और टीम के कप्तान धोनी के सामने न्यूजीलैंड की चुनौती तो होगी ही, साथ ही धोनी को कोहली से मिल रही प्रतिस्पर्धा से भी पार पाना होगा। कोहली की कप्तानी में टेस्ट में टीम इंडिया ने अब तक बेहतरीन प्रदर्शन किया है। कोहली ने अब तक 17 टेस्ट मैचों में कप्तानी की है, जिनमें उन्हें 10 में जीत मिली है और 2 में हार, वहीं 5 मैच ड्रॉ रहे हैं। वहीं कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया घरेलू सरजमीं पर अब तक अजेय है। वहीं वनडे मैचों की बात करें तो वनडे में भी विराट कोहली ने 17 मैचों में कप्तानी की है और 70 की शानदार औसत से 850 रन बनाए हैं, जिनमें 4 शतक और 3 अर्धशतक लगाए हैं इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 99 का रहा। साफ है विराट कोहली ने कप्तानी करते हुए और बेहतर और तेज गति से रन बनाए हैं। कोहली के करियर का स्ट्राइक रेट 89 और औसत 51 की है। ये भी पढ़ें: जब वीवीएस लक्ष्मण ने मजेदार अंदाज में की क्रिकेटरों की जानवरों से तुलना

साफ है विराट कोहली जिम्मेदारी गले पड़ने पर और बेहतर, गंभीरता से खेलते हैं और उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने बेहतरीन प्रदर्शन भी किया है। ऐसे में अगर कीवियों के खिलाफ टीम को हार का मुंह देखना पड़ता है तो धोनी के सामने चुनौती आसान नहीं होगी। धोनी अब तक के सबसे सफलतम कप्तानों में से एक हैं। लेकिन कोहली की कप्तानी में टीम में जिस तरह का निखार आया है वो किसी से छुपा नही है। धोनी को अगर अपनी शाख बचानी है तो उन्हें अपनी रणनीति से कीवियों को हर हाल में धूल चटानी होगी वरना टेस्ट की तरह वनडे में भी कोहली धोनी से कप्तानी हथिया लेंगे। धोनी की कप्तानी की बात करें तो धोनी ने अब तक 194 मैचों में कप्तानी की है, जिनमें से भारत को 107 मैचों में जीत और 72 में हैार का सामना करना पड़ा है। वहींचार मैच टाई रहे और 11 का कोई नतीजा नहीं निकल पाया। इस दौरान धोनी की कप्तानी में टीम की जीत का प्रतिशत 59 फीसदी रहा। भारत ने धोनी की कप्तानी में अपार सफलताओं को छुआ है। धोनी ने ऐसे समय टीम की कमान संभाली थी जब 2007 टी-20 विश्व कप में भारत के तीनों दिग्गज सचिन, सौरव और राहुल ने खेलने से इनकार कर दिया था, उस समय बीसीसीआई ने धोनी के हाथ में युवा टीम की जिम्मेदारी सौंपी और कुछ ही दिन बाद भारत ने धोनी की कप्तानी में जो किया वो इतिहास के सुनहरे पन्नों में दरज है। भारत ने फाइनल में पाकिस्तान को रोमांचक मुकाबले में धूल चटाते हुए भारत को विश्व विजयी बना दिया। यहीं से धोनी के युग की शुरुआत हुई, धोनी का स्वर्णिम युग का सफर बढ़ता रहा, इसके बाद धोनी ने भारत को आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में जीत दिलाई और उसके बाद आईसीसी 2011 विश्व कप में जीत। 2015 विश्व कप में भी भारत सेमीफाइनल में पहुंचने में कामयाब रहा जहां ऑस्ट्रेलिया से उसे हार का सामना करना पड़ा था।

साफ है धोनी भारत के सबसे सफल कप्तान हैं, लेकिन समय बदलता है और समय के साथ कई बदलाव भी होते हैं। टेस्ट में भी धोनी भारत के बेहतरीन कप्तानों में से एक थे, लेकिन कुछ ही मैचों के गलत परिणामों ने धोनी की किस्मत बदल दी और सत्ता कोहली के हाथों में आ गई। अब अगर कीवियों के खिलाफ धोनी टीम को जीत नहीं दिला पाते तो उनपर आनेवाले दिनों में दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि एक तरफ कोहली की कप्तानी में भारत हर मैच में और अच्छा कर रहा है और ऐसे में धोनी पर दबाव बढ़ना लाजमी है। अब देखना ये होगा कि क्या टीम में कप्तानी के लिए प्रतिस्पर्धा भारत के हित में होगा या फिर इससे भारतीय टीम को कोई खामियाजा उठाना पड़ेगा।