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भारत बनाम इंग्लैंड राजकोट टेस्ट में मुरली विजय ने अपने करियर का सांतवां शतक जड़ा। © Getty Images

भारत बनाम इंग्लैंड टीम के बीच खेले जा रहे पहले टेस्ट का आज तीसरा दिन था। भारत की तरफ से दूसरे दिन बल्लेबाजी करने आए थे गौतम गंभीर और मुरली विजय, दोनो बल्लेबाज दिन का खेल खत्म होने तक पारी को संभाले लेकिन तीसरा दिन शुरू होते ही गंभीर 29 पर आउट होकर पवेलियन लौट गए और पिच पर आए चेतेश्वर पुजारा। पुजारा के साथ मिलकर मुरली विजय ने भारतीय टीम का स्कोर आगे बढ़ाया। दोनों ही बल्लेबाजों ने पहले अर्धशतक और फिर तेज शतक जड़ कर भारत का स्कोर 250 के पार पहुंचाया। वहीं आज के दिन के नायक रहे मुरली विजय, विजय ने इस मैच में अपने टेस्ट करियर का सांतवां शतक जड़ा। आज उनके पास मौका था 200 का आंकड़ा पार करने का पर अफसोस वह 126 रन पर आउट हो गए पर उनकी इस धमाकेदार पारी ने दर्शकों का काफी मनोरंजन किया। यह भी पढ़ें: भारत बनाम इंग्लैंड पहला टेस्ट लाइव ब्लॉग हिंदी में

मुरली ने 301 गेंदों में 126 रन बनाए साथ ही 9 चौके और चार छक्के भी लगाए। पुजारा ने भी उनका बखूबी साथ निभाया और 124 ताबड़तोड़ रन बनाए मगर स्टोक्स की गेंद पर वह एलेस्टर कुक को कैच थमा बैठे। पुजारा के जानें के बाद भी मुरली विजय लगातार खेलते रहे हालांकि उन्हें मांसपेशियों में खिचांव की शिकायत महसूस हो रही थी। उन्हें रन लेने के लिए दौड़ने में काफी दिक्कत भी हो रही थी मगर उन्होंने फिर भी अपना खेल जारी रखा। मुरली की आज की पारी कई मायनों में अहम है, उन्होंने यह पारी अपने लिए नहीं बल्कि टीम के लिए खेली। विजय ने न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में भी अच्छी बल्लेबाजी की थी लेकिन शतक लगाने में वह नाकाम रहे थे। विजय ने 2008 में अपने टेस्ट करियर की शुरूआत की थी और तब से लेकर आज तक उन्होंने टीम में अपना स्थान पाने के लिए काफी संघर्ष किया है। वह कभी भी टीम में स्थायी नहीं रहे, कई बार उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। इससे पहले मुरली ने साल 2015 में बांग्लादेश के खिलाफ फतुल्लाह में 150 रनों की पारी खेली थी। खान साहेब उसमान अली स्टेडियम में खेल गए इस मैच में मुरली विजय के साथ ही शिखर धवन मे 173 रनों की धमाकेदार पारी खेली थी और भारत ने 462 रन का स्कोर खड़ा किया था। हालांकि यह मैच ड्रॉ रहा था लेकिन इस मैच में धवन की पारी को सभी ने सराहा था और मुरली विजय की पारी अनदेखी रह गई। यहां पढ़ें: भारत बनाम इंग्लैंड राजकोट टेस्ट की मैच रिपोर्ट 

2008 में टेस्ट डेब्यू करने के बाद पहले शतक के लिए विजय को दो साल इंतजार करना पड़ा था। मुरली विजय ने अपना पहला शतक नौ अक्टूबर 2010 को बैंगलौर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगाया था। चिन्नास्वामी में खेल गए इस मैच में विजय ने वीरेंद्र सहवाग के साथ सलामी बल्लेबाजी करते हुए 139 रन बनाए थे। विजय की इस पारी की बदौलत भारत वह मैच सात विकेट से जीत गया था। हालांकि यह मैच सचिन के शानदार 214 रनों के लिए याद किया जाता है। विजय के साथ हमेशा ही ऐसा हुआ है जब भी उन्होंने शतक जमाया है किसी और खिलाड़ी ने उनके ज्यादा रन बनाकर मैच की लाइमलाइट अपनी तरफ कर ली। इससे पहले ऐसा भारत के एक और महान टेस्ट खिलाड़ी के साथ होता था वह थे राहुल द्रविड़। वैसे विजय और द्रविड़ में कई समानताएं हैं जैसे विजय भी भारत के एक ऐसे बल्लेबाज है जो ज्यादा चर्चा में भले ही न रहे हों पर वह अपना काम खामोशी के साथ करते रहते हैं। विजय और पुजारा की जोड़ी की तुलना राहुल और लश्र्मण की यादगार जोड़ी से की जाती रही है। आज के मैच में एक और खास बात रही वह है 500 रन का पीछा करते हुए साझेदारी बनाना। भारत को इस तरह की स्थितियों से राहुल ने कई बार निकाला है। राहुल द्रविड़ की तरह ही आज मुरली ने भी 500 जैसे बड़े स्कोर का पीछा करतो हुए पहले गंभीर के साथ और फिर पुजारा के साथ बड़ी साझदारी बनाई। इतने बड़े स्कोर का पीछा करते हुए जिस तरह की समझदारी और सूझ बूझ से बल्लेबाजी करनी चाहिए मुरली ने उसी परिपक्वता का परिचय देते हुए अपनी पारी खेली। भारत बनाम इंग्लैंड पहले टेस्ट का फुल स्कोरकार्ड यहां देखें

विजय आज के मैच में भले ही 200 का आंकड़ा न पार कर पाए हो मगर भारत अगर यह मैच जीतता है तो उसका सबसे बड़ा कारण मुरली विजय ही रहेंगे। विजय ने लगभग हारे हुए मैच में भारत को इस स्थिती पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां से भारत मैच को ड्रॉ कराने के बजाय जीतने के बारें में सोच सकता है। विजय हमेशा से भारत के लिए अनसंग हीरो रहें हैं। शायद अब समय आ गया है कि भारत उनकी योग्यता को पहचाने और उसका सम्मान करे। मुरली विजय इस समय जो प्रसिद्धी मिल रही है वह उससे कहीं ज्यादा के हकदार हैं। उम्मीद है आने वाले समय में भारतीय टीम का यह अनकहा सितारा रिकॉर्ड टेबल के साथ साथ लोगों के दिलों में भी जगह बना पाएगा।