क्रिकेट इतिहास के दो रोमांचक टेस्ट मैच जो टाई हुए
फोटो साभार: © Getty Images(cricketcountry.com)

आधुनिक क्रिकेट में टी20 के इजाद के साथ टाईड मैचों की संख्या में इजाफा देखने को मिला है और अब टाइड मैच वनडे क्रिकेट में भी अक्सर देखने को मिल जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि टेस्ट क्रिकेट में भी मैच टाईड हो जाते हैं? ये सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन ऐसे ही कुछ बेहतरीन टेस्ट मैचों ने टेस्ट क्रिकेट को रोचक बनाया है। टेस्ट क्रिकेट अपने 150 से ज्यादा सालों के सफर के बाद अभी तक इस तरह के मैचों का 2 बार गवाह बन चुका है। दिलचस्प बात यह है कि इन दो टेस्ट मैचों में एक बार विपक्षी टीम टीम इंडिया रही। तो आइए नजर डालते हैं इन दो हाईवोल्टेज टेस्ट मैतों पर।

पहला टाई टेस्ट मैच: टाई टेस्ट मैच का पहला वाकया साल 1960 में ऑस्ट्रेलिया-विंडीज के मैच में देखने को मिला। इस टेस्ट मैच को बाद में ‘प्रथम टाई टेस्ट मैच’ के नाम से जाना गया। इस टेस्ट में वह सब कुछ हुआ जिसकी इसके पहले शायद ही किसी ने उम्मीद की थी। मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए सर फ्रेंक वॉरेल के नेतृत्व वाली वेस्टइंडीज की टीम ने गैरी सोबार्स के शानदार शतक 132 व अन्य बल्लेबाजों की बेहतरीन बल्लेबाजी की बदौलत पहली पारी में 453 रनों का स्कोर खड़ा किया।

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जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया ने दो कदम आगे निकलते हुए ओ. नेल के शानदार 181 रनों की मदद से 505 बनाए और पहली पारी के आधार पर 52 रनों की बढ़त ले ली। जवाब में वेस्टइंडीज तीसरी पारी में 284 रनों पर ऑलआउट हो गई। इस तरह ऑस्ट्रेलिया को चौथी पारी में 233 रन बनाने का लक्ष्य मिला। लेकिन यह इतना आसान नहीं था, क्योंकि मैच के आखिरी दिन पिच गेंदबाजों के अनुकूल हो गई थी।

वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज सर हॉल के आगे ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज पनाह मांगने लगे और एक समय ऑस्ट्रेलिया ने 92 रनों पर अपने शीर्ष 6 विकेट गंवा दिए। अब यहां से यह महसूस होने लगा कि वेस्टइंडीज आसानी से मैच जीत जाएगी। लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था और एलन डेविडसन(80) ने रिची बेनॉड के साथ सातवें विकेट के लिए 150 से ज्यादा रन जोड़े और ऑस्ट्रेलिया को जीत के दरवाजे पर ला खड़ा किया।

अब ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 7 रन की जरूरत थी और उसके पास चार विकेट शेष थे। हर किसी को यह लग रहा था कि अब मैच में मात्र औपचारिकताएं शेष हैं। लेकिन शायद लोगों को इस बात का भान नहीं था कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है। ऐसा ही कुछ हुआ 227 के स्कोर पर डेविडसन के आउट होते ही अगले कुछ ओवरों में विकटों की झड़ी लग गई और लगातार 3 खिलाड़ी रन आउट हो गए। इस तरह ऑस्ट्रेलिया 232 रनों पर ऑलआउट हो गई और यह रोमांचक टेस्ट मैच टाई हो गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अंतिम चार विकेट मात्र पांच रनों के अंतराल में धराशाई हो गए।

दूसरा टाई टेस्ट मैच: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच साल 1986 में चेन्नई के मैदान पर खेला गया टेस्ट मैच क्रिकेट इतिहास के दूसरे टाई टेस्ट मैच के रूप में रिकॉर्ड बुक में हमेशा-हमेशा के लिए दर्ज हो गया। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए डीन जोंस के दोहरे शतक (210), डेविड बून के शतक (122) और कप्तान एलन बॉर्डर के शतक(106) की बदौलत 574 रनों पर 7 विकेट के साथ पारी घोषित कर दी।

जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने कपिल देव के शानदार शतक 119 व अन्य तीन बल्लेबाजों के अर्धशतकीय पारियों की बदौलत 397 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया ने तीसरी पारी 170/5 पर घोषित कर दी। इस तरह भारतीय टीम को 348 रनों का एक मुश्किल लक्ष्य मिला। लेकिन शायद ही ऑस्ट्रेलिया को इस बात का भान था कि भारतीय टीम इतना पड़ा पलटवार कर सकती है। चौथी पारी में बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने अपना पहला विकेट श्रीकांत(39) के रूप में 55 के स्कोर पर गंवा दिया।

फोटो साभार: sportskeeda.com
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लेकिन इसके बाद गावस्कर और मोहिंदर अमरनाथ ने जमकर बल्लेबाजी की और दूसरे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी निभाई। लेकिन मोहिंदर अमरनाथ के आउट होने के बाद भारतीय पारी की निरंतरता डगमगा गई और एक निश्चित अंतराल में विकेट गिरने लगे। भारत ने इस तरह 331 के स्कोर पर अपने 7 विकेट खो दिए। अब भारतीय टीम को जीतने के लिए 17 रनों की जरूरत थी जबकि हाथ में तीन विकेट शेष थे। लेकिन चेतन शर्मा के आउट होते ही किरन मोरे, यादव और महिंद्र सिंह स्पिन गेंदबाज ब्राइट की फिरकी में उलझते हुए आउट हो गए। इस तरह भारतीय टीम ने चौथी पारी में 347 रन बनाए और टेस्ट मैच टाई रहा।

यह टेस्ट मैच टाइड होने वाला दूसरा टेस्ट मैच रहा। इसके बाद अब तक कोई ऐसा अन्य वाकया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रिकॉर्ड नहीं किया गया।