सचिन तेंदुलकर ने 24 नवंबर 1989 को पहला टेस्ट अर्धशतक लगाया।  © Getty Images
सचिन तेंदुलकर ने 24 नवंबर 1989 को पहला टेस्ट अर्धशतक लगाया। © Getty Images

भारतीय क्रिकेट का सबसे चमकता सितारा हैं सचिन तेंदुलकर और आज है वह दिन जब दुनिया ने पहली बार इस सितारे की असली चमक देखी थी। तेंदुलकर ने अपने करियर में कई यादगार पारियां खेली हैं और उन्ही में से एक शानदार पारी उन्होंने आज से ठीक सत्ताईस साल पहले खेली थी। 24 नवंबर साल 1989 को लिटिल मास्टर टेस्ट में अर्धशतक लगाने वाले सबसे युवा बल्लेबाज बन गए थे। पाकिस्तान के खिलाफ फैसलाबाद में सचिन ने केवल 17 साल की उम्र में टेस्ट अर्धशतक जड़ा। यह टेस्ट सीरीज सचिन की डेब्यू सीरीज भी थी और पहली ही टेस्ट सीरीज में सचिन ने जता दिया कि आगे चलकर सचिन भारत ही नहीं विश्व क्रिकेट पर हुकूमत करने वाले हैं। ये भी पढ़ें: क्या केवल अनुभव के कारण पार्थिव पटेल को दी गई टेस्ट टीम में जगह?

सचिन ने अपना इस पारी के बाद ईसपीएएन को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि वह उस समय बहुत ज्यादा नर्वस थे। उन्होंने कहा, “मैं काफी नर्वस था और समझ ही नहीं पा रहा था कि क्या हो रहा है। मैंने सोचा कि यह एक स्कूल गेम है और ऐसे ही मैने खेला भी। मैं उस पर को कभी भुला नहीं सकता क्योंकि मुझे ऐसा लग रहा था कि यह मेरा पहला और आखिरी टेस्ट मैच होगा।” सचिन को भले ही ऐसा लगा रहा था कि यह उनके करियर का आखिरी मैच हो लेकिन जो बल्लेबाज सोलह साल की उम्र में अपने पहले ही टेस्ट में वकार यूनिस, वसीम अकरम और इमरान खान जैसे गेंदबाजों के सामने टिक जाए वह कोई साधारण खिलाड़ी नहीं हो सकता। इस सीरीज के पहले मैच में सचिन पहली पारी में मात्र 15 रन पर आउट हो गए थे जिसका उन्हें बहुत अफसोस हुआ, सचिन ने ठान लिया था कि अगले मैच में वह अपनी प्रतिभा को साबित करके रहेंगे। जिस सचिन को लोगों को घरेलू क्रिकेट में दोहरे और तिहरे शतक लगाते देखा था उसके खेलते देखने के लिए सभी उत्सुक थे। वहीं मुकाबला भी थी भारत के सबसे बड़े प्रतियोगी पाकिस्तान के साथ। 23 नवंबर को इस सीरीज का दूसरा टेस्ट फैसलाबाद में शुरू हुआ। पाकिस्तान ने टॉस जीता और पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया क्योंकि गेंदबाजी उनका मजबूत पक्ष था। भारत के सलामी बल्लेबाज कृष्णामचारी श्रीकांत और नवजोत सिंह सिद्धू मैदान पर उतरे, पहले विकेट के लिए दोनों ने 68 रनों की शानदार साझेदारी बनाई। लेकिन पाकिस्तान के धुंआधार तेज गेंदबाजों ने आखिर इस जोड़ी को तोड़ा, वसीम अकरम ने पहले श्रीकांत को फिर सिद्धू को चलता किया। इसके बाद मोहम्मद अजहरूद्दीन और संजय मांजरेकर ने साझेदारी बनाने की कोशिश की लेकिन वसीम मे अजहर को शून्य आउट कर इस साझेदारी को बनने से पहले ही तोड़ दिया। इसके बाद रवि शास्त्री केवल 11 रन पर सलीम ज़ाफर का शिकार बनें। भारत ने 101 रन पर चार विकेट खो दिए थे और मैदान पर मांजरेकर का साथ देने आए सत्रह वर्ष के सचिन। ये भी पढ़ें: प्रधानमंत्री को शादी का कार्ड देने संसद पहुंचे युवराज सिंह

सचिन ने पिछली पारी की गलतियों को व दोहराने का फैसला लिया और इस बार आराम से पाकिस्तान के तेज गेंदबाजों का सामना किया। सचिन बड़ी सहजता से वसीम, नावेज अंजुम और सलीम ज़ाफर का सामना कर रहे थे। सचिन ने मांजरेकर के साथ मिलकर भारतीय पारी को संभाला और रनों की रफ्तार को आगे बढ़ाया। दोनों बल्लेबाजों ने दिन खत्म होने तक कोई भी विकेट नहीं गिरने दिया। सचिन ने 35 रनों की पारी खेली तो वहीं मांजरेकर भी 58 पर नाबाद रहे। अगले दिन 24 नवंबर को एक बार फिर दोनों बल्लेबाज मैदान पर आए। तेंदुलकर का खेल देखकर सभी को यकीन हो गया था कि आज तो वह एक बड़ी पारी खेलेंगे। इसी के साथ मांजरेकर ने सचिन के साथ 100 रनों की साझेदारी पूरी कर ली। तेंदुलकर ने एक शानदार पारी खेलते हुए अपना अर्धशतक पूरा किया और क्रिकेट के इतिहास का एक रिकॉर्ड भी बना दिया। सचिन अपना पहला टेस्ट अर्धशतक लगाने के साथ ही सबसे कम उम्र में टेस्ट अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। हालांकि सचिन इसे शतक में नहीं बदल सके और 59 के स्कोर पर पाकिस्तानी टीम के कप्तान और लेग स्पिनर इमरान खान की गेंद पर एलबीडबल्यू हो गए। भारत की पहली पारी केवल 288 रनों पर सिमट गई। वहीं पाकिस्तान ने पहली पारी में आमेर मलिक के शतक की बदौलत 423 रन बनाए। भारत मुश्किल स्थिति में था और ऐसे में दूसरी पारी में शतक लगाकर मोहम्मद अजहरूद्दीन ने टीम को बचाया। लगभग हारने वाला मैच आखिरकार भारत ने 398 रन बनाकर ड्रॉ कराया। ये भी पढ़ें: पांच टेस्ट मैच जब 250 से भी ज्यादा रनों से जीती टीम इंडिया

इस मैच में मलिक और अजहरूद्दीन ने शानदार शतक लगाए थे लेकिन यह मैच आज भी सचिन की वजह से ही याद किया जाता है। सचिन तेंदुलकर ने इस मैच में अपनी प्रतिभा की एक छोटी सी झलक दिखाई थी। उस दौरे पर एक सत्रह साल के लड़के ने पाकिस्तान के मंझे हुए गेंदबाजों का जिस खूबसूरती से सामना किया उससे भारत के साथ साथ पाकिस्तान के लोग भी उनके फैन हो गए।