On This Day in 1982: When former Dilip Vengsarkar, Kapil Dev lit up Lord’s ground
दिलीप वेंगसरकर (Getty images)

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 14 जून को दिलीप वेंगसरकर की उस शतकीय पारी के नाम से याद किया जाता है, जो उन्होंने उन्होंने लॉर्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ खेली थी। साथ आज के दिन दिग्गज ऑलराउंडर कपिल देव ने उसी मैच में टेस्ट करियर का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था।

साल 1982 में इंग्लैंड दौरे पर गई भारतीय टीम ने सीरीज का पहला मैच लॉर्ड्स स्टेडियम में खेला था। 10 जून को शुरू हुए इस मैच में शुरू से ही इंग्लैंड टीम का पलड़ा भारी थी। कप्तान बॉब विलिस के टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए मेजबान टीम ने डेरेक रैंडल के शतक की मदद से 433 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।

वहीं पहली पारी में भारतीय टीम दिग्गज गेंदबाजी इयान बॉथम के घातक स्पेल का शिकार बनी और मात्र 128 रन बनाकर ढेर हो गई। बॉथम ने इस पारी में पांच विकेट हॉल दर्ज किया था।

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305 रन के पिछड़ी भारतीय टीम को इंग्लैड ने फॉलोऑन पारी खेलने के लिए बुलाया और इस बार भी भारतीय टीम की शुरुआत खराब रही। टीम इंडिया ने मात्र 47 रन पर कप्तान सुनील गावस्कर समेत दो विकेट खो दिए। लेकिन दूसरी पारी में भारतीय बल्लेबाजी क्रम उस तरह नहीं बिखरा जिसके इंग्लिश गेंदबाजों को उम्मीद थी।

तीसरे नंबर पर खेलते हुए वेंगसरकर भारतीय टीम के संकट मोचन बने। कप्तान विलिस और बॉथम की शानदार गेंदबाजी का सामना करते हुए वो क्रीज पर टिके रहे। दूसरे छोर पर रवि शास्त्री और गुंडप्पा विश्वनाथ जैसे खिलाड़ी एक-एक कर पवेलियन लौट रहे थे लेकिन वेंगसरकर ने इंग्लिश अटैक के सामने घुटने नहीं टेके।

पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव (Getty images)

वेंगसरकर ने 264 गेंदो पर 157 रन की अहम पारी खेली और भारतीय टीम को 250 का आंकड़ा पार कराया। उनकी इस पारी ने टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम में मैच ड्रॉ कराने की एक उम्मीद जगाई लेकिन वेंगसरकर को कैच आउट करा विपक्षी कप्तान विलिस ने इस उम्मीद को खत्म कर दिया।

कपिल देव vs इयान बॉथम

252 के स्कोर पर 5 विकेट गिरने के बाद टीम इंडिया ने दो रन के अंतर में दो और विकेट खो दिए और बल्लेबाजी क्रम बैकफुट पर चला गया। जहां से टीम को संभाला दिग्गज भारतीय ऑलराउंडर कपिल देव ने, जिन्होंने उस मैच में अपने टेस्ट करियर की सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक पारी खेली।

कपिल जब क्रीज पर उतरे तो स्टेडियम में मौजूद फैंस को विश्व क्रिकेट के दो बेहतरीन ऑलराउंडर्स के बीच का मुकाबला देखने को मिला- इयान बॉथम बनाम कपिल देव।

मैच उस पड़ाव पर आ चुका था, जहां पर एक मैचविनिंग प्रदर्शन खेल का रुख बदल सकता था। अब सब कुछ इसी बात पर टिका था कि वो मैचविनिंग प्रदर्शन कपिल करेंगे या बॉथम।

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कपिल देव ने उस पारी में तीन छक्कों और 13 चौकों की मदद से 55 गेंदो पर 89 रन जड़े। लेकिन उनका विकेट बॉथम ने ही लिया। ऐसे में मुकाबला कौन जीता ये कहना मुश्किल था लेकिन अभी दोनों खिलाड़ियों के सामने जीतने के लिए एक मैच था।

14 यानि कि मैच के चौथे दिन वेंगसरकर के शतक और कपिल देव की पारी की मदद से भारत ने दूसरा पारी में 369 का स्कोर बनाया और इंग्लैंड के सामने 65 रन का मामूली लक्ष्य रखा। इंग्लैंड के पास ये लक्ष्य हासिल करने के काफी समय था लेकिन भारत को जल्द से जल्द विकेटों की जरूरत थी और ये जिम्मा भी कपिल देव ने उठाया।

कपिल ने इंग्लैंड के नाइट वॉचमैन और सलामी बल्लेबाजों को चलता किया और चौथे दिन का खेल खत्म होने तक मात्र 23 रन पर इंग्लैंड के तीन विकेट गिरा दिए। हालांकि इस रोमांचक मैच का आखिरी दिन बेहद सामान्य रहा। एलेन लैम्ब और डेविड गॉबर ने मिलकर इंग्लैंड को जीत की सीमारेखा पार कराई और भारत ये मैच सात विकेट से हार गया।

टीम इंडिया की हार के बावजूद फ्रेडी ट्रूमैन ने मैन ऑफ द मैच का खिताब कपिल देव को दिया, जिन्होंने एक अर्धशतकीय पारी खेलने के अलावा 8 विकेट लिए थे, जिसमें पहली पारी में लिया पॉच विकेट हॉल भी शामिल था। यानि कि मैच भले ही इंग्लैंड ने जीता हो लेकिन बॉथम के साथ मुकाबले में कपिल देव विजेता के तौर पर उभरे।