विश्व क्रिकेट के सबसे महान खिलाड़ियों में से एक हैं सचिन रमेश तेंदुलकर। © Getty Images
विश्व क्रिकेट के सबसे महान खिलाड़ियों में से एक हैं सचिन रमेश तेंदुलकर। © Getty Images

आज भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा ही यादगार दिन है, आज के ही दिन क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने हमेशा के लिए इस खेल को अलविदा कह दिया था। आज से ठीक तीन साल पहले 14 नवंबर 2013 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत के इस दिग्गज खिलाड़ी ने अपना आखिरी मैच खेला था। यह खूबसूरत सफर उसी जगह खत्म हुआ जहां इसकी शुरूआत हुई थी। वही वानखेड़े स्टेडियम जहां खेलने का सपना मुंबई के इस खिलाड़ी ने कभी देखा था, वही स्टेडियम जहां करोड़ों हिंदुस्तानियों के साथ सचिन का 28 साल पुराना सपना सच हुआ और वही वानखेड़ें स्टेडियम जहां सारा देश एक साथ रोया था जब इस खिलाड़ी ने अपना आखिरी मैच खेला। ये भी पढ़ें: राजकोट टेस्ट में क्या थी कोहली की परेशानी

सचिन भारत के लिए सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं थे, सचिन कई युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा थे। चाहे वह विरेंद्र सहवाग हो, महेंद्र सिंह धोनी या विराट कोहली सभी ने क्रिकेट खेलना सचिन को देखकर ही शुरू किया था। वहीं इंग्लैंड के युवा हसीब हमीद ने भी यह कहा है कि सचिन उनके आदर्श हैं। अगर हम यह कहें कि सचिन ही कारण है कि आज इतने बेहतरीन खिलाड़ी विश्व क्रिकेट को अपने प्रदर्शन से प्रभावित कर रहें हैं तो गलत नहीं होगा। तेंदुलकर ने अपने सफर की शुरूआत मुंबई जो कि तब बाम्बे था से की थी। सचिन ने 11 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था और सोलह साल की उम्र में अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय मैच खेला था। 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ कराची में सचिन ने अपना पहला मैच खेला था हालांकि इस मैच में वह कुछ खास कमाल कर पाए थे लेकिन वह लगातार घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करते रहे और फिर से भारतीय टीम में धमाकेदार वापसी की। पांच फीट पांच इंच के इस लिटिल मास्टर के आगे छह फुट के ऑस्ट्रेलियन और पाकिस्तानी गेंदबाज लाचार नज़र आए। ब्रेट ली से लेकर शोयब अख्तर तक और वसीम अकरम से लेकर मुरलीधरन तक ऐसा कोई गेंदबाज नहीं जिसकी गेंदो पर सचिन ने चौके छक्के नहीं लगाए। एक समय ऐसा था जब गेंदबाज सचिन को आउट करना बड़ी उपलब्धि माना करते थे और किस गेंदबाज ने सचिन को कितनी बार आउट किया इसके रिकॉर्ड बना करते थे। ये भी पढ़ें:क्या है सचिन के नाम दर्ज एक अनोखा कीर्तिमान

सचिन ने अपने 24 साल के करियर में बहुत से रिकॉर्ड बनाए हैं। शतकों का शतक लगाने वाले सचिन अकेले बल्लेबाज हैं, वहीं सचिन का नाम विज्डन क्रिकेटर्स अल्मनाक में क्रिकेट के दो महान खिलाड़ियों सर डॉन ब्रेडमैन और विवियन रिचर्ड्स के बाद दूसरे स्थान पर है। यह किसी भी क्रिकेटर के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी जिसे सिर्फ सचिन ने हासिल किया है। सचिन अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें भारत का सबसे बड़ा सम्मान भारत रत्न दिया गया है। सचिन शायद इस सम्मान को पाने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं। सचिन ने अपने करियर में 463 वनडे और 200 टेस्ट खेले हैं जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। अगर हम सचिन के रिकॉर्ड की बात करने लगेंगे तो शायद एक दिन भी कम पड़ जाएगा। सचिन वनडे में दोहरा शतक बनाने वाले पहले खिलाड़ी थे, उन्होंने 24 फरवरी 2010 को ग्वालियर में साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहला वनडे का पहला दोहरा शतक लगाया था। हालांकि उनके बाद उन्ही के जोड़ीदार विरेंद्र सहवाग ने भी इंदौर में दोहरा शतक लगाया था और भारत के वर्तमान सलामी बल्लेबाज रोहित गुरूनाथ शर्मा ने पहले बैंगलौर फिर कोलकाता में दो दोहरे शतक लगाए। रोहित ऐसा करने वाले विश्व के अकेले खिलाड़ी हैं और मैं चाहूंगी कि वह अकेले ही रहें खैर हम बात कर रहे थे सचिन की। सचिन ने अपना आखिरी मैच 2013 में वेस्ट इंडीज के खिलाफ खेला था, वानखेड़ें में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में सचिन आखिरी बार भारतीय टीम की जर्सी में मैदान पर उतरे।

14 नवंबर के दिन वानखेड़े के मैदान पर भारतीय कप्तान महेंद्र सिहं धोनी और वेस्ट इंडीज के कप्तान डैरेन सैमी टॉस के लिए आए और धोनी ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था, सभी अपने हीरो को आखिरी बार खेलते देखना चाहते थे हालांकि दर्शक चाहते थे कि भारत पहले बल्लेबाजी करे ताकि वह सचिन को बल्लेबाजी करते देख सकें। पर धोनी का दिमाग हमेशा ही कुछ अलग सोचता हैं और इस बार भी वह ऐसा ही कुछ सोच रहे थे। पहले बल्लेबाजी करते हुए विंडीज टीम ने केवल 182 रन बनाए, उस दिन वानखेड़े की पिच पर प्रज्ञान ओझा के आगे पूरा वेस्ट इंडीज बल्लेबाजी क्रम बिखर गया। ओझा ने पांच विकेट लिए और अश्विन ने तीन, इसी के साथ वह पल आ गया जिसका पूरे भारत को इंतजार था। भारत की बल्लेबाजी की शुरूआज हुई और मैदान पर उतरे गब्बर सिंह यानि कि शिखर धवन और मुरली विजय। हालांकि धवन अपनी आदत से मजबूर ज्यादा समय कर क्रीज पर टिक नहीं पाए और 33 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद मैदान पर उतरे भारतीय बल्लेबाजी क्रम की रीढ़ की हड्डी कह जाने वाले चेतेश्वर पुजारा। पुजारा ने विजय के साथ अच्छी साझेदारी बनाई, खेल भारत के नियंत्रण में था लेकिन तब शायद पहली और आखिरी बार ऐसा हुआ होगा जब हर भारतीय फैन चाहता था कि भारत का विकेट गिरे ताकि सचिन क्रीज पर आ सके। मुरली विजय ने शायद उनके मन की बात सुन ली और 14वें ओवर में वह शिलिंगफोर्ड की गेंद पर कप्तान सैमी को कैच थमा बैठे। उस वक्त वेस्ट इंडीज के खिलाड़ियों से ज्यादा खुश भारतीय फैन्स थे, वहीं अगले ही पल मैदान पर उतरे सचिन तेंदुलकर और पूरा स्टेडियम उनके नाम से गूंजने लगा। सचिन ने मैदान में पैर रखने से पहले एक बार उसका अभिवादन किया, शायद उन्हें भी यह एहसास था कि अब वह कभी एक खिलाड़ी के बतौर यहां नहीं आएंगे। सचिन ने आते ही अपनी धमाकेदार बल्लेबाजी शुरू कर दी और दूसरे छोर से पुजारा उनका साथ देने लगे। भारत 150 का स्कोर पार कर चुका था जब पहले दिन का खेल खत्म हुआ, सचिन 38 रन पर नाबाद थे और पुजारा 34 पर। दूसरे दिन सचिन उसी तेवर के साथ मैदान पर आए और 91 गेंदों में अर्धशतक लगाया। उन्होंने पुजारा के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए 100 रन की साझेदारी बनाई। दर्शकों ने खुले दिल से उन्हें चियर किया सभी को उम्मीद थी कि आज सचिन शतक लगाएंगे। सचिन भी शायद इसी सोच के साथ मैदान पर उतरे थे लेकिन हमेशा हम जो चाहते हैं हमें नहीं मिलता अगर मिलता तो शायद सचिन कभी रिटायर ही नहीं होते। 48वें ओवर में देवनारायण ने आखिरी गेंद आउट साइड के हल्के बाहर की ओर रखी, सचिन गेंद को कट कर चौका लगाना चाहते थे लेकिन उनका बल्ला ज्यादा अंदर था। गेंद बल्ले के किनारे से लगकर पहली स्लिप पर खड़े सैमी के हाथों में गई। दर्शक दीर्घा में जैसे मौन छा गया, किसी को भी यकीन नहीं हो रहा था कि सचिन आउट हो गए हैं। फिर सभी ने खड़े होकर इस महान खिलाड़ी का अभिवादन किया, सचिन भी नम आंखों के साथ पवेलियन की ओर लौट गए। सचिन ने 150 गेंदो में 74 रनों की शानदार पारी खेली और इसी के साथ क्रिकेट को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

भारत ने पुजारा और रोहित शर्मा के शतकों की बदौलत विंडीज के सामने 495 रनों का लक्ष्य रखा, जवाब में वेस्ट इंडीज टीम दूसरी पारी में भी एक बार फिर 187 रन पर सिमट गई। प्रज्ञान ओझा ने इस पारी में भी पांच विकेट अपने नाम किए और मैन ऑफ द मैच बनें। भारत ने यह मैच आसानी से जीत लिया वहीं अफसोस इस बात का रहा कि भारत को दूसरी बार बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला और हम सचिन को एक बार फिर चौके छक्के लगाते नहीं देख सके। भारत ने सीरीज पर भी 2-0 से कब्जा कर लिया वहीं मैन ऑफ द सीरीज रहे रोहित शर्मा। आज इस दिन को तीन साल बीत गए हैं पर सचिन के बिना क्रिकेट कुछ अधूरा सा ही लगता है या यूं कहे कि क्रिकेट के बिना सचिन अधूरे हैं।